मराठों के पतन के प्रमुख कारण क्या थे?

मराठों के पतन के प्रमुख कारण मराठों के पतन के प्रमुख कारण क्या थे एकता का अभाव दृढ़ संगठन का अभाव योग्य नेतृत्व का अभाव दूरदर्शिता और कूटनीतिक अयोग्यता आदर्शो का त्याग दोषपूर्ण सैन्य संगठन कुप्रशासन और दूशित अर्थव्यव्स्था भारतीय राज्यो से शत्रुता अंग्रेजो की सार्वभौमिकता 1. एकता का अभाव- मराठों में एकता का सर्वदा से अभाव …

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आंग्ल सिक्ख युद्ध के कारण, घटनाएँ एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845 ई.) के कारण 1. रानी झिन्दन की कूटनीति- रणजीतसिंह की मृत्यु के बाद सिक्ख सेना के अधिकारियों ने उत्तराधिकारी-युद्ध में और दरबार के षड्यंत्रो में अत्यन्त सक्रियता से भाग लिया। उनकी शक्ति और उच्छृंखलता इतनी बढ़ गयी थी कि शासन और राज परिवार के लागे उनसे आतंकित हो गये थे। उन्हें नियंत्रित करना …

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आंग्ल मराठा युद्ध के कारण एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1772 ई. से 1784 ई.) 1761 ई. में पनीपत के तृतीय युद्ध के कुछ समय बाद ही पेशवा बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गयी। उसके पश्चात उसका पुत्र माधवराव पेशवा बना। उसने थोड़े समय में ही मराठा शक्ति ओर साम्राज्य को पुन: बढ़ा लिया और महादजी सिंधिया ने मुगल सम्राट शाहआलम को अंग्रेजों …

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पिट्स इंडिया एक्ट कब पारित हुआ? पिट्स इंडिया एक्ट के मुख्य उपबंध

अगस्त, 1784 ई. में पिट का  इंडिया एक्ट पास हुआ। इसने भूतपूर्व अधिनियमों के दोषों को दूर करने का प्रयास किया। इसकी भाषा संयमित थी। इसमें कंपनी के प्रदेशों को भारत में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र कहा गया था। पिट्स इंडिया एक्ट पारित होन की घटनाएँ 1772 तथा 1781 में कम्पनी के मामलों की छानबीन करने के …

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रेगुलेटिंग एक्ट कब पारित हुआ, रेगुलेटिंग एक्ट के दोष

रेगुलेटिंग एक्ट के मुख्य उपबंध 1. मद्रास और बंबई को बंगाल के अधीन किया जाना – 1773 ई. के पूर्व बंगाल और मद्रास की प्रेसीडेन्सियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र थी। इस अधिनियम के द्वारा बंबई और मद्रास प्रेसिडेन्सियों को बंगाल के अधीन कर दिया गया। बंगाल के गवर्नर को तीन प्रेसिडेन्सियों का निरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का …

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बक्सर युद्ध के कारण और परिणाम

बक्सर का युद्ध के कारण और परिणाम निम्नलिखित है। बक्सर युद्ध के कारण बक्सर का युद्ध के कारण निम्नलिखित है। बंगाल में प्रभुत्व की समस्या  संरक्षण की नीति का त्याग  एलिस की नीति  अंग्रेजों का व्यापारिक विवाद  मीरकासिम के विरूद्ध शड़यंत्र एवं पटना पर आक्रमण मीरकासिम की प्रारम्भिक पराजय और पटना का हत्याकांड 1. बंगाल में प्रभुत्व …

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मोल सिद्धांत क्या है?

परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic mass unit or amu)- तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए आजकल कार्बन (जिसका परमाणु-द्रव्यमान 12 होता है) परमाणु के द्रव्यमान के 12 वे भाग को इकाई मान लिया गया है। इसे परमाणु-द्रव्यमान इकाई कहते है। परमाणु द्रव्यमान इकाई के अनुसार परमाणु द्रव्यमान की परिभाषा इस प्रकार दी जाती है- किसी तत्व …

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मूलानुपाती सूत्र और आणविक सूत्र क्या है मूलानुपाती सूत्र और अणु सूत्र में सबंध?

मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र किसी यौगिक का वह सूत्र जो उस यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं का सरलतम पारस्परिक अनुपात व्यक्त करता है, मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र कहलाता है। लेकिन इस सूत्र सें यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं के वास्तविक संख्या का ज्ञान नहीं होता। 👉 उदाहरणार्थ- …

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स्वस्थ व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव रोगी व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव

शाब्दिक रुप से देखने पर मूत्र चिकित्सा का अर्थ स्वत: ही स्पष्ट हो जाता है-’’ मूत्र द्वारा विविध रोगों की चिकित्सा करना मूत्र चिकित्सा कहलाता है। इसके अन्तर्गत प्रमुख रुप से स्वमूत्र एवं गौमूत्र द्वारा चिकित्सा करने का वर्णन आता है। मूत्र चिकित्सा को प्राचीन शास्त्रों में शिवाम्बु कल्प का नाम देते हुए कहा गया है …

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संतुलित आहार का अर्थ, परिभाषा, प्रमुख घटक, महत्व

ऐसा आहार जिसमें वे सभी चीजें उचित मात्रा में मौजूद हों जो शरीर निर्वाह के लिए आवश्यक है। ऐसे ही भोजन से शरीर का भली-भाँति पोषण होता है। उससे पर्याप्त शक्ति और ताप की उपलब्धि होती है तथा स्वास्थ्य एवं आयु की वृद्धि होती है। संतुलित आहार में कार्बोज, वसा, प्रोटीन, खनिज लवण, जल तथा सभी प्रकार के विटामिन उचित मात्रा में होते हैं जिनसे शरीर …

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