हिन्दी भाषा के विविध रूप

भाषा का सर्जनात्मक आचरण के समानान्तर जीवन के विभिन्न व्यवहारों के अनुरूप भाषिक प्रयोजनों की तलाश हमारे दौर की अपरिहार्यता है। इसका कारण यही है कि भाषाओं को सम्प्रेषणपरक प्रकार्य कर्इ स्तरों पर और कर्इ सन्दर्भों में पूरी तरह प्रयुक्ति सापेक्ष होता गया है। प्रयुक्ति और प्रयोजन से रहित भाषा अब भाषा ही नहीं रह गर्इ …

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श्रम कल्याण के सिद्धान्त एवं प्रशासन

कोर्इ भी श्रम कल्याण सम्बन्धी योजना अथवा कार्यक्रम तब तक प्रभावपूर्ण रूप से नही बनाया जा सकता जब तक कि समाज के नीति निर्धारक श्रम कल्याण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुये इसके सम्बन्ध में उपयुक्त नीति बनाते हुए अपने इरादे की स्पष्ट घोषणा न करें और इसे कार्यान्वित कराने की दृष्टि से राज्य का समुचित …

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व्यवसायिक पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, प्रकृति, घटक एवं महत्व

व्यावसायिक पर्यावरण दो शब्दों-व्यवसाय एवं पर्यावरण के संयोग से बना है। व्यवसाय, विद्यमान पर्यावरण में रहकर अपनी क्रियाओं को संचालित करता है। व्यवसाय को पर्यावरण प्रभावित करता है और व्यवसाय पर्यावरण को प्रभावित करता है। अत: दोनों ही अन्तर्सम्बन्धित हैं। वास्तव में व्यावसायिक पर्यावरण उन सभी परिस्थितियों, घटनाओं एवं कारकों का योग है जो व्यवसाय पर …

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भाषा का अर्थ, परिभाषा एवं माध्यम

भाषा : सामान्य परिचय  भाषा एक सामाजिक क्रिया है, किसी व्यक्ति की कृति नहीं। समाज में यह विचार-विनिमय का साधन है। मनुष्य और मनुष्य के बीच, वस्तुओं के विषय में अपनी इच्छा और मति का आदान-प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि-संकेतों का जो व्यवहार होता है, उसे भाषा कहते हैं। भाषा किसी-न-किसी वस्तु के बारे में …

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श्रम कल्याण क्या है ?

कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के कल्याण, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न पहलुओं को नियमित करने का दायित्व सरकार अपने ऊपर लेती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने कारखाना अधिनियम, 1948 (Factory Act, 1948) प्रतिपादित किया। इसका उद्देश्य श्रमिकों को औद्योगिक और व्यावसायिक खतरों …

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शून्य आधार बजट क्या है ?

शून्य आधार बजटन ऐसी नियोजन एवं बजटन प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया जाता …

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पत्रकारिता और अनुवाद

पत्रकारिता में अनुवाद की समस्या से परिचय कराने की दृष्टि से प्रस्तुत लेख ‘पत्रकारिता और अनुवाद’ में समाचार माध्यमो के लिए लिखे जाने वाले समाचारो के अनुवाद की समस्या की चर्चा की गर्इ है। इसके साथ ही पत्रकारिता की भाषा के अनुवाद, शैली, शीर्षक-उपशीर्षक, मुहावरे एवं लाक्षणिक पदबंधों, पारिभाषिक शब्दावली के अनुवाद की समस्या और उसके …

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स्फीति लेखा-विधि का अर्थ, उद्देश्य, तकनीक, लाभ एवं दोष

स्फीति लेखा-विधि मूल्य-स्तर के परिवर्तनों का वित्तीय विवरणों पर पड़ने वाले प्रभाव की समस्या के समाधान के लिये वित्तीय लेखापालों द्वारा विकसित की गर्इ लेखा प्रणाली को ही स्फीति लेखा-विधि कहते हैं। यह वह तकनीक है जिसके द्वारा सामान्य मूल्य स्तर के परिवर्तनों को प्रदर्शित करने के लिये वित्तीय विवरण पुनर्वर्णित किये जाते हैं ताकि लेखांकन …

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पत्रकारिता के विविध आयाम

मुद्रण के आविष्कार के बाद संदेश और विचारों को शक्तिशाली और प्रभावी ढंग से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना मनुष्य का लक्ष्य बन गया। समाचार पत्र पढ़ते समय पाठक हर समाचार से अलग अलग जानकारी की अपेक्षा रखता है। कुछ घटनाओं के मामले में वह उसका विवरण विस्तार से पढना चाहता है तो कुछ अन्य …

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मानव संसाधन लेखांकन क्या है ?

मानव संसाधन लेखांकन को एक ऐसी लेखांकन पद्धति के रूप में माना जा सकता है, जिसके प्रयोग से मानव संसाधनों को सम्पत्ति के रूप में मान्यता प्रदान की जाती हो और अन्य भौतिक साधनों की भांति जिनके मूल्य को माप कर लेखा पुस्तकों में दर्ज किया जाता हो। इसके माध्यम से मानव संसाधनों के सम्बन्ध में …

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