फोबिया क्या है अमेरिकन साइकियेट्रिक एसोशियेसन ने फोबिया के लक्षणों को स्पष्ट किया है

दुर्भीति जिसे अंग्रेजी के फोबिया Fobia शब्द से जाना जाता है, वस्तुत: चिंता विकृति के प्रमुख प्रकारों में गिना जाता है। चिंता एक संवेग है जिसमें अविवेकपूर्ण नकारात्मक विचारों की श्रृंखला चलती है, तथा व्यक्ति अपने साथ कुछ बुरा होने की नकारात्मक भययुक्त आशंका से ग्रस्त रहता है। जब तक यह अविवेकपूर्ण डर व्यक्ति के नियंत्रण …

Read more

विवाह का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, नियम एवं उद्देश्य

विवाह का शाब्दिक अर्थ है, ‘उद्वह’ अर्थात् ‘वधू को वर के घर ले जाना।’ विवाह को परिभाषित करते हुए लूसी मेयर लिखते हैं, विवाह की परिभाषा यह है कि वह स्त्री-पुरुष का ऐसा योग है, जिससे स्त्री से जन्मा बच्चा माता-पिता की वैध सन्तान माना जाये। इस परिभाषा में विवाह को स्त्री व पुरुष के ऐसे …

Read more

सामाजिक समस्या क्या है सामाजिक समस्या के प्रकार एवं वर्गीकरण?

सामाजिक समस्या उन परिस्थितियों अथवा दशाओं का नाम है जिन्हें समाज हानिकारक मानता है तथा जिनमें सुधार की समाज को आवश्यकता होती है। सामाजिक समस्या का तात्पर्य उन परिस्थितियों अथवा दशाओं से है जिन्हें एक समुदाय के अधिकांश व्यक्तियों के द्वारा अपने सुस्थापित नियमों, सामाजिक मूल्यों तथा समूह-कल्याण के विरूद्ध माना जाता है। जब समाज में …

Read more

परिवार का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, तत्व एवं कार्य

परिवार का अर्थ है कुछ संबंधित लोगों को समूह जो एक ही घर में रहते हैं। परिवार के सदस्य, परिवार से जन्म, विवाह व गोद लिये जाने से संबंधित होते हैं। इससे परिवार की तीन विशेषताएं पता चलती हैं। ये हैं – दम्पति को विवाह करके पति पत्नी का नैतिक दर्जा प्राप्त होता है और वे …

Read more

पुराणों की संख्या कितनी है। पुराणों के नाम

जिस प्रकार समग्र वेदों के मंत्र अपनी मूलावस्था में अविभक्त रूप में एक ही साथ मिले-जुले थे, उसी प्रकार पुराण भी एक बृहत्संहिता के रूप में सम्मिलित थे। वेदों के चतुर्धा वर्गीकरण की भांति पुराणों का भी पंचम वेद के रूप में अलग विभाजन उनकी रचना के बहुत बाद हुआ और पुराण-ग्रंथों का अध्ययन करने पर …

Read more

संदर्भ समूह एवं अर्थ समूह क्या है ?

व्यक्ति अपने इर्द-गिर्द कई समूहों से घिरा रहता है। ये समूह या तो प्राथमिक है या द्वितीयक। कुछ समूहों का वह सदस्या होता है कुछ का नहीं। कुछ समूहों को वह अच्छा मानता है और उनके मानदण्डों को स्वीकार करता है, कुछ समूहों के मानदण्डों की वह निन्दा करता है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में ऐसे कई …

Read more

महाभारत के 18 पर्व ‘महाभारत’ का प्रणयन 18 पर्वों या खण्डों में हुआ है, जिनके नाम इस प्रकार हैं

महाभारत के 18 पर्व ‘महाभारत’ का प्रणयन 18 पर्वों या खण्डों में हुआ है, जिनके नाम इस प्रकार हैं-  प्रत्येक पर्व में वर्णित विषयों की सूची इस प्रकार है-  महाभारत में कितने पर्व है और उनके नाम महाभारत के 18 पर्व ‘महाभारत’ का प्रणयन 18 पर्वों या खण्डों में हुआ है, जिनके नाम इस प्रकार हैं-  आदि पर्व …

Read more

प्राथमिक समूह का अर्थ, परिभाषा एवं प्राथमिक समूह के लक्षणों का उल्लेख

प्राथमिक समूह के कई दृष्टाान्त है, परिवार, मित्र मण्डली, जनजातीय समाज, पड़ोस और खेल समूह। इनके सदस्यों के बीच में घनिष्ठ अनौपचारिक, प्रत्यक्ष संबंध होते है। इस समूह के सदस्यों में अपनवत् की भावना होती है। भारतीय गाँव एक प्राथमिक समूह है। गाँव के लोग न केवल एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप् से जानते है, वे …

Read more

रामायण के विभिन्न संस्करण

वाल्मीकि रामायण के उपलब्ध होने वाले पाठ एकरूप नहीं मिलते हैं, उसके चार संस्करण मुख्य रूप से उपलब्ध होते है। इन चारों के अतिरिक्त बड़ौदा से प्रकाशित रामायण का ‘आलोचनात्मक संस्करण’ आजकल विशेष रूप से प्रचलित है।  रामायण के विभिन्न संस्करण रामायण के विभिन्न संस्करण हैं- औदीच्य संस्करण  गौड़ीय संस्करण  दाक्षिणात्य संस्करण  पश्चिमोत्तरीय संस्करण  आलोचनात्मक संस्करण  …

Read more

समुदाय के आधार तत्व

समुदाय की अवधारणा समाज की एक लोकप्रिय अवधारणा है। सैद्धान्तिक दृष्टि से सबसे पहले इस अवधारणा का प्रयोग इमाइल दुर्खीम ने किया था। उन्होंने समाज को दो भागों में विभाजिहत किया। एक समाज जिसे वे यांत्रिक समाज कहते हैं वस्तुत: ग्रामीण समुदाय है। इस समुदाय में न्यूनतम श्रम विभाजन होता है, कानून का स्वरूप दमनात्मक होता है और …

Read more