समाचार संपादन

‘समाचार संपादन’ में ‘समाचार’ संकलन एवं समाचार लेखन की चर्चा की गर्इ है। इसके साथ ही समाचार संपादन कैसे होता है उस पर भी चर्चा की गर्इ है। फीचर लेखन, लेख लेखन, साक्षातकार की चर्चा भी सविस्तार से की गर्इ है। समाचार संकलन  एक पत्रकार को समाचार संकलन में यह स्रोत ही काम आता है क्योंिक …

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प्रमाप लागत विधि क्या है ?

प्रमाप लागत लेखा-विधि का विधिवत् अध्ययन करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि प्रमाप लागत से क्या आशय होता है। सामान्यत: प्रमाप लागत से तात्पर्य उन लागतों से होता है ,जो एक दी गयी परिस्थितियों में एक प्रदत्त उत्पादन की मात्रा पर सामान्य रुप में की जा सकती हों। ब्रउन एवं हावर्ड के अनुसार, …

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समाचार का अर्थ, परिभाषा एवं लेखन प्रक्रिया

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह एक जिज्ञासु है। मनुष्य जिस समूह में, जिस समाज में और जिस वातावरण में रहता है वह उस बारे में जानने को उत्सुक रहता है। अपने आसपास घट रही घटनाओं के बारे में जानकर उसे एक प्रकार के संतोष, आनंद और ज्ञान की प्राप्ति होती है। आज ‘समाचार’ शब्द …

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रोकड़ प्रबंध क्या है ?

रोकड़ एक ऐसी महत्वपूर्ण चल सम्पत्ति है जिसके बिना किसी व्यवसाय का सफल संचालन करना संभव नहीं होता। रोकड़ में सर्वाधिक तरलता का गुण रहता है। इस कारण रोकड़ का प्रबन्ध वित्त प्रबन्धकों की सबसे बड़ी समस्या है। रोकड़ प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य संस्था की तरलता एवं लाभदायकता में वृद्धि करना होता है। कार्यशील पूंजी के …

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प्रबंध के सम्प्रदाय

प्रबन्ध की विचारधारा का जन्म कब हुआ, इसका स्रोत क्या था? इस विषय में चिरकाल से आजतक स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किन्तु इस सम्बन्ध में यह तो स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि जितनी पुरानी हमारी मानव सभ्यता है उतना ही पुराना प्रबन्ध की विचारधारा का जन्म। इसके सम्बन्ध …

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मापनी विधियाँ किसे कहते हैं ?

किसी मापन उपकरण द्वारा मापने की प्रविधि को मापनी विधियां कहते हैं। मापनी विधियों में निर्धारण मापनी, सामाजिक दूरी मापनी, अभिवृति मापनी, मूल्य-मापनी आदि मुख्य रूप से आती है। निर्धारण मापनी का प्रयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि केार्इ व्यक्ति अपने साथियों अथवा परिचितों के समक्ष अपने व्यक्तित्व के सम्बन्ध में क्या छवि …

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स्कन्ध प्रबंध का अर्थ

स्कन्ध का प्रबन्ध  स्कन्ध का आशय स्कन्ध के भौतिक सत्यापन से होता है जिसमें गणना प्रधान क्रिया मानी जाती है। परन्तु आजकल इसका अर्थ व्यापक रूप से लगाया जाता है। स्कन्ध में विभिन्न वस्तुओं की रखी गयी मात्रा से होता है अर्थात यदि तैयार माल का स्कन्ध उचित है तो ग्राहकों की सेवा उचित ढंग से …

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प्रबंध की संकल्पना एवं संरचना

बहुधा प्रबन्ध शब्द का प्रयोग सुव्यवस्थित, सुसंगठित तथा क्रमबद्ध रूप से कार्यों के सम्पन्न होने के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में, कम्पनियों का संचालन करने वाले व्यक्तियों के संदर्भ में भी इसका प्रयोग करते हैं। इन कम्पनियों के संचालन हेतु व्यवसायिक रूप से प्रशिक्षित प्रबंधकों की आवश्यकता होती है। इन प्रबन्धकों की सफलता उनके …

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व्यक्ति अध्ययन विधि (शिक्षा मनोविज्ञान)

व्यक्ति अध्ययन विधि एक ऐसी विधि है जिसमें किसी सामाजिक इकार्इ के जीवन की घटनाओं का अन्वेषण तथा विश्लेषण किया जाता है। सामाजिक इकार्इ के रूप में किसी एक व्यक्ति, एक परिवार, एक संस्था, एक समुदाय आदि के बारे में अध्ययन किया जा सकता है। व्यक्ति-अध्ययन का उद्देश्य वर्तमान को समझना, उन भूतकालीन घटनाओं का पहचानना …

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कार्यशील पूंजी का अर्थ, आवश्यकता, महत्व, प्रकार एवं स्रोत

किसी भी संगठन में कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी …

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