स्कन्ध प्रबंध (Inventory Management) क्या है ?

स्कन्ध का आशय स्कन्ध के भौतिक सत्यापन से होता है जिसमें गणना प्रधान क्रिया मानी जाती है। परन्तु आजकल इसका अर्थ व्यापक रूप से लगाया जाता है। स्कन्ध में विभिन्न वस्तुओं की रखी गयी मात्रा से होता है अर्थात यदि तैयार माल का स्कन्ध उचित है तो ग्राहकों की सेवा उचित ढंग से की जा सकेगी। …

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कार्यशील पूंजी का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं स्रोत

कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यकता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी भी संगठन में एक …

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अल्पकालीन वित्त के स्रोत/short term sources of finance

किसी भी संगठन में वित्त के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके आधार पर एक संगठन अथवा संस्था का जन्म होता है। दीर्घकालीन, मध्यकालीन एवं अल्पकालीन वित्त के साधन संगठन के जीवन क्रम में अपरिहार्य है। प्रस्तुत इकाई में इनकी क्रमानुसार व्याख्या की गई है जो एक कम्पनी के जीवन चक्र को निश्चित करते हैं …

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पूंजी संरचना का अर्थ, परिभाषा एवं सिद्धांत

किसी व्यावसायिक उपक्रम की कुल दीर्घकालीन पूंजी में पूंजी प्राप्ति के विभिन्न स्रोतों अर्थात स्वामिगत पूंजी एवं ऋणगत पूंजी के अनुपात का उचित संयोजन ही पूंजी संरचना कहलाता है। पूंजी संरचना का अर्थ पूंजी संरचना से अभिप्राय स्वामिगत तथा ग्रहीत निधि उधार कोषों के मिश्रण से है। एक अनुकूल पूंजी संरचना वह होती है जिसमें ऋण …

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पूंजी बजटन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ

पूंजी बजटन का आशय के विभिन्न स्रोतों से पूंजी प्राप्त करने के लिए बजट बनाने से नहीं है, बल्कि यह एक विनियोजन निर्णय है। इसलिए कि पूंजी बजटन पूंजी के दीर्घकालीन नियोजन से सम्बन्धित एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत पूंजीगत विनियोग की भावी लाभोत्पादकता का अध्ययन करना, उसकी पूंजी लागत की गणना करके अर्जन और लागत …

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पूंजी लागत का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, वर्गीकरण

पूंजी की लागत एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे अनेक अर्थो में प्रयुक्त किया जाता है। पूंजी प्रदाता या विनियोक्ता के दृष्टिकोण से यह उस त्याग का पुरस्कार है जिसको वह वर्तमान उपभोग को स्थगित करके भविष्य में विनियोग के बदले प्राप्त करने की इच्छा रखता है। उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण से पूंजी की लागत पूंजी का उपभोग …

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वित्तीय पूर्वानुमान क्या है वित्तीय पूर्वानुमान की विशेषताएं?

वित्त की उपादेयता निर्विवाद है, भावी वित्तीय आवश्यकताओं का पूर्वानुमान वित्तीय पूर्वानुमान कहलाता है। वित्तीय पूर्वानुमान एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत कोष प्रवाह विवरणों, भूतकालीन लेखों, वित्तीय अनुपातों इत्यादि के आधार पर भावी वित्तीय दषाओं का निरूपण किया जाता है। इसके अन्र्तगत सम्भाव्य रोकड़ अन्तर्वाहों (Inflows) तथा रोकड़ बहिर्वाहों (Outflows) का आंकलन किया जाता है। वास्तविक …

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वित्तीय प्रबंधन क्या है financial management kya hai

मनुष्य द्वारा अपने जीवन काल में प्राय: दो प्रकार की क्रियाएं सम्पादित की जाती है आर्थिक क्रियाएं  अनार्थिक क्रियाएं । 1. आर्थिक क्रियाओं के अन्र्तगत हम उन समस्त क्रियाओं को सम्मिलित करते हैं जिनमें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से धन की संलग्नता होती है जैसे रोटी, कपड़े, मकान की व्यवस्था आदि। 2. अनार्थिक क्रियाओं के अन्तर्गत …

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प्रबंध के सिद्धांत (हेनरी फेयोल के प्रबंध के सिद्धांत)

आज कल व्यवसाय का स्वरूप बडा हो गया है जिसके कारण प्रबंधक के सामने अनेक समस्यायें उत्पन्न हो रही है इसलिए इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रबंधक केा मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है प्रबंध के सिद्धांत प्रबंधक को मार्गदर्शन प्रदान करते है और उसको व्यवसाय के संचालन में सहायता प्रदान करते है। इसके लिए फ्रान्स के प्रसिद्ध …

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प्रबंध का अर्थ, परिभाषा, विशेषता, महत्व, उद्देश्य, कार्य

अन्य लोगों से कार्य कराने की कला को प्रबंध कहा जाता है। यह निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से एवं दक्षतापूर्ण प्राप्त करने के लिए किये गए कार्यों की प्रक्रिया है। अत: प्रबंध को प्रभावशीलता एवं कार्यक्षमता से लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु कार्य कराने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।  प्रबंध की विशेषताएं …

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