भारत के खनिज संसाधन कौन कौन से हैं?

भारत में विभिन्न प्रकार के खनिजों का भंडार है। प्रायद्वीपीय पहाड़ियों में अधिकतम कोयले की खदानें, धातु खनिज एवं कुछ अन्य अधातु खनिज पाए जाते हैं। पश्चिमी एवं पूर्वीय प्रायद्वीपों की तलछटी चट्टानों विशेषत: गुजरात तथा असम में पैट्रोलियम पदार्थ अधिक पाए जाते हैं। राजस्थान के प्रायद्वीपीय चट्टानों में ग़ैर-लौह खनिज का भंडार है। यदि हम …

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हाइकु क्या है ?

हाइकु क्या है ?  हाइकु मूलत: जापानी साहित्य की एक प्रमुख विधा है। आज हाइकु जापानी साहित्य की सीमाओं को लाँघकर विश्व साहित्य की निधि बन चुका है। आज हिन्दी साहित्य में हाइकु की चर्चा भरपूर हो रही है। हिन्दी में हाइकु जोर शोर से लिखे जा रहे हैं। निरन्तर हिन्दी हाइकु संकलन प्रकाशित हो रहे …

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NITI AAYOG | नीति आयोग की स्थापना के उद्देश्य संरचना कार्य

1950 से, भारत सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से पूरे देश में तेजी से सामाजिक और आर्थिक विकास लाने का प्रयास किया। इस कार्य को करने के लिए मुख्य संस्थान योजना आयोग था, जिसे 1950 में प्रारम्भ किया गया था और यह 2014 के अंत तक कार्य कर रहा था। इसके बाद जनवरी 1, 2015 को, योजना …

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मोलस्का का वर्गीकरण और सामान्य लक्षण

मोलस्का का अर्थ लैटिन भाषा में “मौलिस” का अर्थ है “नरम”। मोलस्का का शरीर नरम होता है, किंतु इसके ऊपर बाहर से कड़े सुरक्षाकारी कवच होते हैं। इस लक्षण से इनके परिरक्षण की संभावनाएं बढ़ गई तथा इस कारण से इस फ़ाइलम के जीवाश्म बहुत संख्या में मिलते हैं। अभी तक की ज्ञात ऐसी जीवाश्म स्पीषीज़ …

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दूध में कौन से पोषक तत्व होते हैं?

प्रधान रूप से मधुर रस को दूध कहते हैं। प्राय: दूध मधुर रस वाला ही होता है। दूध सभी प्राणधारियों के लिये सात्म्य अर्थात् हितकारी है। समस्त दूध प्राय: मधुर रसयुक्त, स्निग्ध, शीत, पुष्टि देने वाले, बृंहण शरीर को बढ़ाने वाले, (वृण्य) वीर्यवर्धक, (मेध्य) बुद्धि के लिये हितकारी, (बल्य) शरीर को बल देने वाले, (मनस्कर) मन …

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प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन कब हुआ

सर्वप्रथम, प्रशासनिक सुधारों के लिए कई समितियों का गठन किया गया। इन समितियों ने प्रशासन के विभिन्न पहलुओं के सम्बन्ध में सुझाव दिए। प्रशासनिक सुधार आयोग इस ओर लिए गए कदमों में एक महत्वपूर्ण संस्थान है। भारत सरकार ने दो आयोगों का गठन किया, जिसमें पहला प्रशासनिक सुधार आयोग 1966-70 की अवधि में स्थापित किया गया और …

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पर्यावरण नीति 2006 के प्रमुख उद्देश्य

हम आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्राकृतिक संसाधन आजीविका सुरक्षा प्रदान करने और जीवन समर्थक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम में से प्रत्येक को यह समझने की आवश्यकता है कि विकास की प्रगति में सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक मूल्यों और पर्यावरण …

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समकालीन कविता का लक्षण स्वरूप एवं स्थिति

समकालीन कविता प्रगतिशील रुझानों में जनवादी पक्षधरता के साथ मानवीय सौन्दर्यबोध में, सृजनात्मक चेतना के रूपान्तरण की कविता है। जो अपने दौर की काव्य सृजन में, विगत लगभग दो दशकों के ऐतिहासिक कालखण्ड में विकसित प्रगति विरोधी- प्रतिक्रियावादी कलाअतियों, अकवितावादियों का निषेध करती हुई मानवीय रागात्मकता की समग्रता एवं वर्गहीन समाज की आस्थाशील कविता हैं।] समकालीन …

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भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के कार्य || भारत में FSSAI के कार्य

भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 को सरकार द्वारा पारित किया गया। यह अधिनियम सभी खाद्य मामलों के लिए एकल प्राधिकरण की स्थापना करता है, जो खाद्य सुरक्षा और मानकों से संबंधित मामलों में एक स्वायत्त संस्थान होगा। FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India (खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम) है। इस …

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पर्यावरण संरक्षण के लिए संवैधानिक प्रावधान

भारत उन देशों में से एक है जिसने पर्यावरण संरक्षण और सुधार का समर्थन करते हुए अपने संविधान में संशोधन किया है। देश में 42वां संविधान संशोधन 1976 में किया गया और यह जनवरी, 1977 में प्रभावी हुआ। यह राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के अंतर्गत दो प्रावधानों की व्यवस्था करता है, ये हैं अनुच्छेद 48ए …

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