प्रत्याहार का अर्थ, परिभाषा, परिणाम एवं महत्व

इंद्रियों को अंतर्मुखी करके उनके संबंधित विषयों से विमुख करना प्रत्याहार कहलाता है। प्रत्याहार का सामान्य कार्य होता है, इन्द्रियों का संयम, दूसरे अर्थ में प्रत्याहार का अर्थ है पीछे हटना, उल्टा होना, विषयों से विमुख होना। इसमें इन्द्रियाॅं अपने वहिर्मुख विषयों से अलग होकर अन्तर्मुख हो जाती है। इसलिये इसे प्रत्याहार कहते है। महर्षि पतंजलि प्रत्याहार …

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सार्वजनिक उपक्रम का अर्थ, विशेषताएँ और महत्व

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का तात्पर्य ऐसे उपक्रम से होता है जो सरकार के स्वामित्व, प्रबन्ध एवं नियंत्रण में संचालित किया जाता है। लोक उपक्रम को लोक उद्योग, सार्वजविक उपक्रम, राजकीय उपक्रम, सरकारी उपक्रम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आदि अनेक नामों से जाना जाता है। सार्वजनिक उपक्रम का अर्थ ऐसे व्यावसायिक इकाइयाँ जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और …

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प्राणायाम का अर्थ, परिभाषा, भेद और महत्व

प्राणायाम शब्द संस्कृत व्याकरण के दो शब्दों ‘प्राण’ और ‘आयाम’ से मिलकर बना है। संस्कृत में प्राण शब्द की व्युत्पत्ति ‘प्र’ उपसर्गपूर्वक ‘अन्’ धातु से हुई है। ‘अन’ धातु जीवनीशक्ति का वाचक है। इस प्रकार ‘प्राण’ शब्द का अर्थ चेतना शक्ति होता है। ‘आयाम’ शब्द का अर्थ है- नियमन करना। इस प्रकार बाह्य श्वांस के नियमन …

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परिवहन का अर्थ, परिभाषा, महत्व एवं प्रकार

परिवहन मानव साधन का एक माध्यम है जिसकी सहायता से व्यक्तियों, वस्तुओं और विभिन्न संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक विकास तथा भावात्मक एकता के लिए उन्नत एवं विकसित परिवहन के सभी साधनों का होना नितांत आवश्यक होता है।  प्राचीन समय में मनुष्य ही परिवहन का …

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आसन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व, उद्देश्य, विधि व लाभ

आसन का अर्थ है- यह शरीर और मन पर नियंत्रण हेतु विभिन्न शारीरिक मुद्राओं का अभ्यास। आसन शब्द कई अर्थों में प्रयुक्त होता है जैसे शरीर के द्वारा बनाये गये विशेष स्थिति, बैठने का विशेष तरीका, हाथी के शरीर का अगला भाग, घोडे़ का कन्धा आदि परन्तु हठयोग में आसन शब्द का अर्थ मन को स्थिर …

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वाणिज्य क्या है और इसके प्रकार?

व्यवसाय के दो अंग हैं- उद्योग और वाणिज्य। उद्योगों का कार्य जहां समाप्त होता है, वहीं वाणिज्य का कार्य आरम्भ होता है। उद्योगों में वस्तुओं का उत्पादन होता है। इन वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की क्रिया वाणिज्य है। इस प्रकार वाणिज्य के अन्तर्गत उत्पादन स्थल से निर्मित वस्तु प्राप्त करके उपभोक्ता तक पहुंचाने की समस्त …

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क्रिया योग क्यों किया जाये क्रियायोग का फल या क्रियायोग का उद्देश्य

क्रिया योग क्यों किया जाये इस प्रश्न का उत्तर महर्षि ने देते हुए कहा है- समाधिभावनार्थ: क्लेशतनूकरणार्थश्च क्रिया योग का अभ्यास क्लेशों को तनु करने के लिए एवं समाधि भूमि प्राप्त करने के लिये कहा जा रहा है। क्लेश- अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेश और अभिनिवेश हैं।  क्रिया योग के प्रकार क्रिया योग के तीन प्रकार महर्षि …

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उद्योग किसे कहते है उद्योग की परिभाषा? – udhyog kise kehte hai

उद्योग में वे समस्त क्रियाएं शामिल की जाती है जिनके माध्यम से कच्चे माल से पक्के माल को निर्मित कर बिक्री योग्य बनाया जाता है। अर्थात् औद्योगिक क्रिया के द्वारा किसी भी वस्तु का मूलरूप परिवर्तित कर उपयोगी बनाया जाता है। उद्योग को निम्न भागों में बांटा गया है : 1, उत्पत्ति उद्योग – इसके अंतर्गत …

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पतंजलि योगसूत्र का परिचय || पतंजलि योग सूत्र के चार अध्याय

योगसूत्र ग्रंथ महर्षि पतंजलि द्वारा रचित है। यह ग्रंथ सूत्रों के रूप में लिखा गया है। सूत्र-शैली भारत की प्राचीन दुर्लभ शैली है जिसमें विषय को बहुत संक्षिप्त शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। यह चार पादो में विभाजित है जिसमें 196 सूत्र निबद्ध है। इस ग्रंथ में महर्षि पतंजलि ने यथार्थ रूप में योग के आवश्यक आदर्शों …

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औरंगजेब की धार्मिक नीति और औरंगजेब की धार्मिक नीति के परिणाम

शाहजहां के चार पुत्र थे । दारा शिकोह, भुजा, औरंगजेब और थे । शाहजहां की तीन पुत्रियां भी थी । जहांआरा, रोशनआरा, गौहरआरा । मुसलमान शासकों में उत्तराधिकार के नियमों का आभाव था तलवार के बल पर शासन प्राप्त किया जा सकता था । शेष भाइर्यों की कत्ल कर दिये जाते थे । जीते जी सभी …

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