मानव विकास को प्रभावित करने वाले तत्व

किसी भी बालक/मानव का विकास किसी एक तत्व अथवा उपकरण पर निर्भर नहीं करता । उसके विकास में बहुत से तत्व मिलकर काम करते हैं । बालक के विकास और उसकी गति पर भोजन, स्वास्थ्यजनक परिस्थितियों, वातावरण, सूर्य प्रकाश, शुद्ध वायु तथा ऋतु आदि का प्रभाव पड़ता है तो उसकी मनोवृत्तियों, वंशानुक्रम तथा सामाजिक सम्बन्धों का …

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13वें वित्त आयोग की सिफारिशें, कार्य, गठन के उद्देश्य

13वें वित्त आयोग की स्थापना इसमें हम 13वें वित्त आयोग की स्थापना , उद्देश्य एवं कार्यों का अवलोकन करने के साथ ही 13वें वित्त वित्त आयोग विचारार्थ विषय को विस्तृत रूप से जानेंगे। इसके पश्चात 13वें वित्त वित्त आयोग सिफारिशों को भी समझेंगे। 13वें वित्त आयोग के गठन के उद्देश्य करों का निवल प्राप्तियों का केन्द्र …

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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय, प्रमुख रचनाएं, साहित्यिक विशेषताएँ

निराला छायावादी युग के महत्वपूर्ण  कवि है।  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (1897 – 1962 ई.) का जन्म संवत 1953 वि. वसंत पंचमी के दिन ग्राम गढ़कोला जनपद उन्नाव में हुआ था। इनके पिता का नाम पं. राम सहाय त्रिपाठी था। वे मेदिनीपुर के महिषदल राज्य में नौकरी करते थे। इनकी मां …

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बारंबारता वितरण क्या है ?

किसी घटना के घटने की संख्या को बारंबारता कहते हैं। चैपलिन (Chaplin, 1975) ने बारंबारता की परिभाषा देते हुए कहा है, ‘‘ कोई प्राप्तांक या घटना जितनी बार घटती है, उसकी संख्या को बारंबारता कहते हैं । बारंबारता वितरण क्या है? बारंबारता वितरण वह प्रविधि (technique) या विधि (Method) है, जिसके द्वारा बारंबारता को संख्या के …

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जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार

जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार हॉब्स से सर्वथा विपरीत हैं। जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार उसकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘मानव-विवेक से सम्बन्धित निबन्ध’ में पाए जाते हैं। जॉन लॉक का यह विश्वास है कि मनुष्य एक बुद्धियुक्त सामाजिक प्राणी है। अत: वह एक नैतिक व्यवस्था को …

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सुमित्रा नंदन पंत का जीवन परिचय, रचनाएं, साहित्यिक विशेषताएं

सुमित्रानन्दन पंत आधुनिक हिंदी कविता के लिए काल खंड में रचना कार्य करते हें, वह बीसवीं शताब्दी का सामाजिक सांस्कृतिक जागरण युग है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दिनों का एक विशाल जागरण उनके सामने मोजूद था। राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में रामकृष्ण परमहंस, विवेकानन्द, दादाभाई नौरोजी, बाल गंगाधर तिलक, अरविंद रवीन्द्रनाथ ओर गांधी जी जैसे महान …

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केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप से आप क्या समझते हैं?

साधारण अर्थ में केन्द्रीय प्रवृत्ति का अर्थ है केन्द्र (Centre) की ओर झुकाव। लेकिन सांख्यिकी (Statistics) में केन्द्रीय प्रवृत्ति का तात्पर्य बारंबारता-वितरण (Frequency distribution) मेंं किसी प्राप्तांक (Score) में केन्द्र की ओर झुकाव से है। जैसे-जैविक शीलगुणों (biological traits) में उनके वितरण केन्द्र (औसत) की ओर होने की प्रवृत्ति पायी जाती है। जैसे, नाटे माता-पिता के …

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जॉन लॉक का प्राकृतिक अधिकारों का सिद्धांत

जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत जॉन लॉक का राजदर्शन के इतिहास को सबसे बड़ी देन उसके प्राकृतिक अधिकार विशेषकर सम्पत्ति का अधिकार है। यह धारणा जॉन लॉक के राजनीतिक दर्शन का सार है। जॉन लॉक के सभी सिद्धांत किसी न किसी रूप में जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धांत से जुड़े हुए हैं। जॉन …

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द्विवेदी युग की साहित्यिक प्रवृत्तियाँ, नामकरण एवं युगीन परिस्थितियाँ।

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में एक नवीन मोड़ आया। साहित्यकारों का चिंतन व्यष्टि से समष्टि, वैयक्तिक से सामाजिक, जड़ता से चेतना, स्थायित्व से प्रगति, श्रृंगार से देशभक्ति, रूढ़ि से स्वच्छंदता की ओर अग्रसर हुआ। भारतेंदु युग के कवियों में भावबोध आधुनिकता से प्रभावित होते हुए भी रीतिकालीन पंरपरा से सर्वथा मुक्त नहीं हो पाया था। …

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मनोविज्ञान का इतिहास || History of psychology

मनोविज्ञान मानसिक प्रक्रियाओं, अनुभवों तथा व्यक्त व अव्यक्त दोनों प्रकार के व्यवहारों का एक क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक अध्ययन है। ‘मनोविज्ञान’ शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों ‘‘साइके’’ तथा ‘लॉगस’ से हुई है। ग्रीक भाषा में ‘साइके’ शब्द का अर्थ है ‘आत्मा’ तथा ‘लॉगस’ का अर्थ है ‘शास्त्र‘ या ‘अध्ययन’। इस प्रकार पहले समय में मनोविज्ञान को …

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