जीर्ण रोग किसे कहते हैं? जीर्ण रोग के कारण

जीर्ण का अर्थ होता है पुराना अर्थात जो रोग काफी पुराना हो जाता है अर्थात काफी दिनों से शरीर में रोग दबा रहता है जिसे ठीक होने में भी काफी समय लगता है, उसे जीर्ण रोग कहते हैं। जैसे- कब्ज, कैंसर, अग्निमांद्य, मधुमेह, रूसी, दुर्बलता, जोड़ों की विकृति, हड्डियों के रोग, हृत्शूल, धमनी काठिन्य, अश्मरी, अस्थिक्षय, …

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विजातीय द्रव्य क्या है इसके बनने के कारण?

शरीर के भीतर जो बेकार चीज होती है, जैसे- मल, मूत्र, पसीना, कफ, दूषित सांस, दूषित रक्त, दूषित मांस, पीप आदि जो शरीर को विषाक्त व दूषित करते हैं, शरीर का विनाश करते हैं, शरीर के लिए अनुपयोगी है, उसे ही दोष, विकार, मल या विजातीय द्रव्य के नाम से जाना जाता है।  विजातीय द्रव्य क्या …

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प्राकृतिक आहार क्या है ?

प्राकृतिक आहार ही मनुष्य शरीर के लिए सबसे अच्छा है। जब तक मनुष्य प्राकृतिक आहार को नहीं अपनाता उसका निरोग रहना असम्भ्व है। फल, दूध, तरकारिया, अनाज मनुष्य के प्राकृतिक आहार है। यदि आहार में कोई मूलभूत परिवर्तन न किया जाये तथा प्रकृति ने पदार्थ को जिस रूप में दिया है उसको न बिगाड़ कर प्रयोग करे …

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पंडित शिवकुमार शर्मा संतूर वादन की जीवनी, कार्य, सम्मान व पुरस्कार

पं0 शिवकुमार शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू कश्मीर के डोगरा में हुआ। पं0 शिवकुमार शर्मा के पिता का नाम पं0 उमा दत्त शर्मा था। पं0 उमा दत्त शर्मा वाद्यकार व गायक थे। पं0 उमा दत्त शर्मा को इस वाद्य यंत्र की क्षमताओं का पता था। उन्होने इस वाद्य पर शोध कर इसको एक …

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रोग क्या है इसके कारण

जब हमारा खान-पान, रहन-सहन, आहार-विहार अप्राकृतिक एवं दूषित हो जाता है तब हमारे शरीर में दोष जिसे विजातीय द्रव्य कहते हैं, एकत्रित हो जाता है। शरीर में संचित विष ही रोग है। शरीर से मल और दूषित पदार्थों के हटाने के प्रयत्न को रोग कहते हैं। रोगों के प्रकार मानव शरीर के तीन पहलू बताये हें-  …

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स्कन्ध विपणि क्या है इसके कार्यों का वर्णन?

किसी भी देश की स्कन्ध विपणि उस देश के पूंजी बाजार का आधार होती है जैसा कि इसके नाम से ज्ञात है स्कन्ध विपणि में स्टाॅक का क्रय विक्रय होती है अन्य शब्दों में स्कन्ध विपणि से आशय ऐसे स्थायी एवं संगठित बाजार से है जहां सूचीबद्ध संयुक्त पूंजी वाली कंपनियों के कई प्रकार के अंशों, ऋण …

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स्वस्थ रहने के प्राकृतिक उपाय या नियम क्या है ?

प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन व्यतीत करने वाला मनुष्य हमेशा स्वस्थ रहता है। कुछ लोगों का भ्रम है कि प्राकृतिक जीवन का तात्पर्य जंगली जीवन व्यतीत करना तथा कच्चे खाद्य पदार्थ का सेवन करना है।  स्वस्थ रहने के प्राकृतिक उपाय प्राकृतिक नियमानुसार जीवन को स्वस्थ बनाने के लिए उपाय बताये गये है- 1. प्रातःकाल टहलना …

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आलाप किसे कहते हैं आलाप कितने प्रकार का होता है?

किसी राग के स्वरों का उसके वादी, संवादी तथा विशेष स्वरों को दिखलाते हुए विस्तार करना और साथ में उसे वर्ण, गमक, अलंकार, आदि से विभूषित करना, उस राग का ‘आलाप’ कहलाता है। राग का स्वरूप स्पष्ट करने के लिए उसके स्वरों को सजाकर धीमी लय में उसका आलाप करते हैं।  आलाप द्वारा गायक राग के …

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स्वस्थ रहने के नियम, स्वस्थ जीवन शैली के नियम

स्वास्थ्य ही जीवन है। यदि स्वास्थ्य अच्छा है, तो व्यक्ति सुखी और सम्पन्न दिखायी देता है, निर्धनता क अभाव में भी वह उत्साही कार्यनिष्ठ तथा आत्मशक्ति ये भरपूर होता है। यहाँ पर हम कुछ स्वस्थ रहने के नियमों की चर्चा कर रहे हैं, जिनका पालन करने से स्वास्थ्य सदैव उत्तम बना रहता है, रोग पनपते नहीं …

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ग्रामीण ऋणग्रस्तता क्या है इसके कारण एवं परिणाम

ऋणग्रस्तता का आशय है ऋण से ग्रस्त व्यक्ति के लिए ऋण चुकाने की बाध्यता का होना। ग्रामीण भारत में निर्धन किसानों एवं मजदूरों द्वारा अपनी आवश्यकताओं के कारण लिया जाने वाला कर्ज जब बढ़ जाता है एवं वे अपनी कर्ज अदायगी में असमर्थ हो जाते हैं तो यह स्थिति ग्रामीण ऋणग्रस्तता की समस्या उत्पन्न करती है। …

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