रंग भेद की नीति क्या है?

रंगभेद Apartheid शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘Apart’ एवं Hood शब्दों से मिलकर बना है इसका व्यावहारिक रूप से सरल अर्थ ‘रंगभेद’ माना जा सकता है। इसे ‘वर्ण पृथक्करण’ की नीति भी कहा जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका के उपनिवेशकाल में प्रजाति पृथक्करण की नीति प्रारंभ हुई और 20वीं सदी के मध्य तक यह कायम रही।  सन् …

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नागरिक अधिकार आंदोलन (अमेरिका में)

नागरिक अधिकारों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की लोकतंत्र का। नागरिक अधिकार आंदोलन उन आंदोलनों को कहा जाता है जिनके द्वारा श्विधि के समक्ष समानता के लिए संघष किया गया। यह विश्व के अलग-अलग देशों में विभिन्न असंतुष्ट नेताओं और लोकप्रिय विद्राहियों के नेतृत्व में लगभग 1950 से 1980 के मध्य अलग-अलग रूप से …

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चीन की सांस्कृतिक क्रांति का प्रारंभ, घटनाएं, प्रभाव एवं महत्व

चीन में 1911 की क्रांति के बाद जो राजनीतिक एवं सामाजिक पुर्ननिर्माण का सिलसिला प्रारंभ हुआ वह 1949 की लाल क्रांति से होता हुआ 1968 की महान सांस्कृतिक क्रांति में परिणीत हो गया। 1966 से 1976 का कालखंड वह समय माना जा सकता है जब चीनी समाज में राजनैतिक एवं सामाजिक व्यवस्था को लेकर शीर्ष नेतृत्व …

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1905 की रूसी क्रांति के लिए जो परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं, उनका विवरण

क्रांति का अर्थ मात्र रक्तपात नहीं है, बल्कि अत्यन्त शीघ्रता के साथ होने वाले आमूल परिवर्तन को क्रांति कहा जाता है । एक रूसी विद्वान ने कहा है कि क्रांति उस समय होती है, जब उसके पीछे कोई सामाजिक माँग होती है ।  क्रांति के संबंध में लार्ड मैकाले का कथन है कि “क्रांति और विप्लव …

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साम्राज्यवाद से आप क्या समझते हैं साम्राज्यवाद के सिद्धांत

साम्राज्यवाद के अर्थ को समझना आसान नहीं है। अलग-अलग विद्वानों ने अनेकों तरह से इसके सार को समझानें की कोशिश कर इसे काफी कठिन कर दिया है। फिर भी इसके अर्थ को सरल भाषा में कहें तो वह, यह है कि, पूंजीवाद जब अपने विकास के चर्मोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तो, वह साम्राज्यवाद में परिवर्तित …

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पूंजीवाद (पूंजीवादी अर्थव्यवस्था) क्या है पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ ?

आधुनिक पूंजीवाद का जन्म यूरोप में 18वीं सदी में हुआ जब उद्योगों में मशीनों का प्रयोग होने लगा और मशीनों को चलाने के लिए मानव एवं पशु शक्ति के स्थान पर जड़-शक्ति का प्रयोग किया जाने लगा। पश्चिमी देशों एवं विश्व के कई अन्य देशों में पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का प्रचलन पाया जाता है।  पूंजीवाद को पारिभाषित …

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राष्ट्रवाद का अर्थ, परिभाषा, अनिवार्य तत्व

राष्ट्रवाद लोगों में किसी समूह की उस आस्था को कहते हैं, जिनमें इतिहास, भाषा, जातीयता एवं संस्कृति के आधार पर एकजुट हों। इन्हीं बंधनों के कारण वे इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि अपने राजनीतिक समुदाय अर्थात राष्ट्र की स्थापना करने का आधार हो। हालांकि दुनिया में ऐसा कोई राष्ट्र नहीं है जो इन कसौटियों पर …

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संसद के कितने अंग होते हैं उनके नाम

संविधान के अनुच्छेद 79 के अंतर्गत भारतीय संसद का गठन किया गया है। भारतीय संसद के अंतर्गत राष्ट्रपति और संसद के दो सदन सम्मिलित है। पहला सदन लोक सभा है जिसे निम्न सदन भी कहा जाता है जबकि दूसरा सदन राज्य सभा है जिसे उच्च सदन कहा जाता है। लोक सभा अस्थायी सदन हैं, जिसे कभी …

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संविधान में उपराष्ट्रपति के कार्य का वर्णन

भारतीय संविधान के अनुसार भारत के लिए एक उपराष्ट्रपति की भी व्यवस्था की गई है। भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, संविधान का अनुच्छेद (63) इसकी व्यवस्था करता है। उपराष्ट्रपति के पद की संकल्पना को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ली गई। वहां की शासन व्यवस्था भारतीय शासन व्यवस्था से भिन्न है। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था ने कुछ …

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भारत के राष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य

राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनेां सदनों के चयनित सदस्य समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार राज्यों में विधान सभा के सदस्यों के द्वारा एकल अंतरणीय मत के द्वारा होता है । राज्यो के बीच परस्पर एकरूपता लाने के लिए तथा सम्पूर्ण रूप से राज्यों और केंद्र के …

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