हठयोग का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य

हठयोग में जब इड़ा और पिंगल नाड़ी, वाम और दक्षिण स्वर जब एक समान चलने लगें तो सुषुम्ना का जागरण होता है। जब सुषुम्ना निरन्तर चलने लगती है तो शरीर में सूक्ष्म रूप में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। जब कुण्डलिनी छरूचक्रों का भेदन करती हुई सहस्रार में जाकर परमशिव से मिलती हैं तो …

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ज्ञानयोग क्या है? ज्ञानयोग की साधना के किन साधनों एवं गुणों की आवश्यकता होती है?

ज्ञान योग बुद्धि और विश्लेषण का मार्ग है। यह विवेक से संबंधित है और इसकी अपनी एक क्रियाविधि होती है। इस क्रियाविधि का केन्द्र श्रवण स्मरण और विश्लेषण (मनन) और ध्यान करने की विधि (निदिध्यासन) के इर्दगिर्द घूमता है। आज वैज्ञानिक युग में मनुष्य काफी तर्कशील हो गया है। आज बौद्धिक शक्ति का बोलबाला है। विश्लेषण …

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भक्ति योग क्या है भक्ति योग के प्रकार?

भक्ति से तात्पर्य है कि ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रेमपूर्ण आसक्ति। यह शब्द भज् (सम्मिलित होने) धातु से निर्मित है और सहभागिता की ओर संकेत करता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाला योगी दिव्य ईश्वर के प्रति स्वयं को समर्पित करता है, भक्ति भाव से सेवा करता है और उनकी पूजा अर्चना में तल्लीन रहकर …

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कर्मयोग का अर्थ, परिभाषा, भेद एवं प्रकार

कर्मयोग उन लोगों के लिए है जो प्रकृति से सक्रिय होते हैं भगवद ्गीता में कर्म  योग के चार मुख्य नियम वर्णित हैं ताकि आप सभी तनावों से एकदम मुक्त होकर अपन े कर्म (कार्य) का हर क्षण आनन्द ले सके। कर्म कर्तव्य समझकर करें, कार्य को बिना आसक्ति से करें, परिणाम की चिंताओ को कभी …

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वेदांत दर्शन क्या है वेदांत दर्शन में योग का स्वरूप?

वेदांत दर्शन उपनिषद वैदिक साहित्य का अन्तिम भाग है इसलिए इसे वेदांत कहते हैं वेदांत का शाब्दिक अर्थ है- वेदों का अन्त (अथवा सार) वेदांत ज्ञानयोग की शाखा है इसका मुख्य श्रोत उपनिषद हैं जो वेद ग्रन्थों का सार समझे जाते हैं । यह महर्षि वेदव्यास रचित है। महर्षि व्यास के अनुसार यह ‘ब्रह्म’ सूत्र हैं …

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यथार्थवाद का अर्थ, परिभाषा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यथार्थवाद एक भौतिकवादी दर्शन है। वस्तु को वास्तविक अथवा यथार्थ मानने के कारण ही इस विचारधारा को वास्तववाद अथवा यथार्थवाद की संज्ञा दी जाती है। यथार्थवाद जगत को मिथ्या कहने वाली भावना का विरोधी स्वर है। यथार्थवाद का अर्थ यथार्थवाद का अर्थ यथार्थवाद के लिए अंग्रेजी का शब्द ‘रियलिज्म’ है। ‘रियल’ शब्द ग्रीक भाषा के रीस …

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मानवतावाद का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, मूल सिद्धांत, दोष या आलोचना

मानवतावाद को मूलत: मनुष्य जाति के प्रति नैतिक दृष्टि रूप में देखा जाता है। जहा दयालुता, परोपकार सहानुभूति जैसे गुणों को मनुष्यता के लिए सार्वभैामिक माना जाता है। इसके अनुसार पीड़ा और यातना के संदर्भ में किसी के प्रति लिंग, प्रजाति, राष्ट्रीयता, धर्म के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं रखा जाता है। मानवीय उच्चतर मूल्यों को …

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प्रयोजनवाद (Pragmatism)-अर्थ, परिभाषा, सिद्धान्त, उद्देश्य

प्रयोजनवाद के लिये अंग्रेजी का शब्द ‘‘Pragmatism’’ है। इस शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द प्रैग्मा से हुयी जिसका अर्थ है किया गया कार्य, व्यवसाय, प्रभावपूर्ण कार्य।  कुछ विद्वानों ने इस शब्द की उत्पत्ति दूसरे यूनानी शब्द ‘‘प्रेग्मिटिकोस’’ से बताया है, जिसका अर्थ है प्रौक्टिकेबल अर्थात् व्यावहारिक इसके अनुसार प्रैग्मैटिज्म का अर्थ है व्यवहारिकता। इस दृष्टि से …

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