जल के स्रोत, उपयोगिता, समस्याएं, संरक्षण के उपाय

हमारा जीवन बहुत बदल चुका है और हम जीवन के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का विकास देख रहे हैं। हमारे इर्द-गिर्द इलेक्ट्रानिक उपकरण मौजूद हैं, जिन्हें बिजली की जरूरत होती है। जब बिजली नहीं होती, तो वे बेकार हो जाते हैं लेकिन तब भी हम उनके बगैर जिंदा रह सकते हैं। अगर एक दिन भी पानी …

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मृदा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

मृदा विभिन्न प्रकार के पदार्थों का मिश्रण है। उदाहरण के लिए, कण, छोटे कंकड़, क्षय और जीवित जीव जिन्हें खाद सूक्ष्म जीव, आदि कहा जाता है। मृदा की ऊपरी सतह वह है जिसमें पौधे खाद, मिट्टी के कण और जीवित जीवन की शरण में रहते हैं। मृदा या मिट्टी चट्टानों द्वारा ही निर्मित होती हैं।  मृदा …

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भारत की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार || भारत का भौतिक स्वरूप

आकार की दृष्टि से भारत संसार का साँतवा बड़ा देश हैं। एवं जनसंख्या के दृष्टि से चीन के बाद दूसरा नम्बर हैं। भारत की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार भारत पूर्णतया उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। भारत की मुख्य भूमि 804’ से 3706’ एवं 680 7’ से 970 25’ पूर्वी देशांतर के बीच फैली हुई हैं। इस …

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आयुर्वेद और योग (आयुर्वेद में योग के प्रकार, आयुर्वेद में वर्णित प्राणायाम)

आयुर्वेद और योग दोनों ही अत्यन्त प्राचीन विद्यायें हैं। दोनों का विकास और प्रयोग समान उद्देश्य के लिए एक ही काल में मनुष्य मात्र के दु:खों को दूर करने के लिए हुआ। आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन का विज्ञान है। इसे एक बहु उद्देश्यीय विज्ञान के रूप में विकसित किया गया है। योग के अनुसार पुरुषार्थ …

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मौर्य वंश का इतिहास (मौर्य वंश की राजकीय व्यवस्था, मौर्य वंश की प्रशासनिक व्यवस्था)

नन्द वंश के पतन के पश्चात मगध में मौर्य वंश की सत्ता स्थापित हुई । मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य (321 ई.पू.) था । यूनानी लेखकों ने उसे सेन्ड्रोकोट्स या एण्ड्रोकोट्स कहा है । इस राजवंश का भारतीय इतिहास में विशिष्ट महत्व है । मौर्य शासकों ने छोटे छोटे राज्यों को समाप्त करके एक वृहद …

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सांख्य दर्शन क्या है सांख्य दर्शन ने कितने तत्व को माना है?

सांख्य दर्शन के अनुसार प्रकृति और पुरुष दो मूल तत्व हैं और प्रकृति की 23 विकृतियाँ हैं और इस प्रकार कुल 25 तत्व हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार तत्वों की संख्या बताने के कारण ही इस दर्शन को सांख्य दर्शन कहा जाता है। अन्य विद्वानों के अनुसार सांख्य का अर्थ है-विवेक ज्ञान, प्रकृति-पुरुष के भेद का …

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फारसी साम्राज्य का इतिहास। History of Persian Empire

फारसी साम्राज्य साइरस महान और टेरियस के नेतृत्व में फारसी या इखमनी साम्राज्य विश्व के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक हो गया । बाद के साम्राज्यों ने इसे अनेक मामलों में आदर्श बनाया । साइरस द्वारा अपनाई गई नीति के अनुसार सम्राट की शक्ति लागू करने में है। उसने विजित लोगों का े अपने  रिवाज …

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जैन दर्शन में योग का स्वरूप || जैन दर्शन में यम नियम निरुपण

जैन दर्शन में योग का स्वरूप  भारतवर्ष में जिस समय बौद्ध दर्शन का विकास हो रहा था उसी समय जैन दर्शन भी विकसित हो रहा था। दोनों दर्शन छठी शताब्दी में विकसित होने के कारण समकालीन दर्शन कहे जा सकते हैं। जैन मत के विकास और प्रचार का श्रेय अन्तिम तीर्थंकर महावीर को दिया जाता है। …

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वैदिक साहित्य के प्रमुख ग्रंथ

वेद चार हैं ऋग्वेद , सामवेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद । इनमे ऋग्वेद सबसे पा्रचीन और अथर्ववेद सबसे बाद का माना जाता है। ऐतिहासिक सामग्री के दृष्टिकोण से ऋग्वेद और अथर्ववेद ही सबसे महत्वपूर्ण है। ऋग्वेद में भारत में आर्याें का आगमन उनका प्रसार भारत के निवासियों से उनका संघर्ष तथा उनके कबीलाई संगठन के बारे …

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योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप || योगवशिष्ठ में यम नियम निरूपण

योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप  योग वशिष्ठ योग का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। अन्य योग ग्रन्थों की भाँति योग वशिष्ठ में भी योग के विभिन्न स्वरूप जैसे- चित्तवृत्ति, यम-स्वरूप, नियम-स्वरूप, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, समाधि, मोक्ष आदि का वर्णन वृहद् रूप में किया गया है। योग वशिष्ठ के निर्वाण-प्रकरण में वशिष्ठ मुनि श्री राम जी को …

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