मंत्रणा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं महत्व

मंत्रणा एक मनोवैज्ञानिक पहलू है। मंत्रणा को बिना संस्था के माध्यम से भी सम्पन्न किया जा सकता है। इसके लिए रिलीफ फन्ड्स, फॉस्टर होम या होम मेकर की आवश्यकता नहीं होती है। मंत्रणा के अन्तर्गत सेवाथ्री को को ठोस सेवा न प्रदान करके केवल मार्गदर्शन करने का प्रयत्न किया जाता है। परन्तु वैयक्तिक सेवा कार्य में …

Read more

सामाजिक परिवर्तन का अर्थ, परिभाषा तथा विशेषताएँ

सामाजिक परिवर्तन प्रकृति का नियम है, अथवा सामाजिक परिवर्तन भी प्राकृतिक या स्वाभाविक है। ऐसे किसी भी समाज की कल्पना नहीं की जा सकती जो की पूर्णतया अपरिवर्तनशील व स्थिर हो। यदि समाज की व्यवस्था में कोई परिवर्तन या हेर फेर हो जाता है तो उस बदलाव को सामाजिक परिवर्तन कहेंगे। परिवर्तन एक व्यापक प्रक्रिया है। …

Read more

समाजवाद का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं, गुण/दोष

आधुनिक आर्थिक प्रणाली का एक अन्य प्रमुख प्रकार समाजवाद है। समाजवाद का जन्म पूँजीवाद एवं व्यक्तिगत संपत्ति की बुराइयों के विरोध में हुआ। स समाजवाद में व्यक्ति एवं वैयक्तिक स्वार्थ की अपेक्षा समाज और सामूहिक हित को अधिक महत्व दिया जाता है। समाजवाद का अर्थ समाजवाद अंग्रेजी भाषा के सोशलिज्म (socialism) शब्द का हिन्दी पर्यायवाची है। सोशलिज्म …

Read more

समाज का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं प्रमुख तत्व

समाज (Society) एक उद्देश्यपूर्ण समूह होता है, जो किसी एक क्षेत्र में बनता है, उसके सदस्य एकत्व एवं अपनत्व में बंधे होते हैं। मनुष्य चिन्तनशील प्राणी है। मनुष्य ने अपने लम्बे इतिहास में एक संगठन का निर्माण किया है। वह ज्यों-ज्यों मस्तिष्क जैसी अमूल्य शक्ति का प्रयोग करता गया, उसकी जीवन पद्धति बदलती गयी और जीवन पद्धतियों …

Read more

जाति की उत्पत्ति के सिद्धांत

भारत में जाति की उत्पत्ति के विषय में अनेक सिद्धान्त प्रतिपादित किए गए हैं लेकिन कोई भी सिद्धान्त सही व्याख्या नहीं करता। रिज़ले ने जाति की उत्पत्ति प्रजातीय भिन्नताओं (racial differences) के कारण बताई, नेसफील्ड तथा इबेट्सन ने पेशे को इसका कारण बताया, अबे डुबॉयस ने ब्राह्मणों की भूमिका को इसका कारण बताया, और हट्टन ने …

Read more

सम्प्रदाय का अर्थ और सम्प्रदाय का स्वरूप

सम्प्रदाय का अर्थ सम्प्रदाय शब्द का कोशगत अर्थ है- “ परम्परा से चला आया हुआ ज्ञान, मत सिद्धान्त, गुरु परम्परा से मिलने वाला उपदेश, मंत्र, किसी धर्म के अन्तर्गत कोई विशिष्ट मत या सिद्धान्त। उक्त प्रकार के मत व सिद्धान्त को मानने वालों का वर्ग या समूह यथा शैव, वैष्णव आदि किसी विचार, विषय या सिद्धांत …

Read more

जनमत किसे कहते हैं? जनमत निर्माण के लिए क्या आवश्यक है?

किसी भी राष्ट्र या राज्य की सरकार शासन जब भी कोई कार्यक्रम बनाती है उसका उद्देश्य जन-जन का कल्याण होता है। उस कार्यक्रम का प्रभाव जन पर क्या पड़ेगा, कैसा पडे़गा इसकी जानकारी भी लेना योजना बनाने वालों के लिए आवश्यक होता है जनता पर हुए प्रभावों और प्रतिक्रियाओं को जानना ही ‘जनमत’ एकत्रित करना कहलाता …

Read more

संप्रेषण क्या है उसके कितने प्रकार हैं?

संप्रेषण के लिए अंग्रेजी भाषा में Communication शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसकी उत्पत्ति लैटिन शब्द Communis शब्द से हुई है, जिसका अर्थ-किसी विचार या तथ्य सूचनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक इस प्रकार पहुँचाना कि वह उसे जान एवं समझ सकें। संप्रेषण एक ऐसी कला है, जिसके अंतर्गत विचारों, सूचनाओं, संदेशों एवं …

Read more

डॉ. भीमराव अम्बेडकर के राजनीतिक विचार

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को महूँ (मध्य प्रदेश) में हुआ था। वे महार जाति के सदस्य थे। उनके परिवार का सैन्य-सेवा से संबंध था। उनके पिता का नाम रामजी सकपाल तथा माता का भीमाबाई था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं सन्तान थे। भीम चौदहवां बालक था जिन्हें भीवा भी पुकारा जाता था। रामजी सकपाल फौज …

Read more

विस्मरण का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत, कारण एवं निवारण के उपाय

विस्मरण से तात्पर्य स्मरण की विफलता से है जब व्यक्ति अपने भूतकाल के अनुभवों को चेतन में लाने में असफल हो जाता है, तब उसे विस्मरण कहते हैं। जिस प्रकार से जीवन को उपयोगी तथा सुखी बनाने के लिए स्मृति आवश्यक है, उसी प्रकार हमारे जीवन में विस्मृति की भी उपयोगिता तथा महत्व है। मानसिक स्वास्थ्य …

Read more