ज्ञानयोग क्या है? ज्ञानयोग की साधना के किन साधनों एवं गुणों की आवश्यकता होती है?

ज्ञान योग बुद्धि और विश्लेषण का मार्ग है। यह विवेक से संबंधित है और इसकी अपनी एक क्रियाविधि होती है। इस क्रियाविधि का केन्द्र श्रवण स्मरण और विश्लेषण (मनन) और ध्यान करने की विधि (निदिध्यासन) के इर्दगिर्द घूमता है। आज वैज्ञानिक युग में मनुष्य काफी तर्कशील हो गया है। आज बौद्धिक शक्ति का बोलबाला है। विश्लेषण …

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भक्ति योग क्या है भक्ति योग के प्रकार?

भक्ति से तात्पर्य है कि ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रेमपूर्ण आसक्ति। यह शब्द भज् (सम्मिलित होने) धातु से निर्मित है और सहभागिता की ओर संकेत करता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाला योगी दिव्य ईश्वर के प्रति स्वयं को समर्पित करता है, भक्ति भाव से सेवा करता है और उनकी पूजा अर्चना में तल्लीन रहकर …

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कर्मयोग का अर्थ, परिभाषा, भेद एवं प्रकार

कर्मयोग उन लोगों के लिए है जो प्रकृति से सक्रिय होते हैं भगवद ्गीता में कर्म  योग के चार मुख्य नियम वर्णित हैं ताकि आप सभी तनावों से एकदम मुक्त होकर अपन े कर्म (कार्य) का हर क्षण आनन्द ले सके। कर्म कर्तव्य समझकर करें, कार्य को बिना आसक्ति से करें, परिणाम की चिंताओ को कभी …

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वेदांत दर्शन क्या है वेदांत दर्शन में योग का स्वरूप?

वेदांत दर्शन उपनिषद वैदिक साहित्य का अन्तिम भाग है इसलिए इसे वेदांत कहते हैं वेदांत का शाब्दिक अर्थ है- वेदों का अन्त (अथवा सार) वेदांत ज्ञानयोग की शाखा है इसका मुख्य श्रोत उपनिषद हैं जो वेद ग्रन्थों का सार समझे जाते हैं । यह महर्षि वेदव्यास रचित है। महर्षि व्यास के अनुसार यह ‘ब्रह्म’ सूत्र हैं …

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आहार आयोजन किसे कहते हैं आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले तत्व?

पोषण के सिद्धान्तों को मानते हुए परिवार की आवश्यकता, समय व धन के अनुसार कल्पना करके भोजन प्रस्तुत करता है। आहार आयोजन द्वारा गृहिणी अपने परिवार को सन्तुलित आहार प्रदान कर सकती है और आहार आयोजन का मुख्य उद्देश्य भी यही है।  आहार नियोजन एक कला है। कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया भोजन हर व्यक्ति …

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पोषण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, पोषण तत्व

पोषण अर्थात Nutration हमारे द्वारा सेवित किये गये आहार द्रव्यों तथा शरीर द्वारा उसके किये गये आवश्यकतानुसार उपयोग की वैज्ञानिक अध्ययन की प्रक्रियाओं को पोषण कहते है। पोषण के अन्तर्गत संतुलित आहार, पोषक तत्त्व, भोजन के कार्य भोजन के पाचनोपरान्त शरीर में उपयोग, भोजन एवं रोगेां का परस्पर संबंध आहार द्रव्यों का आर्थिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक …

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मानव अधिकार का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, सिद्धांत

मानव अधिकारों से तात्पर्य उन सभी अधिकारों से हैं जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए है। यह अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से वर्णित किए गए हैं और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं। इसके अलावा ऐसे अधिकार जो अन्तर्राष्ट्रीय समझौते के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा …

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परियोजना का अर्थ, महत्व, स्वरूप

परियोजना का अर्थ-’परियोजना’ शब्द योजना में ‘परि’ उपसर्ग लगने से बना है। ‘परि’ का अर्थ है ‘पूर्णता’ अर्थात् ऐसी योजना जो अपने आप में पूर्ण हो । परियोजना का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी विचार को व्यवस्थित रूप में स्थिर करना या प्रस्तुत करना। इसके लिए ‘प्रोजेक्ट’ अंग्रेजी का शब्द है। प्रोजेक्ट का अभिप्राय है-प्रकाशित …

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निबंध का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं एवं अंग

निबंध का अर्थ निबंध शब्द ‘नि+बंध’ से बना है, जिसका अर्थ है अच्छी तरह से बँधा हुआ। इनकी भाषा विषय के अनुकूल होती है। निबंध की शक्ति है अच्छी भाषा। भाषा के अच्छे प्रयोग द्वारा ही भावों विचारों और अनुभवों को प्रभावशाली दंग से व्यक्त किया जा सकता है। निबंध की परिभाषा बाबू गुलाबराय ने निबंध …

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जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याएं || जनसंख्या वृद्धि का आर्थिक विकास पर प्रभाव

जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याएं विश्व के अन्य देशों की अपेक्षा भारत में जनसंख्या वृद्धि तेजी से हो रही है। जिससे अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। इन समस्याओं के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण भी है। जनसंख्या वृद्धि का सबसे बुरा प्रभाव पर्यावरण पर पड रहा है जिससे जीवन संबंधी अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न …

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