ख्याल गायन शैली क्या है?

ख्याल का अर्थ है कल्पना इसमें राग के नियमों में कई स्वर समूहों की लय व ताल के साथ कल्पना कर, राग का स्वरूप स्थापित किया जाता है। ख्याल गायन में विलम्बित, मध्य एवं द्रुत लय की रचनाएं गाई जाती हैं। इसमें आलाप – ‘अकार’  ‘अ’, ‘आकार’ अर्थात ‘आ’, ‘उकार’ अर्थात ‘उ’ एवं ‘इकार’ अर्थात ‘इ’ …

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राजनीतिक सिद्धांत की प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

राजनीतिक सिद्धांत की परंपरा बहुत प्राचीन है। राजनीतिक सिद्धांत की प्रकृति इसके अर्थ के साथ जुड़ी है जबकि राजनीतिक सिद्धांत के अर्थ में विभिन्न विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं। इसीलिए इसकी प्रकृति के बारे में भी भिन्न-भिन्न विचार पाए जाते हैं। इसलिए अध्ययन की दृष्टि से राजनीतिक चिंतन को दो भागों में विभक्त किया जा सकता …

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हिन्दी नाटक उद्भव एवं विकास

नाटक शब्द की व्युत्पत्ति संण् नट् (नाचना) + घ´ से हुई है जिसका अर्थ नच्च, नाच, नृत, नृत्य, नकल या स्वांग होता है। नाटक से पूर्व नट् से नाट शब्द व्युत्पन्न हुआ है। इसलिए नाटक से नाट की व्युत्पत्ति देखी। नाटक शब्द की व्युत्पत्ति नाटक- संण् नट् + ण्वुल् – अक प्रत्यय से नाटक की व्युत्पत्ति हुई …

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आरक्षण क्या है- आरक्षण की आवश्यकता क्यों है?

आरक्षण एक उपाय है जिसके माध्यम से कुछ पदों को रोजगार में सुरक्षित किया जाता है तथा संसद, राज्य विधान मंडल एवं स्थानीय निकायों में कमजोर वर्गों  अनुसूचित, अनुसूचित जन जातियों, महिलाओं, अन्य पिछडे़ वर्गों अथवा ई.वी.एस., के लिए सीटें आरक्षित की जाती है। आरक्षण का लाभ किसी भी ऐसे समूह द्वारा नहीं किया जा सकता …

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ध्रुपद गायन शैली / धमार गायन शैली क्या है?

ध्रुपद गायन शैली ख्याल से पुरानी है। ध्रुपद के बाद ही ख्याल का जन्म हुआ। इसमें सरगम एवं तानों का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसके स्थान पर दुगुन, तिगुन, चौगुन एवं कठिन लयकारी का प्रयोग कलाकार की सामर्थ के अनुसार किया जाता है।  इस गायन शैली में ताल के साथ रचना प्रस्तुत करने से …

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राजनीतिक सिद्धांत की उपयोगिता

राजनीतिक सिद्धांत की प्रकृति समझने के लिए उन विषयों और मुद्दों पर ध्यान देना भी जरूरी है जो पिछले 2400 सालों में इसके अध्ययन का अंग रहे हैं। यद्यपि राजनीतिक सिद्धांतों का मुख्य विषय राज्य है तथापि राजनीतिक चिंतन के इतिहास के विभिन्न चरणों में राज्य से संबंधित अलग-अलग विषय महत्त्वपूर्ण रहे हैं। क्लासिकी राजनीतिक सिद्धांतों …

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हिंदी कहानी का उद्भव एवं विकास

मानव के आदि काल से कहानी कहने, सुनने, सुनाने की प्रवृत्ति चली आ रही है। विश्व के प्राचीनतम ग्रंथों में कहानी का महत्व प्राय: देशों में है। भारतीय वांगमय में वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश तथा पुरानी हिंदी में किसी न किसी स्वरूप में कहानी विद्यमान है, इसके अतिरिक्त पुराणों, उपनिषदों, ब्राह्मणों, रामायण, महाभारत, …

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दलीय प्रणाली के प्रकार और सीमाएं

दलीय प्रणाली लोकतंत्र का आधार है और यह जनता और सरकार के बीच एक कड़ी है। दलीय प्रणाली के प्रकार मुख्य रूप से दलीय प्रणाली की तीन श्रेणियां है : एक दलीय प्रणाली द्वि-दलीय प्रणाली बहु दलीय 1. एक दलीय प्रणाली – एक दलीय प्रणाली पर केवल एक पार्टी (दल) का शासन होता है इसका कोई विरोध …

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भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य

भारतीय नृत्य-कला की उत्पत्ति एवं विकास की अपनी एक स्वतन्त्र परम्परा रही है। इसकी उत्पत्ति वैदिक काल से ही हो चुकी थी। जिसका प्रमाण वेदों में पर्याप्त रूप में प्राप्त होता है। वेदों को मानव जीवन के धर्म, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, सभ्यता एवं कला कौशल का विशाल स्रोत माना गया है। इसलिए इसे विश्वकोश कहा गया …

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राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, महत्व

इसे सही ढंग से समझने के लिए ‘राजनीतिक’ तथा ‘सिद्धांत’ इन दोनों शब्दों को अलग-अलग समझना आवश्यक है। यहाँ शब्द ‘सिद्धांत’ तथा ‘राजनीतिक’ एक दूसरे की विशेषता बताते हैं कि राजनीति सिद्धांत या राजनीति का सिद्धांत किसी विशिष्ट विषय की तरफ इशारा करते हैं। आइये इन्हें थोड़ा बारीकी से समझें।  पहला, सिद्धांत का अर्थ क्या है? …

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