प्रतिस्पर्धा का अर्थ, परिभाषा

1.बोगार्डस, र्इ0 एस0 : प्रतिस्पर्धा किसी वस्तु को प्रापत करने की प्रतियोगिता को कहते हैं जो कि इतनी मात्रा मे कहीं नहीं पार्इ जाती जिससे मांग की पूर्ति हो सके। 2. फिचर, जे0 एच0 : प्रतिस्पर्धा एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें दो या दो अधिक व्यक्ति अथवा समूह समान उद्देश्य प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। …

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सहयोग का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं महत्व

सहयोग चेतन अवस्था है जिसमें संगठित एवं सामूहिक प्रयत्न किये जाते हैं क्योंकि समान उद्देश्य होता है सभी की सहभागिता होती है, क्रियाओं एवं विचारों का आदान-प्रदान होता है। अन्त:क्रिया सकारात्मक होती है तथा सहायता करने की प्रवृत्ति पायी जाती है। सहयोग में भाग लेने वाले व्यक्ति उत्तरदायित्व पूरा करते हैं। परन्तु उसके निश्चित प्रतिमान होते …

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सामाजिक निदान का अर्थ

निदान के सम्बन्ध में सभी निदानात्मक सम्प्रदाय के विचारकों ने अपने-अपने मत प्रस्तुत किये हैं। परन्तु उन सभी मतों और विचारों का मूल अर्थ लगभग समान है। यहाँ पर हम कुछ विद्वानों की परिभाषाओं एवं विचारों का उल्लेख निदान शब्द को स्पष्ट करने के लिए कर रहे है। रिचमण्ड, मेरी, सामाजिक निदान, जहाँ तक सम्भव हो …

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अनुसूची का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

अनुसूची प्राथमिक तथ्य संकलन की एक ऐसी विधि है जिसमें अवलोकन, साक्षात्कार तथा प्रश्नावली इन तीनों की ही विशेषताएं एवं गुण एक साथ पाये जाते हैं। इसके द्वारा उन क्षेत्र के सूचनादाताओं से भी सूचना प्राप्त की जाती है जो कि पढ़े-लिखे नहीं हैं। यह एक प्रत्यक्ष विधि है जिसमें साक्षात्कारकर्ता उत्तरदाता के साथ आमने-सामने प्रश्न पूछकर …

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अवलोकन का अर्थ, प्रकार एवं विशेषताएं

अवलोकन का अर्थ अवलोकन शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘Observation’ का पर्यायवाची है। जिसका अर्थ ‘देखना, प्रेक्षण, निरीक्षण, अर्थात् कार्य-कारण एवं पारस्पारिक सम्बन्धों को जानने के लिये स्वाभाविक रूप से घटित होने वाली घटनाओं का सूक्ष्म निरीक्षण है। प्रो0 गडे एवं हॅाट के अनुसार विज्ञान निरीक्षण से प्रारम्भ होता है और फिर सत्यापन के लिए अन्तिम …

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शोध प्रारूप का अर्थ, प्रकार एवं महत्व

प्रस्तावित सामाजिक शोध की विस्तृत कार्य योजना अथवा शोधकार्य प्रारम्भ करने के पूर्वसम्पूर्ण शोध प्रक्रियाओं की एक स्पष्ट संरचना ‘शोध प्रारूप’ या ‘शोध अभिकल्प’ के रूप में जानी जाती है। शोध प्रारूप के सम्बन्ध में यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह शोध का कोर्इ चरण नहीं है क्योंकि शोध के जो निर्धारित या मान्य चरण हैं, …

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सामाजिक अनुसंधान के प्रकार

अन्वेषणात्मक सामाजिक अनुसंधान  जब किसी समस्या के सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पक्ष की पर्याप्त जानकारी नहीं होती तथा अनुसन्धानकर्ता का उददेश्य किसी विशेष सामाजिक घटना के लिए उत्तरदायी कारणों को खोज निकालना होता है। तब अध्ययन के लिए जिस अनुसंधान का सम्बन्ध प्राथकमिक अनुसन्धान से है। जिसके अन्र्तगत समस्या के विषय में प्राथमिक जानकारी प्राप्त करके भावी …

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सामाजिक शोध का अर्थ, उद्देश्य एवं चरण

सामाजिक शोध के अर्थ को समझने के पूर्व हमें शोध के अर्थ को समझना आवश्यक है। मनुष्य स्वभावत: एक जिज्ञाशील प्राणी है। अपनी जिज्ञाशील प्रकृति के कारण वह समाज वह प्रकृति में घटित विभिन्न घटनाओं के सम्बन्ध में विविध प्रश्नों को खड़ा करता है। और स्वयं उन प्रश्नों के उत्तर ढूढने का प्रयत्न भी करता है। …

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श्री बगलामुखी स्तोत्रं

विनियोग:- ॐ अस्य श्री बगलामुखी-स्तोत्रस्य भगवान नारद ऋषिः, बगलामुखी देवता, मम सन्निहितानामादुष्टानां विरोधिनाम वंग मुख- पद-जिव्हा बुद्धिना स्तंभनार्थे श्री बगलामुखी प्रसाद सिध्यर्थे पत्थे विनियोगः कर – न्यास:ॐ ह्लीं अंगुष्ठाभ्यं नमः.ॐ बगलामुखी तर्जनीभ्यां नमः.ॐ सर्व दुष्टानां मध्यमाभ्यां वषट्.ॐ वाचां मुखं पदं स्तम्भय अनामिकाभ्यां हूंॐ जिव्हां कीलय कनिष्ठिकाभ्यां वौषट.ॐ बुद्धिम विनाशय ह्लीं ॐ स्वः करतल कर पृष्ठाभ्यां नमः हृदयादि-न्यास: …

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संप्रत्यात्मक विकास क्या है ?

सभी प्रकार के सीखने का आधार प्रत्यय है। शैशवावस्था से वृद्धावस्था तक मनुष्य अनेक नए प्रत्ययों का निर्माण करता है तथा प्रतिदिन के जीवन में पुराने निर्मित प्रत्ययों का प्रयोग करता है। व्यक्ति स्वयं आयु, अनुभव व बुद्धि के आधार पर प्रत्यय निर्माण के अलग-अलग स्तर पर होते है। उदाहरणार्थ – एक चार साल के बच्चे …

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