राजकोषीय नीति का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, उपकरण, सीमाएँ

राजकोषीय नीति वह नीति हैं जिसमें सरकार अपने आय, व्यय, और ऋण व्यवस्था का उपयोग आर्थिक विकास, आर्थिक समानता, तथा पूर्ण रोजगार प्राप्त करने के लिए करती हैं। राजकोषीय नीति का अर्थ राजकोषीय नीति सरकार की आय, व्यय तथा ऋण से सम्बन्धित नीतियों से लगाया जाता है। अर्थव्यवस्था में सर्वोच्च उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए राजकोषीय …

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मौद्रिक नीति का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं उपकरण – Monetary policy in hindi

मौद्रिक नीति (Monetary policy) सरकार एवं केन्द्रीय बैंक द्वारा सोच समझकर उपयोग में लायी गई मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि या कमी लाने की शक्ति है। यह शक्ति सरकार की आर्थिक नीति के उद्देश्यों की विस्तृत रूपरेखा को ध्यान में रखकर निवेश, आय व रोजगार को प्रभावित करने और कीमतों में स्थिरता लाने के लिये प्रयोग …

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औद्योगिक नीति का अर्थ, महत्व एवं औद्योगिक नीति का विकास

औद्योगिक नीति से तात्पर्य देश के औद्योगीकरण हेतु प्रस्तुत की गयी स्पष्ट तथा सुव्यवस्थित व्यूह रचना से हैं जो देश के भावी औद्योगिक विकास के स्वरूप की रूपरेखा प्रस्तुत करता हैं तथा उस स्वरूप की स्थापना करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी प्रस्तुत किये जाते हैं। औद्योगिक नीति के मुख्यताः दो भाग होते हैं प्रथम …

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आर्थिक नियोजन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य और आवश्यकता

आर्थिक नियोजन का अर्थ एक संगठित आर्थिक प्रयास से है जिसमें एक निश्चित अवधि में सुनिश्चित एवं सुपरिभाषित सामाजिक एवं आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आर्थिक साधनों का विवेकपूर्ण ढंग से समन्वय एवं नियंत्रण किया जाता है।  आर्थिक नियोजन की परिभाषा आर्थिक नियोजन की परिभाषा आर्थिक नियोजन की विद्वानों द्वारा परिभाषाएँ दी गई हैं- डॉ0 …

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व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ एवं परिभाषा, पक्ष तथा विपक्ष में तर्क

आधुनिक काल में नागरिकों के जीवन और समाज पर व्यावसायिक कार्यकलापों का विभिन्न रूप से बहुत बड़ा प्रभाव होता है। पूर्व-आधुनिक काल में व्यवसायी वर्ग के लिए व्यवसाय के ‘सामाजिक’ मूल्य के संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती थी क्योंकि उस समय आशा की जाती थी कि बाजार की शक्तियाँ मूल्य व्यवस्था को स्वयं …

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आर्थिक प्रणाली का अर्थ, परिभाषा, मूल तत्व, कार्य एवं प्रकार

आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है। यदि …

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व्यावसायिक पर्यावरण के प्रकार – Business Environment

व्यावसायिक पर्यावरण मुख्य रूप से आन्तरिक एवं बाह्य पर्यावरण के योग से बनता है। आन्तरिक पर्यावरण के घटक है जो एक फर्म के नियंत्रण में होते हैं। इस प्रकार के घटक फर्म के संसाधनों, नीतियों एवं उद्देश्यों से सम्बन्धित होते हैं। लेकिन जब हम व्यावसायिक पर्यावरण के उन घटकों की बात करते हैं जो गतिशील एवं …

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शून्य आधारित बजट क्या होता है?/What Is Zero-Based Budgeting

शून्य आधार बजट ऐसी नियोजन एवं बजट प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया जाता …

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मानव संसाधन लेखांकन अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, उद्देश्य, लाभ या महत्व

मानव संसाधन लेखांकन को एक ऐसी लेखांकन पद्धति के रूप में माना जा सकता है, जिसके प्रयोग से मानव संसाधनों को सम्पत्ति के रूप में मान्यता प्रदान की जाती हो और अन्य भौतिक साधनों की भांति जिनके मूल्य को माप कर लेखा पुस्तकों में दर्ज किया जाता हो। इसके माध्यम से मानव संसाधनों के सम्बन्ध में …

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प्रमाप लागत विधि क्या है प्रमाप लागत विधि के उद्देश्य ?

प्रमाप लागत नियंत्रण की वह विधि है जिसमें भविष्य में किये जाने वाले उत्पादन के प्रमाप लक्ष्य, पहले से ही पूर्व निर्धारित कर लिए जाते हैं। इसके बाद वास्तविक लागत के कई साधनों (सामग्री, श्रम तथा विचरण) की तुलना प्रमाप लागत (पूर्व निर्धारित लागत) से की जाती है व दोनों के विचरणों या अन्तरों का पता …

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