ऐतिहासिक अनुसंधान विधि क्या है ऐतिहासिक अनुसंधान का मूल उद्देश्य?

ऐतिहासिक अनुसंधान विधि ऐतिहासिक अनुसंधान का सम्बन्ध भूतकाल से हैं। यह भविष्य को समझने के लिये भूत का विश्लेषण करता है। जॉन डब्ल्यू बेस्ट के अनुसार ‘‘ऐतिहासिक अनुसंधान का सम्बन्ध ऐतिहासिक समस्याओं के वैज्ञानिक विश्लेषण से है। इसके विभिन्न पद भूत के सम्बन्ध में एक नयी सूझ पैदा करते है, जिसका सम्बन्ध वर्तमान और भविष्य से …

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शोध परिकल्पना का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, स्रोत, विशेषताएं

परिकल्पना का अर्थ, परिकल्पना क्या है? परिकल्पना शब्द परि + कल्पना दो शब्दों से मिलकर बना है। परि का अर्थ चारो ओर तथा कल्पना का अर्थ चिन्तन है। इस प्रकार परिकल्पना से तात्पर्य किसी समस्या से सम्बन्धित समस्त सम्भावित समाधान पर विचार करना है। परिकल्पना किसी भी अनुसन्धान प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ है। इसका तात्पर्य यह …

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शोध समस्या क्या है? परिभाषा, शोध समस्या के स्रोत

किसी भी शैक्षिक शोध की शुरूआत एक शोध समस्या की स्पष्ट पहचान से होती है। शोध समस्या की स्पष्ट रूप से पहचान कर उसका उल्लेख करना शोधकर्ता के लिए एक कठिन कार्य होता है। फिर भी वह परिस्थितियों की समझ, अपने अनुभवों एवं पहले किये गये शोधों की समीक्षा करके किसी स्पष्ट तथा ठोस समस्या का …

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार उपभोक्ता संरक्षण का अर्थ

उपभोक्ता के हितो के संरक्षण के लिये सरकार ने 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया। 15 अप्रैल सन् 1987 मे इसे जम्मू-कश्मीर राज्य को छोडकर सभी राज्यों में क्रियान्वित किया गया। अत: उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिये बनाया गया अधिनियम ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कहलाता है। इस अधिनियम के अन्र्तगत कुल 31 …

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उपभोक्ता शिक्षा के क्या लाभ हैं उपभोक्ता शिक्षा की आवश्यकता या महत्व?

उपभोक्ता शिक्षा सामान्य शिक्षा की वह शाखा है, जो किसी वस्तु, माल या सेवा का उपभोग करने वाले व्यक्ति को ऐसी वस्तु, माल या सेवा के संबंध में दी जाती है। दूसरे शब्दों में, उपभोक्ता वर्ग को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों से अवगत कराना ही उपभोक्ता शिक्षा है। उपभोक्ता शिक्षा में निम्नलिखित के बारे में जानकारी …

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निर्यात व्यापार किसे कहते हैं? माल निर्यात करने की विधि क्या है ?

किसी अन्य देश को माल बेचना निर्यात व्यापार कहलाता है। देश को समृद्धशाली बनाने के लिए निर्यात में वृद्धि आवश्यक है। आयतों के मूल्य का भुगतान निर्यात करते हैं अत: निर्यात द्वारा ही विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है और इस अर्जित मुद्रा से ही आवश्यक वस्तुए मशीन, दवाइयां, कच्चा माल आदि विदेशों से मंगाया …

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विभागीय भंडार किसे कहते हैं ?

विभागीय भण्डारों को फैशन प्रेमी फ्रांस की देन माना गया है। सर्वप्रथम सन् 1850-52 के बीच पेरिस में सबसे पहला विभागीय भण्डार स्थापित हुआ था। तदुपरान्त योरोप के अन्य देशों एवं अमेरिका में इन भण्डारों की स्थापना तेजी से की जाने लगी। फ्रांस के बोन मार्क एवं लूअर तथा भारत के वाइट वे एण्ड लेडला स्टोर्स …

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विदेशी व्यापार किसे कहते हैं भारत में विदेशी व्यापार का क्या महत्व है?

मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त हैं। कुछ आवश्यकता की वस्तुए तो देश में ही प्राप्त हो जाती है तथा कुछ वस्तुओं को विदेशों से मंगवाना पड़ता है। भोगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रत्येक देश सभी प्रकार की वस्तुए स्वयं पैदा नहीं कर सकता है। किसी देश में एक वस्तु की कमी है तो दूसरे देश में किसी दूसरी …

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थोक व्यापार किसे कहते हैं? इसकी परिभाषा विशेषताएं व कार्य

थोक व्यापारी से आशय ऐसे व्यापारी से है, जो उत्पादकों से बड़ी मात्रा में वस्तुओं को क्रय करके थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फुटकर व्यापारियों को बेचता है। थोक व्यापारी निर्माता एवं फुटकर व्यापारियों के बीच की कड़ी है। यह निर्माता और फुटकर व्यापारियों के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है। ‘थोक व्यापारी फुटकर अथवा अन्य व्यापारियों के …

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सुपर बाजार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, लाभ

भारत में प्रचलित सुपर बाजारों का स्वरूप पाश्चात्य देशों के विभागीय भण्डारों से मिलता-जुलता है। किन्तु ‘स्वयं सेवा’ तथा मूल्यों में अन्तर को देखकर ग्राहकों का पता चलता है कि वे सुपर बाजार में ‘चिन्तामणी’, ‘सहकारी मण्डली’, ‘सस्ता बाजार’, ‘जनता बाजार’, ‘अपना बाजार’, ‘मिला-जुला भण्डार’ एवं ‘सहकारी बाजार’ भी कहा जाता है।  ये बाजार जनता एवं …

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