हिंदी भाषा के विविध रूप

भाषा का सर्जनात्मक आचरण के समानान्तर जीवन के विभिन्न व्यवहारों के अनुरूप भाषिक प्रयोजनों की तलाश हमारे दौर की अपरिहार्यता है। इसका कारण यही है कि भाषाओं को सम्प्रेषणपरक प्रकार्य कई स्तरों पर और कई सन्दर्भों में पूरी तरह प्रयुक्त सापेक्ष होता गया है। प्रयुक्त और प्रयोजन से रहित भाषा अब भाषा ही नहीं रह गई …

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सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य, परिभाषा एवं उद्देश्य

सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य का अर्थ  परिभाषाओं के विश्लेषण के आधार पर सामूहिक सेवा कार्य के अर्थ पर प्रकाश डाला जा सकता है। वैज्ञानिक ज्ञान, प्रविधि, सिद्धान्तों एवं कुशलता पर आधारित प्रणाली।  समूह में व्यक्ति पर बल।  किसी कल्याणकारी संस्था के तत्वावधान मे किया जाता है।  व्यक्ति की सहायता समूह के माध्यम से की जाती है।  …

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पत्रकारिता में अनुवाद की समस्याएं, महत्व, आवश्यकता

यों तो पत्रकार को एकाधिक भाषाओं का ज्ञान होना अपेक्षित होता है किन्तु भारत के सन्दर्भ में क्षेत्रीय भाषाओं की पत्रकारिता में अनुवाद का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अत: हिंदी अथवा अन्य किसी भारतीय भाषा के समाचार पत्र की भाषा के ज्ञान के अतिरिक्त अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इसका कारण है कि …

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विधिशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, वर्गीकरण, प्रकृति तथा विशेषता

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा समूह में रहना उसकी नैसर्गिक प्रवृत्ति है। यह नैसर्गिक प्रवृत्ति मनुष्य को अन्य मनुष्यों से सम्बन्ध रखने को बाध्य करती है। सामाजिक जीवन इन्हीं संबंधों पर आधारित है। इन सामाजिक संबंधों को व्यवस्थित रखने के लिए मनुष्य के व्यवहार पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है। यही कारण है कि विधि …

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व्यक्ति अध्ययन विधि की प्रकृति, व्यक्ति-अध्ययन के गुण एवं दोष #शिक्षा मनोविज्ञान

व्यक्ति अध्ययन विधि एक ऐसी विधि है जिसमें किसी सामाजिक इकाई के जीवन की घटनाओं का अन्वेषण तथा विश्लेषण किया जाता है। सामाजिक इकाई के रूप में किसी एक व्यक्ति, एक परिवार, एक संस्था, एक समुदाय आदि के बारे में अध्ययन किया जा सकता है। व्यक्ति-अध्ययन का उद्देश्य वर्तमान को समझना, उन भूतकालीन घटनाओं का पहचानना …

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लाभांश नीति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, एक सुदृढ़ लाभांश नीति के आवश्यक तत्व

लाभांश नीति का अर्थ है कि वितरण और बकाया कोष रखने के लिए एक नियमित पहुंच को अपनाना कि वर्ष दर वर्ष किसी अस्था्ई निर्णय को लेना। यह लाभांश की अदायगी के समय और मूल्य पर भी ध्यान देती है । उपयुक्त लाभांश नीति बनाना प्रबन्ध् के लिए बड़ा सोच विचार का कार्य है क्योंकि इससे …

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स्थानीय स्वशासन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार (पंचायती राज व्यवस्था)

स्थानीय स्वशासन का अर्थ स्थानीय संस्थाओं द्वारा संचालित वह शासन हे जिन्हें स्थानीय स्तर पर क्षेत्र की जनता द्वारा चुना जाता है। तथा इनको राष्ट्रीय सरकार के नियंत्रण में रहते हुए भी कुछ मामलों में अपनी स्वायत्तता, अधिकार तथा जिम्मेदारी प्राप्त हो जिसका उपयोग किसी सर्वोच्च अधिकारी के नियंत्रण के बिना अपने विवेक से कर सकें। …

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वर्ज्य पदार्थ क्या है इसकी अधिक मात्रा उपयोग करने पर हानिकारक प्रभाव

हमारे समाज में कुछ ऐसे पदार्थों का प्रचलन है। जो कि व्यक्ति के स्वस्थ के लिए अत्यधिक हानिकारक होते है। इन्हें वर्ज्य पदार्थ या निषिद्ध भोज्य पदार्थ कहते है। जैसे- मदिरा धूम्रपान तम्बाकू अफीम चरस आदि। 1. मदिरा – ये गेहूँ, जौ, चावल, अंगूर आदि के सड़ने के उपरान्त बनायी जाती है। इसमें हानीकारक पदार्थ एल्कोहल …

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भूकंप की उत्पत्ति के संबंध में विचारधाराएं भूकंप से बचने के उपाय तथा सावधानियाँ

भूकंप अत्यन्त विनाशक और विध्वंशकारी, प्राकृतिक आपदा है। इसका पुनर्वनुमान नहीं हो पाता है। क्योंकि इसमें कम समय में पृथ्वी के अन्तरिक भाग से अधिक मात्रा में उर्जा का निकास होता है और पृथ्वी की पपटी हिलने और कांपने लगती है जिससे जनजीवन का अधिक विनाश और हानि होती है। भूकंप पृथ्वी का कंपन होते है। …

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संघीय सरकार (Federal Government) किसे कहते हैं

संघवाद के अंग्रेजी रूपांतर Federalism का विकास लेटिन भाषा के शब्द ‘फोइडस’ (Foedus) से हुआ है जिसका अर्थ है संधि अथवा समझौता। किसी भी संघीय व्यवस्था की स्थापना के लिए कुछ स्वतंत्र राज्य अपने-आपको अलग-अलग रखते हुए भी सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक संघ के रूप में संयुक्त कर लेते है। ये राज्य अपने कुछ …

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