भारत में औद्योगिक वित्त निगम की स्थापना कब हुई थी इसके उद्देश्य एवं कार्य?

भारतीय औद्योगिक वित्त निगम की स्थापना जुलाई 1948 को औद्योगिक वित्त निगम अधिनियम 1948 के अन्तर्गत वैधानिक निगम के रूप में की गयी। 1 जुलाई 1993 को निगम की प्रकृति में परिवर्तन करके इसे एक कम्पनी का रूप प्रदान कर दिया गया है। इस प्रकार अब इसका नाम भारतीय औद्योगिक वित्त निगम लिमिटिड हो गया है। …

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मांग तालिका तथा मांग वक्र क्या है ?

अर्थशास्त्रा में ‘मांग’ शब्द का प्रयोग विशेष अर्थों में किया जाता है। सामान्यतया इच्छा, आवश्यकता तथा माँग शब्दों का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता है, परंतु अर्थशास्त्र में इन तीनों शब्दों के अर्थ भिन्न होते हैं। इच्छा एक अभिलाषापूर्ण विचार है। यदि आपकी एक रंगीन टी. वी. लेने की इच्छा है परंतु आपवेफ पास …

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कृषि मूल्य नीति से क्या अभिप्रायः है ? कृषि मूल्य नीति के उद्देश्य तथा मुख्य अंश

कृषि उत्पादन की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से किसानों तथा समाज पर बुरा प्रभाव पडता है। इसलिए एक कृषि मूल्य नीति का होना अत्यन्त आवश्यक है। कृषि मूल्य नीति, कृषि उत्पादन को बढाने के लिए, खाद्यानों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तथा औद्योगिक क्षेत्र की कच्चेमाल की आवश्यकता की नियमित पूर्ति के लिये आवश्यक है। …

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दीर्घकालीन वित्त क्या है ? दीर्घकालीन वित्त की आवश्यकता एवं महत्व का वर्णन

औद्योगीकरण के इस व्यापक प्रचार के साथ-साथ ही दीर्घकालीन वित्त का महत्व एवं आवश्यकता भी उसी अनुपात में बढ़ी है। कुछ विद्वान उद्योग एवं व्यापार में 10 वर्ष से अधिक की वित्तीय आवश्यकताओं को दीर्घकालीन वित्त कहते हैं। परन्तु सामान्य स्वीकार्य अवधारणा एवं भारतीय योजना आयोग द्वारा निर्धारित अवधि के अनुसार भारत में उन सभी वित्तीय …

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उत्पादन फलन किसे कहते है ? इसकी विशेषताएं

उत्पादन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत उत्पादन कार्य उत्पादन के अनेक साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, साहस तथा संगठन) के सामूहिक सहयोग एवं साधनों के एक विशेष सम्मिश्रण से सम्पन्न किया जाता है। उत्पादन के साधनों को अर्थशास्त्र की भाषा में आगत अथवा आदा कहा जाता है तथा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं को निर्गत अथवा प्रदा …

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लाभांश नीति को प्रभावित करने वाले तत्व

लाभांश नीति को प्रभावित करने वाले तत्व  लाभांश नीति का उद्देश्य यही होता है कि अंशधारियों की अधिक लाभांश आशा को पूरा किया जाए और बकाया आय द्वारा कम्पनी की विनियोग आवश्यकताओं को पूरा कर उसके कल्याण का भी ध्यान रखा जाए । इस कार्य के लिए यह निर्णय लेना आवश्यक हो जाता है कि कितना …

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कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने के उपाय

भारतीय कृषि में कृषिगत क्षेत्र को बढ़ाने की बहुत ही कम संभवना है। केवल गहन खेती (श्रम गहन एवं पूंजी गहन दोनों ) द्वारा ही कृषि उत्पादन को बढ़ाने की ज्यादा सम्भावना है। प्रत्येक कृषक अपने खेत की उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने का प्रयास करता है। उत्पादन एवं उत्पादकता में थोड़ा अन्तर होता है। उत्पादन …

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लाभांश नीति के प्रकार

लाभांश नीति के निर्धारण के लिए ऐसा कोई सूत्र नहीं दिया जा सकता है जो प्रत्येक स्थिति में लागू होता हो, क्योंकि यह कम्पनी की परिस्थितियों एवं प्रबंधकों की नीतियों पर निर्भर करती है। ऐसी नीति जो अंशधारियों एवं कम्पनी दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों, उसे ही सुदृढ़ व सुसंगत नीति कहा जा सकता है। …

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भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्व है।

पिछले कई दशकों से भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है।  भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व 1. राष्ट्रीय आय में कृषि का हिस्सा भारत की राष्ट्रीय आय में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। 1950-51 में सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में कृषि का हिस्सा 56.5 प्रतिशत था। जैसे-जैसे विकास की प्रक्रिया तेज …

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पूंजी बजटन क्या है? पूंजी बजटन की विशेषतायें बताते हुए इसके उद्देश्यों का वर्णन।

पूंजी बजटन प्रबंध की वह तकनीक है जिसके अनतर्गत पूंजीगत व्यय का इस प्रकार नियोजन होता है जिससे इन व्ययों के उद्देश्य को सरलता पूर्वक प्राप्त किया जा सके। इसके अन्तर्गत पूंजीगत पूंजी विनियोग के समस्त अवसरों एवं विकल्पों का विश्लेषण कर सर्वश्रेष्ठ विकल्प/अवसर का चुनाव किया जाता है। पूंजी बजटनः अर्थ व परिभाषाएँ पूंजी बजटन …

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