व्यसन किसे कहते हैं ? नशीले पदार्थों का मानव पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

व्यसन एक द्रव्य सम्बन्धी विकृति है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में विभिन्न प्रकार के रसायन द्रव्यों का सेवन करता है और इन द्रव्यों पर इतनी अधिक निर्भरता बढ़ जाती है कि इनके दुष्प्रभावों से परिचत होते हुए भी वह इनको लेने के लिये विवश हो जाता है, क्योंकि न लेने पर उसके शरीर और मन को …

Read more

चिंता क्या है इसके कारण एवं लक्षणों का विस्तृत वर्णन

चिन्ता अपने आप में एक ऐसा मानसिक रोग है जो व्यक्ति के विचारों में लगकर भीतर ही भीतर उसे खोखला करता जाता है। चिन्ता सामान्यतः अज्ञात, अमूर्त एवं व्यक्तिनिष्ठ परिस्थितियों से सम्बन्धित होती है। जो प्रायः इच्छित वस्तु के न प्राप्त होने की दशा में या फिर उसको प्राप्त करने के मार्ग में आने वाले अवरोधों …

Read more

स्मृति किसे कहते हैं? परिभाषा सहित स्मृति का अर्थ

प्राय: हम यह सुनते हैं कि अमुक व्यक्ति की स्मृति बहुत अच्छी है। अमुक व्यक्ति बार-बार भूल जाता है। कई व्यक्ति अपनी स्मृति में कई सूचनाओं को एक साथ रख लेते हैं। कई बार हम बचपन की बातों को स्मृति में ले आते हैं तो कई बार हम वर्तमान की बातों को भी भूल जाते हैं। …

Read more

मनोवैज्ञानिक परीक्षण की विभिन्न विधियाँ

क्या आप जानते हैं कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण कितने प्रकार के होते हैं?  मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक मानवीकृत यन्त्र होता है, जिसमें प्रश्नों अथवा चित्रों या अन्य माध्यमों के द्वारा मनुष्य की विभिन्न मानसिक योग्यताओं जैसे कि बुद्धि, समायोजन क्षमता, स्मृति, अभिवृत्ति, अभिरूचि इत्यादि का मात्रात्मक मापन किया जाता है।  कहने का आशय यह है कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण …

Read more

एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत, मनोसामाजिक विकास की 8 अवस्थाएं

एरिक एरिक्सन एक प्रसिद्ध मनोविष्लेशक थे जिसने मानव के सम्पूर्ण जीवनकाल के सामान्य विकास का मनोसामाजिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया । एरिक्सन ने व्यक्तित्व विकास के लिए सामाजिक कारकों के महत्व पर बल दिया । उसने विकास के विभिन्न अवस्थाओं के नियत निर्धारकों को स्थिरता और स्थायित्व में भिन्न है , का सम्प्रत्यय विकसित किया । एरिक्सन …

Read more

एडलर द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व सिद्धांत का विवेचन

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धान्त ‘‘नवमनी विश्लेषणात्मक उपागम’’ पर आधारित है। एडलर यद्यपि फ्रायड के काफी नजदीक थे, किन्तु वे व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रायड के कुछ विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने फ्रायड से पृथक होकर एक नये व्यक्तित्व सिद्धान्त को जन्म दिया, जिसका नाम रखा – ‘‘वैयक्तित्व मनोविज्ञान का सिद्धान्त’’ इस सिद्धान्त की खास …

Read more

अरविन्द घोष जीवन परिचय, जीवन दर्शन एवं शिक्षा दर्शन

अरविन्द घोष का जन्म 15 अगस्त 1872 को कलकत्ता में हुआ। अरविन्द घोष के पिता डॉ. कृष्णधन घोष विलायत से डॉक्टरी की पढ़ाई करके लौटे तो अंग्रेजियत के भक्त होकर आये। अरविन्द घोष को जन्म के समय जो नाम दिया गया उसमें बीच में विलायती नाम भी जोड़ा हुआ था – अरविन्द ऐक्रॉइड घोष। घर में …

Read more

आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय || Aadi shankaracharya ka jivan parichay

आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालरी गांव में सन् 684 ई. में हुआ था, उनके पिता का नाम शिवगुरू तथा माता का नाम सती था। शंकराचार्य ने बाल्यकाल से ही सन्यास ले लिया था और वेदान्त की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे महात्मा गोविन्दाचार्य के पास चले गए थे। शिक्षा प्राप्त करने के बाद …

Read more

मंत्रयोग क्या है मंत्रयोग के प्रकार ?

शास्त्रों के अनुसार अनेक प्रकार के योग बताए गये हैं, इन सभी योग की साधना सबसे सरल और सुगम है। मंत्र योग की साधना कोई श्रद्धा पूर्वक व निर्भयता पूर्वक कर सकता है। श्रद्धापूर्वक की गयी साधना से शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर अभीष्ट की प्राप्ति की जा सकती है। अपने लक्ष्य को मंत्र योग द्वारा …

Read more

हठयोग का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य

हठयोग में जब इड़ा और पिंगल नाड़ी, वाम और दक्षिण स्वर जब एक समान चलने लगें तो सुषुम्ना का जागरण होता है। जब सुषुम्ना निरन्तर चलने लगती है तो शरीर में सूक्ष्म रूप में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है। जब कुण्डलिनी छरूचक्रों का भेदन करती हुई सहस्रार में जाकर परमशिव से मिलती हैं तो …

Read more