मानव श्वसन तंत्र की संरचना और कार्य

वायुमण्डलीय आक्सीजन और कोशिकाओं में उत्पन्न co2के आदान प्रदान (विनिमय) की प्रक्रिया को श्वसन कहते है। श्वसन के दो भाग होते है- (i) चालन भाग (ii) श्वसन भाग/विनिमय चलन भाग → वाह्य नासारन्ध्र से अंतस्थ श्वसनिकाओं तक वायु का पहुँचना । श्वसन/विनिमय भाग →कूपिकाओं तथा उनकी नलिकाओं एवं रक्त के बीच आक्सीजन एवं co2 का आदान-प्रदान विनिमय …

Read more

पाचन तंत्र के प्रमुख अंग / सहायक अंग

व्यक्ति साधारण रूप में जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह वास्तव में भी तभी हमारे लिए उपयोगी होता है जब हम इस लायक हो जाये कि शरीर के अन्तर्गत रक्त कोशिकाओं एवं अन्य कोशिकाओं तक पहुंच कर शक्ति व ऊर्जा उत्पन्न कर सके। यह कार्य पाचन प्रणाली के विभिन्न अंग मिलकर करते हैं। पाचन …

Read more

मानव हृदय की संरचना किस प्रकार की है हृदय भित्ति का निर्माण किस प्रकार से होता है ?

हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार अन्दर से खोखला मांसल अंग होता है। यह शरीर के वक्ष भाग के वक्ष भाग में फेफडो के बीच स्थित होता है। हृदय ये ही रूधिर वाहिनियॉ रक्त को पूरे शरीर में ले जाती है। तथा फिर इसी से वापस लेकर आती है। सामान्यत: मनुष्य शरीर में रक्त की मात्रा 5 …

Read more

रक्त में किन पदार्थों का मिश्रण पाया जाता है इनके विषय में विस्तारपूर्वक विवरण

शरीर के भीतर जो एक लाल रंग का द्रव-पदार्थ भरा हुआ है, उसी को रक्त (Blood) कहते हैं। रक्त का एक नाम रुधिर भी है रुधिर को जीवन का रस भी कहा जा सकता है। यह संपूर्ण शरीर में निरन्तर भ्रमण करता तथा अंग-प्रत्यंग को पुष्टि प्रदान करता रहता है। जब तक शरीर में इसका संचरण …

Read more

मांसपेशियों के प्रकार, मानव शरीर की मुख्य पेशियों का संक्षिप्त परिचय

अनेकों कोशिकाओं एवं उनके समूह ऊतकों द्वारा ही शरीर के विभिन्न अंगों का निर्माण होता है। इन्हीं कोशिकाओं से ही मांसपेशी की उत्पत्ति होती है। मांसपेशी के प्रत्येक तन्तु में अनेक कोशिकाएं होती है। मनुष्य शरीर का अधिकांश वाह्य व आन्तरिक भाग मांसपेशियेां से ढका रहता है। शरीर का ऊपरी हिस्सा पूर्ण रूपेण मांसाच्छादित होने के …

Read more

अस्थि की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।

मानव शरीर का आधारभूत ढाँचा अस्थियों से बना है। शरीर की स्थिरता, आकार, आदि का मूल कारण अस्थियाँ ही है। मूल रूप से अस्थियाँ नियमित रूप से बढ़ने वाली, अपने आकार को नियमिति करने वाली अपने अन्दर होने वाली किसी भी प्रकार की टूट – फूट को ठीक करने में सक्षम है। मनुष्य का अस्थि संस्थान …

Read more

शरीर के प्रमुख ऊतक की संरचना एवं कार्य

समान स्वरूप एवं समान कार्य वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते है। कुछ ऊतक विशेष स्थानों पर पाए जाते हैं और कुछ सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहते है। ऊतकों के समूह मिलकर शरीर के अंगों का निर्माण करते है। उतकों के प्रमुख प्रकार है – उपकलीय तन्त्र ऊतक – यह शरीर के भीतरी और बाहरी …

Read more

किशोरावस्था की विशेष समस्याऐं है, निम्न समस्याऐं आमतौर पर किशोरों में देखने को मिलती है

किशोरावस्था बालक या बालिकाओं की अवस्था 12 से 18 वर्ष के बीच होती है, विकास एवं वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं में किशोरावस्था अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। किशोरावस्था मनुष्य के विकास की तीसरी अवस्था है यह बाल्यावस्था के बाद शुरू होकर प्रौढ़ावस्था शुरू होने तक चलती रहती है, परंन्तु जलवायु एवं व्यक्तिगत भेदों के कारण किशोरावस्था …

Read more

मानसिक विकास का सिद्धांत (जीन पियाजे की थ्योरी ऑफ कॉग्निटिव डेवलपमेंट)

मानसिक विकास को संज्ञानात्मक विकास के अध्ययन द्वारा भली प्रकार समझा जा सकता है। तकनीकी रूप में संज्ञानात्मक विकास ही मानसिक विकास है। संप्रत्यय निर्माण, सोचना, तर्क करना, याद रखना, विश्लेषण करना, निर्णय करना यह सब संज्ञानात्मक विकास की ही प्रक्रियाये हैं। इन प्रक्रियाओं को भली प्रकार समझने हेतु मनोवैज्ञानिकों ने बहुत से अनुसंधान किए हैं। …

Read more

मानव विकास की अवस्थाओं को गर्भधारण से लेकर पूरे जीवनकाल को इन भागों में विभाजित किया है।

मानव जीवन के विकास का अध्ययन  के अन्तर्गत किया जाता है। विकासात्मक मनोविज्ञान मानव के पूरे जीवन भर होने वाले वर्धन, विकास एवं बदलावों का अध्ययन करता है।  मानव विकास की विभिन्न अवस्थाएं मानव विकास की अवस्थाओं को गर्भधारण से लेकर पूरे जीवनकाल को इन भागों में विभाजित किया है। पूर्वप्रसूतिकाल – यह अवस्था गर्भधारण से …

Read more