लोक लेखा समिति क्या है लोक लेखा समिति के कार्य?

विशिष्ट प्रयोजनों के लिए धन पर मतदान करने के संसद के अधिकार का तब तक कोई अर्थ नहीं अनुमान समिति, सार्वजनिक लेखा समिति एवं सार्वजनिक उद्यम समिति है जब तक उसे यह निश्चित करने का अधिकार न हो कि संसद द्वारा स्वीकृत धनराशि का कार्यपालिका द्वारा उन्हीं प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है जिनके लिए …

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प्रशासनिक विकास क्या है विकासशील देशों में प्रशासनिक विकास की समस्याएं?

साधारण शब्दों में प्रशासनिक विकास का तात्पर्य विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतू प्रशासन की परम्परागत को कमियों दूर करना तथा उसमें प्रशासनिक कुशलता एवं क्षमता का विकास करके, उसे नवीन व परिवर्तित परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। प्रशासनिक विकास की परिभाषा 1. जे. एन. खोसला के अनुसार, “प्रशासनिक विकास में नौकरशाही की नीतियों, कार्यक्रमो, क्रियाविधियो, कार्य पद्धतियों, …

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विकास प्रशासन का अर्थ, परिभाषा, प्रमुख विशेषताओं का वर्णन

विकास प्रशासन का अर्थ विकास प्रशासन दो शब्दों ‘विकास’ तथा ‘प्रशासन’ के योग या मेल से बना है। ‘ कम वांछित परिस्थिति से अधिक वांछित परिस्थितियों की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया’ को विकास की संज्ञा देते हैं जबकि ‘प्रशासन सरकार का कार्यात्मक पहलू है जिसका अभिप्राय सरकार द्धारा लोक-कल्याण तथा जन-जीवन को व्यवस्थित करने हेतु …

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कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 226 के अनुसार कम्पनी अंकेक्षक की योग्यताएँ ?

अंकेक्षकों की नियुक्ति संचालक मण्डल के द्वारा, अंशधारियों के द्वारा एवं केन्द्र सरकार के द्वारा, स्थितियों को देखते हुए, की जाती है। भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत प्रत्येक कम्पनी के लिए अपने लेखों का अंकेक्षण करना अनिवार्य है। यह अंकेक्षण ‘‘वैधानिक अंकेक्षण’’ कहलाता है। जो व्यक्ति इस कार्य के लिए नियुक्त किया जाता है उसे …

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अंकेक्षण का अर्थ, उत्पत्ति, प्रकार एवं आवश्यकता

अंकेक्षण से तात्पर्य किसी संस्था की लेखा-पुस्तकों की विशिष्ट एवं आलोचनात्मक जाँच से है जो एक योग्य एवं निष्पक्ष युक्ति के द्वारा प्रमाणकों, प्रपत्रों सूचना तथा स्पष्टीकरणों की सहायता से की जाती है। अंकेक्षण की उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा का शब्द आडिटिंग (Auditing), जिसका हिन्दी अनुवाद ‘अंकेक्षण’ है, लेटिन भाषा के शब्द आडायर (Audire) से बना है, …

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कौन-कौन से कार्य कंपनी प्रवर्तकों को करने पड़ते हैं

प्रवर्तक वह व्यक्ति हैं जो कम्पनी का निर्माण करता है या उसमें सहायता करता है। प्रवर्तक एक व्यक्ति, फर्म व्यक्तियों का समूह या कम्पनी कोई भी हो सकता है। लेकिन निर्माण या प्रवर्तन से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति प्रवर्तक नहीं होता है। लेकिन अधिवक्ता पर वकील, जो प्रवक्ता की ओर प्रस्तावित कम्पनी के प्रवर्तन से संबंधित आवश्यक …

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत उपभोक्ता को दिए गए अधिकार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 एक महत्वपूर्ण अधिनियम के रूप में पेश किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता को संरक्षण प्रदान किया गया है। यह अधिनियम दिसम्बर 1986 में संसद द्वारा पास किया गया और 15 अप्रैल, 1987, को इसे लागू कर दिया गया। दिसम्बर 1993 में इस अधिनियम में कुछ संशोधन किए गए। यह अधिनियम …

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विपत्र क्या है एक विपत्र में इन तत्वों का होना आवश्यक है

धारा 5 के अनुसार, ‘‘विपत्र एक ऐसा लेखपत्र है जिसमें एक शर्तरहित आदेश, इसके लिखने वाले के हस्ताक्षर के अन्तर्गतए किसी विशेष व्यक्ति को एक निश्चित रकम, किसी निश्चित व्यक्ति के आदेशानुसार अथवा विलेख के वाहक को, देने का होता है।’’ विपत्र के आवश्यक तत्व एक विपत्र में इन तत्वों का होना आवश्यक है – एक …

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विनिमय साध्य लेखपत्र का अर्थ, परिभाषा, लक्षण एवं प्रकार

विनिमय साध्य का अर्थ है, सुपुर्दगी द्वारा हस्तांतरणीय: तथा ‘‘लेखपत्र‘‘ (विलेख) वह लिखित दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति के पक्ष में कोई अधिकार निर्मित करता है। अत: विनिमय साध्य लेखपत्र से आशय ऐसे लिखित लेखपत्रों से है जो किसी व्यक्ति के हित में अधिकार उत्पन्न करता है और जो सुपुर्दगी द्वारा हस्तांतरणीय होता है। विनिमय साध्य …

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गिरवी क्या है भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 172 के अनुसार

भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 172 के अनुसार ‘‘किसी श्रेणी के भुगतान अथवा किसी वचन के निष्पादन के लिये जमानत के रूप में निक्षेप को गिरवी कहते हैं। इस दशा में जो व्यक्ति गिरवी रखता है अर्थात् निक्षेपी को गिरवी रखने वाला (Plege or Pawnee) कहते हैं, एवं जिस व्यक्ति के पास वस्तु रखी जाती है …

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