लेनिन का सिद्धांत (पूंजीवादी साम्राज्यवाद, द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, सर्वहारा-वर्ग की तानाशाही )

व्लादीमीर इलिच लेनिन का जन्म 9 अप्रैल, 1870 को रुस के यूलियानोवस्क मे हुआ। उनका वास्तविक नाम व्लादीमीर इलचि उल्यानोव था। लेनिन बी0ए0 पास करने के बाद कलान विश्वविद्यालय में कानून की शिक्षा प्राप्त करने चला गया, वहां पर उसे क्रांतिकारी क्रियाकलापों के कारण एक बार विश्वविद्यालय से निष्कासित किया गया।  लेनिन ने अपनी कुशाग्र बुद्धि …

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न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ है किसी भी निर्णय की समीक्षा करना। न्यायिक पुनरावलोकन का उन देशों में काफी महत्व है जहाँ पर लिखित संविधान है, क्योंकि उन देशों मे सीमित सरकार की अवधारणा लागू होती है। न्यायिक पुनरावलोकन इस अर्थ मे माना जाता है कि इससे किसी विधायिका की शक्तियों की मान्यता कहाँ तक उचित है …

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कानून के शासन का अर्थ, परिभाषा, उत्पत्ति, विशेषताएं, आलोचना

कानून का शासन कानून की अवधारणा पर आधारित है। कानून सम्प्रभु का आदेश होता है जो सभी को मान्य होता है, क्येांकि वह सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित होता है। इसी कारण सभी लोग कानून की आज्ञा का पालन करते हैं। जिस राजनीतिक समाज में कानून को उचित महत्व दिया जाता है। वहीं पर कानून …

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नौकरशाही का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

औद्योगिक क्रान्ति के तुरन्त बाद सामाजिक व राजनीतिक ढांचे में आए परिवर्तनों ने संगठन की जिस प्रणाली को वह जन्म दिया, वह नौकरशाही ही है। सामाजिक आर्थिक परिवर्तन के दौर में परम्परागत समाज को संतुलित, व्यवस्थित और विकसित होने हेतु नौकरशाही जैसे तन्त्र की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की गई। यद्यपि विशिष्ट वर्ग के रूप में नौकरशाही …

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नौकरशाही का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं, आलोचना

राजनीति का अस्तित्व, सत्ता से है। राजनीतिक सत्ता का अंतरंग भाग नौकरशाही है, सत्ता का महत्व उसके पद से आँका जाता है। क्षमता तथा दायित्व के निर्वाह के लिए एक सत्ता को ऐसे द्वितीयक समूह का निर्माण करना पड़ता है जो सत्ता की रीति-नीति का क्रियान्वयन कर सके। सत्ता का अस्तित्व तभी तक है जब तक …

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तुलनात्मक राजनीति का अर्थ, परिभाषा, प्रकृति, क्षेत्र, महत्व

तुलनात्मक राजनीति का अर्थ तुलनात्मक राजनीति तुलनात्मक सरकारों, गैर-शासकीय राजनीतिक संस्थाओं, कबीलों, समुदायों व उनकी प्रक्रियाओं व व्यवहारों का अध्ययन है। तुलनात्मक राजनीति की परिभाषा 1. ब्रायबन्ती (Braibanti) ने लिखा है-”तुलनात्मक राजनीति सामाजिक व्यवस्था में उन तत्वों की पहचान और व्याख्या है जो राजनीतिक कार्यों तथा उनके संस्थागत प्रकाशन को प्रभावित करते हैं।” 2. एडवर्ड ए0 फ्रीमैन …

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शेयर बाजार के कार्य, क्रेता एवं विक्रेता शेयर बाजार में दो प्रकार के कार्य करते हैं

शेयर बाजार से आशय उस बाजार से है जहां नियमित कम्पनीयों के अंशपत्र, ऋणपत्र, प्रतिभूति, बाण्ड्स आदि का क्रय विक्रय होता है। शेयर बाजार एक संघ, संगठन या व्यक्तियों की संस्था है जो प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय या लेनदेन के उद्देश्य हेतु सहायक नियमन व नियंत्रण के लिए स्थापित किया जाता है फिर चाहे वह निर्गमीत हो …

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कार्य संतुष्टि क्या है ? कार्य संतुष्टि को प्रभावित करने वाले घटक अथवा तत्त्व

कार्यसंतोष से आशय व्यक्ति की अपने कार्य एवं कार्य से सम्बन्धित परिस्थितियों सम्बन्धी विभिन्न अभिवृत्तियों के परिणाम से लिया जाता है। वास्तव में कार्य संतोष शब्द का उपयोग व्यावहारिक विज्ञान उन्मुख शोधकर्त्ता व्यक्ति की कार्य सम्बन्धी मानसिक वृत्ति एवं कार्य निष्पादन के सम्बन्ध को स्थापित करने के रूप में करते है। व्यक्ति अपने कार्य एवं परिस्थितियों …

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लेखा परीक्षण क्या है लेखा परीक्षण की कुछ विशिष्टताओं का वर्णन?

शब्द “लेखा-परीक्षण” लैटिन भाषा के शब्द Audire से नि:सृत हुआ है। पहले लेखा मंडलियां लेखा परीक्षक के सम्मुख प्रस्तुत होकर लेखे का वृत्तांत सुनाती थीं। सभ्यता के प्रारंभिक चरणों में लेखा विधियां इतनी अशिष्ट होती थी और रिकार्ड करने वाले सौदों की संख्या इतनी थोड़ी होती थी कि हर व्यक्ति अपने सौदों की जांच स्वयं ही …

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लोक उपक्रम समिति क्या है लोक उपक्रम समिति इन पक्षों में अपना दखल नहीं दे सकती

संसद की तीन प्रमुख समितियों में से लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) एक है। यह समिति 1 मई, 1964 को अस्तित्व में आई। इस समिति में 22 सदस्य होते हैं जिसमें से 15 लोकसभा से तथा 7 सदस्य राज्य सभा के होते हैं। इस समिति के अन्य सदस्यों का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार …

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