मुंह के छाले दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

मुंह के छालो को मुुखकोथ भी कहा जाता है। मुंह के छालो मुंह की म्यूकस झिल्ली में प्रदाह उत्पन्न हो जाता है और व्रण या छाले उत्पन्न हो जाते है। मुंह के छाले एक सामान्य रोग है,जो किसी ना किसी को कभी ना कभी हो ही जाता है। आँकड़ो के अनुसार हर 5 में से 1 …

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गठिया होने का कारण, लक्षण और इलाज

वह रोग जिसमें जोडों अथवा सन्धियों में सूजन उत्पन्न होती है, गठिया (Arthroitis) कहलाता है। गठिया आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में प्रयुक्त होने वाला शब्द है जबकि प्राचीन काल से हिन्दी भाषा में सन्धि शोथ के नाम इस रोग को वर्णित किया गया है। आयुर्वेद शास्त्र में गठिया रोग के लिए आमवात शब्द का वर्णन प्राप्त होता …

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जल प्रदूषण: परिभाषा, प्रकार और स्रोत

आप जानते होंगे कि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग पानी है और केवल 2.5 प्रतिशत ही ताजा पानी है, यानी उपयोग करने योग्य। जल मानव जाति और पर्यावरण के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। जैसे-जैसे पृथ्वी की आबादी बढ़ रही है, इस ग्रह के जल संसाधनों पर लोगों का दबाव बढ़ रहा हैं।  …

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पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, घटक, हानिकारक तत्व

पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है परि+आवरण इसमें परि का अर्थ होता है चारों तरफ से’ एवं आवरण का अर्थ है ‘ढके हुए’। अंग्रेजी में पर्यावरण को Environment कहते हैं इस शब्द की उत्पकि ‘Envirnerl’ से हुई और इसका अर्थ है-Neighbonrhood अर्थात आस-पड़ोस। पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है हमारे आस-पास जो कुछ भी उपस्थित …

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प्लासी का युद्ध के कारण, घटनाएं और परिणाम

ज्योंही कलकत्ता के पतन का समाचार मद्रास पहुंचा, वहां के अधिकारियों ने एक सेना जो उन्होंने फ्रांसीसियों के विरुद्ध युद्ध के लिए गठित की थी, क्लाइव के नेतृत्व में कलकत्ते भेज दी। क्लाइव को अपना कार्य शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करने को कहा गया क्योंकि यह सेना फ्रांसीसियों के विरुद्ध युद्ध के लिए मद्रास में चाहिए थी। यह सेना 16 …

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कर्नाटक युद्ध के कारण, महत्व और परिणाम

कर्नाटक अपनी धन सम्पदा के लिये प्रसिद्ध था। दिल्ली के सैयद बन्धुओं के प्रभाव से मुगल सम्राट ने मराठों को कर्नाटक से चौथ वसूल करने का अधिकार दे दिया था। जब मराठों ने कर्नाटक के नवाब दोस्त अली से चौथ की धनराशि मांगी और उसने यह धनराशि नहीं दी तो मराठों ने 1740 ई. में कर्नाटक …

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रैयतवाड़ी व्यवस्था क्या है, रैयतवाड़ी व्यवस्था कब लागू की गई?

रैयतवाड़ी व्यवस्था 1792 ई. में मद्रास प्रेसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गई। थॉमस मुनरो 1820 ई. से 1827 ई. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 ई. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानों) के बीच …

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स्थाई बंदोबस्त क्या था स्थाई बंदोबस्त को लागू करने के उद्देश्य

स्थाई बंदोबस्त क्या था? ब्रिटिश कंपनी (ईस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 ई. में इस्तमरारी स्थायी बंदोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गई राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता …

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1857 के विद्रोह का प्रारंभ, प्रसार, कारण, परिणाम, क्षेत्र

सन् 1757 ई. में प्लासी के युद्ध के बाद भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना हुई थी। इसके सौ वर्षों बाद 1857 ईस्वी तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना अधिकार धीरे-धीरे व्यापार के माध्यम से शुरू किया किन्तु भारतीयों के आपस के झगड़ों का लाभ उठाकर मुट्ठी भर अंग्रेजों ने एक खुशहाल और समृद्धशाली देश को …

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प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के कारण, घटनाएँ एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824-1826 ई.) के कारण युद्ध का वास्तविक कारण अंग्रेजों और साम्राज्यवादी तथा व्यापारिक आकांक्षाएँ थीं। इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी थे – बंगाल और अराकान की सीमायें निर्धारित नहीं थी। बर्मियों द्वारा जीते हुए प्रदेश से लुटेरे भाग कर अंग्रेजी क्षेत्र में शरण लेते थे। बर्मी सरकार उनके समर्पण की माँग करती थी …

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