भारतीय संविधान में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया

न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया एक स्वस्थ एवं निष्पक्ष न्यायपालिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। जितने श्रेष्ठ व्यक्ति इस प्रक्रिया द्वारा चुने जायेंगे उतना ही न्यायपालिका का स्तर बेहतर होगा। संविधान निर्माण के समय से ही इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ, जो अभी भी जारी है। न्यायाधीशों की निष्पक्षता न सिर्फ न्यायपालिका पर प्रभाव …

Read more

न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्या है भारतीय संविधान में न्यायापालिका की स्वतंत्रता स्थापित करने हेतु प्रावधान?

न्यायालय की स्वतंत्रता की संकल्पना इग्लैण्ड से ली गयी है। सन् 1616 में न्यायाधीश कोक को उनके पद से (किंग बेन्च के मुख्य न्यायाधीश) पदच्युत किया गया था। इस समय न्यायाधीश अपने पद को सम्राट के प्रसादपर्यन्त धारणा करते थे और सम्राट के अन्य कर्मचारियों के समान थे। वे सम्राट की इच्छा से पद से हटाये …

Read more

न्यायिक सक्रियता क्या है

न्यायिक सक्रियता की उत्पत्ति प्रजातन्त्र के तीन प्रमुख स्तम्भों न्यायपालिका, विधायिका एवं कार्यपालिका में से जब विधायिका तथा कार्यपालिका स्वयं को प्रदत्त कार्यों को करने में शिथिलता प्रकट करें या असमर्थ हो जाये तो प्रजातंत्र के तीसरे स्तम्भ के रूप में न्यायापालिका इन कार्यों का संपादन करने हेतु आगे आती है। यही अवधारणा न्यायिक सक्रियता कहलाती …

Read more

संघात्मक शासन प्रणाली का अर्थ, परिभाषा, लक्षण या तत्व

शासन की शक्तियों का प्रयोग मूल रूप से एक स्थान से किया जाता है या कई स्थानों से। इस आधार पर शासन-प्रणालियों के दो प्रकार हैं-एकात्मक शासन और संघात्मक शासन। जिस शासन-व्यवस्था में शासन की शक्ति एक केन्द्रीय सरकार में संकेन्द्रित होती है, उसे एकात्मक शासन कहते हैं। इसके विपरित जिस प्रणाली में शासन की शक्तियाँ …

Read more

आधुनिकीकरण क्या है, आधुनिकीकरण की समस्याएं?

आधुनिकीकरण कोई दर्शन या आन्दोलन नहीं है जिसमें स्पष्ट मूल्य व्यवस्था हो। यह तो परिवर्तन की एक प्रक्रिया है प्रारम्भ में आधुनिकीकरण शब्द का प्रयोग ‘‘अर्थ व्यवस्था में परिवर्तन और सामाजिक मूल्यों एवं प्रथाओं पर इसके प्रभाव’’ के संदर्भ में किया जाता था। इसका वर्णन ऐसी प्रक्रिया के रूप में किया जाता था जिसने समाज को …

Read more

सांप्रदायिक हिंसा के कारण (बहुकारक उपागम में दस प्रमुख कारक साम्प्रदायिकता के कारणों के बताये गये हैं)

सांप्रदायिक हिंसा के कारण साम्प्रदायिक हिंसा की समस्या को समझने के लिये दो उपागमों का उपयोग किया जा सकता है: (क) ढांचों की कार्यप्रणाली का निरीक्षण करना, और (ख) उसके उद्भव की प्रक्रिया के कारण मालूम करना। पहले प्रकरण (case) में साम्प्रदायिक हिंसा को सामाजिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली या समाज के ढांचों के संचालन के अध्ययन …

Read more

धर्म की परिभाषा, उत्पत्ति का सिद्धांत (आत्मवाद या जीववाद)

संस्कृत शब्दार्थ कोष के अनुसार, धर्म शब्द धारणार्थक धृ धातु से उत्पन्न है। जिसका अर्थ है धारण करना अत: धर्म का मूल अर्थ है जो धारण किया जाए अथवा जो व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को धारण करता है। यह सामान्य रूप से पदार्थ मात्र का वह प्राकृतिक तथा मूल गुण है, जो उसमें शष्वत रूप से …

Read more

परम्परा का अर्थ, परिभाषा

परम्परा सामाजिक विरासत का वह अभौतिक अंग है जो हमारे व्यवहार के स्वीकृत तरीकों का द्योतक है, और जिसकी निरन्तरता पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरण की प्रक्रिया द्वारा बनी रहती है। परंपरा को सामान्यत: अतीत की विरासत के अर्थ में समझा जाता है। कुछ विद्वान ‘सामाजिक विरासत’ को ही परम्परा कहते हैं।  परन्तु वास्तव में परम्परा के काम करने …

Read more

कुपोषण के कारण, लक्षण, कुपोषण से होने वाली बीमारियां

कुपोषण मुख्य रूप से, ‘‘पोषण की वह स्थिति है, जिसके कारण व्यक्ति के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगती है। यह एक या एक से अधिक तत्वों की कमी या अधिकता या असंतुलन के कारण होती है, जिसके कारण शरीर रोगग्रस्त हो जाता है’’।  कुपोषण के कारण भोजन के विभिन्न पोषक तत्वों का समुचित अनुपात में न …

Read more

द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास, कारण, घटनाएं और परिणाम

1919 ई. के पेरिस शांति सम्मेलन के ठीक 20 वर्ष बाद 1939 ई. में द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हो गया। 1 सितम्बर 1939 को जैसे ही हिटलर ने पोलैण्ड पर आक्रमण किया। तब 3 सितम्बर 1939 को इंग्लैण्ड ने जर्मनी के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हो गया। द्वितीय विश्व …

Read more