तनाव के लक्षण और इसके मुख्य कारण

तनाव एक स्थिति तक सामान्य व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी है। इसकी अधिक मात्रा व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार कर देती है। नकारात्मक तथा तनाव युक्त घटनाए कई प्रकार के मानसिक विकार उत्पन्न करती है। जिसका सम्बन्ध सामान्यतः शारीरिक, जटिल पारिवारिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक या जैविक घटकों से होता है। ये घटक मनुष्य में शारीरिक और …

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सामवेद के उपदेश और सामवेद की शिक्षाएं

चारों वेदों में सामवेद यद्यपि आकार की दृष्टि से सबसे छोटा है, फिर भी इसकी प्रतिष्ठा सर्वाधिक है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में कहा है कि ‘‘वेदानां सामवेदोऽस्मि’’। ऐसा सुनकर मन में यह भाव उदित होता है कि सामवेद में ऐसी कौन सी श्रेष्ठता और विशेषता है जिसके कारण भगवान ने इसको अपना विभूति बतलाया। …

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भारत में सामंतवाद का उदय और विकास

भारत में मौर्योतर-काल और गुप्तकाल में कुछ राजनैतिक और प्रशासनिक प्रवृतियों के कारण और विशेष तौर पर गुप्तकाल में राज्य-व्यवस्था सांमतवादी ढांचे में ढ़लने लगी थी। प्रो0 रामशरण शर्मा के अनुसार इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रवृति ब्राÎह्यणों को भूमिदान देने की थी।  मौर्यकाल एवम् मौर्यो से पूर्व पाली साहित्य में मगध और कोसल के शासकों द्वारा ब्राह्मणों …

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संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?

संसाधन एक ऐसा स्रोत या संचय है जिससे कोई लाभकारी वस्तु उत्पादित होती हो। संसाधन सामग्रियाँ, ऊर्जा, सेवाएँ, श्रम, ज्ञान व अन्य भौतिक परिसंपत्तियाँ होते हैं। ये किसी लाभकारी वस्तु को प्रस्तुत करने के लिए किसी न किसी प्रकार मिश्रण में प्रयोग किए जाते हैं।  इस प्रक्रिया में, कुछ संसाधन (जिन्हें अनवीकरणीय अथवा समाप्य संसाधन कहा …

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तेलंगाना राज्य की स्थापना कब और कैसे हुई?

सन् 2014 में आंध्र प्रदेश राज्य के कुछ जिलों को मिलाकर तेलंगाना राज्य का निर्माण हुआ था। एक राज्य बनने से पहले तेलंगाना आंध्र प्रदेश राज्य का विशेष पहचान वाला राज्य था। यह आंध्र प्रदेश के दो अन्य क्षेत्रों रायलसीमा और तटीय आंध्र से भिन्न था। हैदराबाद निजाम के शासन में तेंलगाना हैदराबाद राज्य तथा तेलंगाना …

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सिस्टर निवेदिता कौन थी, सिस्टर निवेदिता के शैक्षिक विचार

सिस्टर निवेदिता एक विदेशी महिला थी तथा भारत में वे स्वामी विवेकानन्द की शिष्या बनकर आयी थी । यहाँ आने पर वे भारतीय दर्शन से प्रभावित होकर पूर्णत: भारतीय सभ्यता व संस्कृति में रम गयी थी। वे एक महान शिक्षिका तथा समाज सुधारक थी। उन्होंने अपना सारा जीवन शिक्षा व छात्रों के लिए अर्पित कर दिया …

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रूसो का समान्य इच्छा सिद्धांत | Rousseau’s General Will

रूसो रूसो का सामान्य इच्छा का सिद्धांत यह सिद्धांत रूसो के दर्शन का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण, मौलिक, केन्द्रीय एवं रोचक विचार है। यह रूसो के सम्पूर्ण राजनीतक दर्शन की आधारशिला है। इसी धारणा के आधार पर रूसो ने स्वतन्त्रता, अधिकार, कानून, सम्प्रभुता, राज्य की उत्पत्ति, संगठन आदि विषयों पर अपने विचार प्रकट किये हैं।  रूसो का सामान्य …

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अस्तित्ववादी शिक्षा का अर्थ, उद्देश्य, शिक्षण विधियाँ

अस्तित्ववादी दर्शन इतना क्रान्तिकारी तथा जटिल है कि शिक्षा की दृष्टि से इस पर कुछ कम विचार हुआ है। अस्तित्ववाद का पादुर्भाव एक जर्मन दार्शिनिक हीगेल के ‘‘अंगीकारात्मक या स्वीकारात्मक’’ आदर्शवाद का विरोध है। हम पूर्व में भी पढ़ चुके है कि यह अहंवादी दर्शन की एक खास धारा है।’’ मानव को चेतना युक्त, स्वयं निर्णय …

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भारत की परमाणु नीति (दक्षिण एशिया में परमाणविक शक्ति संतुलन के विशेष सन्दर्भ में)

परमाणु हथियारों के विकास ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में चिन्तन को नई दिशा प्रदान की है। प्रत्येक राष्ट्र चाहे वह कितना भी महान हो, बिना परमाणु हथियारों के शक्तिशाली नहीं बन सकता है। इसी सोच ने राष्ट्रों को ‘शान्ति की दौड़’ के बजाय ‘हथियारों की होड़’ में लगा दिया। अपनी सुरक्षा चिन्ताओं के कारण भारत …

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समाजशास्त्र का उद्भव एवं विकास

समाजशास्त्र का उद्भव बहुत पुराना नहीं है। समाजशास्त्र को अस्तित्व में लाने का श्रेय फ्रांस के विद्वान आगस्त कोंत को जाता है। जिन्होंने 1838 में इस नए विज्ञान को समाजशास्त्र नाम दिया। मैकाइवर कहते है कि ‘‘विज्ञान परिवार में पृथक नाम तथा स्थान सहित क्रमबद्ध ज्ञान की प्राय: सुनिश्चित शाखा के रूप में समाजशास्त्र को शताब्दियों …

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