मनोविज्ञान की विधियाँ

मनोविज्ञान बहुत विस्तृत विषय है। इस विषय का गहराई पूर्ण अध्ययन करने के लिए कोई भी एक विधि पर्याप्त नहीं हो सकती है। मनोविज्ञान विषय की विशालता एवं इसकी गंभीरता के कारण यह बहुआयामी विज्ञान है जिसे समझने के लिए विभिन्न प्रकार की अध्ययन विधियों की आवश्यकता होती है इन अध्ययन विधियों में अंतःनिरीक्षण विधि, निरीक्षण …

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संतुलित आहार का अर्थ, परिभाषा, प्रमुख घटक, महत्व

ऐसा आहार जिसमें वे सभी चीजें उचित मात्रा में मौजूद हों जो शरीर निर्वाह के लिए आवश्यक है। ऐसे ही भोजन से शरीर का भली-भाँति पोषण होता है। उससे पर्याप्त शक्ति और ताप की उपलब्धि होती है तथा स्वास्थ्य एवं आयु की वृद्धि होती है। संतुलित आहार में कार्बोज, वसा, प्रोटीन, खनिज लवण, जल तथा सभी प्रकार के विटामिन उचित मात्रा में होते हैं जिनसे शरीर …

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आहार के स्रोत से हमारा क्या तात्पर्य है। मानव आहार के मुख्य रूप से दो स्रोत माने गये हैं-

मानव आहार प्राणी आहार माँस,मछली, अण्डा, दूध वनस्पति आहार अनाज, दाल, शर्करा, सब्जियाँ, फल, सूखेफल, मसाले आपके मन में यह जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो रही होगी कि आहार के स्रोत से हमारा क्या आशय है? वस्तुत: आहार के स्रोत से हमारा आशय यह है कि हमें आहार कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है। जिन भी पदार्थों …

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आहार का अर्थ, परिभाषा, महत्व, उद्देश्य, आवश्यकता

कोई भी खाने योग्य पदार्थ जो शरीर के लिये उपयोगी सिद्ध हो, आहार या भोजन है’’। भोजन के अन्तर्गत ठोस, अर्द्धठोस तथा तरल सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ आ सकते हैं। भोजन की दो मुख्य विशेषताएं हैं:- भोज्य पदार्थ खाने योग्य हों। भोजन पदार्थों से शरीर को पोषण मिलना चाहिए। भोजन, पोषक तत्वों तथा पोषण प्रदान …

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सद्वृत्त का अर्थ, अवधारणा एवं महत्व

सद्वृत्त की उत्पत्ति दो शब्दों के मिलने से होती है। प्रथम शब्द सद् एवं द्वितीय शब्द वृत्त। सद् एक सत्य वाचक शब्द है जिसका प्रयोग सही, उपयुक्त, अनुकूल एवं धनात्मक रुप में होता है जबकि वृत्त से तात्पर्य घेरे से होता है अर्थात सद्वृत्त ऐसे सकारात्मक एवं सही नियमों का घेरा है जिनका पालन करने से …

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दिनचर्या का अर्थ, परिभाषा, महत्व, दिनचर्या के पालनीय नियम

दिनचर्या शब्द दिन चर्या दो शब्दों से मिलकर बना है। दिन का अर्थ है दिवस तथा चर्या का अर्थ है। चरण अथवा आचरण से हैं। अर्थात् प्रतिदिन की चर्या को दिनचर्या कहते हैं। दिनचर्या एक आदर्श समय सारणी है जो प्रकृति की क्रमबद्धता को अपनाती है, तथा उसी का अनुसरण करने का निर्देश देती है।  दिनचर्या …

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वामपंथी आंदोलन क्या है

भारत में वामपंथी आंदोलन का उद्भव बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। सन् 1917 ई. में हुई रूस की साम्यवादी राज्यक्रांति की सफलता ने भारतीय उग्र राष्ट्रवादियों की भावना को समाजवाद की आरे मोड़ दिया। असहयोग आंदोलन की असफलता ने उनके इस विचार को दृढ़ता प्रदान की। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् बढ़ती हुई मंहगाई और बेरोजगारी …

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भारत में क्रांतिकारी आंदोलन का विकास : प्रथम चरण

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की एक पृथक धारा क्रांतिकारी आंदोलन है। भारत के नवयुवकों का एक वर्ग हिंसात्मक संघर्ष को राजनीतिक प्राप्ति के लिए आवश्यक मानते थे। वे स्वयं को मातृभूमि के लिए बलिदान करने को तैयार थे और हिंसक माध्यमों से ब्रिटिश शासन को भयभीत कर, आतंकित कर देश से निकाल देना चाहते थे। यह आक्रामक …

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(अम्ल पित्त) एसिडिटी का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार

अम्लपित्त का अर्थ है आमाशय में अत्यधिक अम्ल का बनना। यह रोग पाचन संस्थान के उपरी भाग अर्थात् आमाशय एवं ग्रसनी को प्रभावित करता है। पाचन संस्थान का स्वस्थ रहना उत्तम स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है क्योंकि स्वस्थ पाचन संस्थान शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का आधार स्तंभ माना गया है। जीवन को सुखपूर्वक व्यतित करने …

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गोलमेज सम्मेलन : (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तीव्रता को देखकर ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं ब्रिटिश राजनीतिज्ञों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया जाएगा। इसमें साइमन कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर भारत की राजनीतिक समस्या पर विचार-विमर्श होगा। प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर 1930-19 जनवरी 1931) प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड की …

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