मुद्रा की परिभाषा

विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा को अलग-अलग दृिष्टकोण से परिभाषित किया है विभिन्न दृिष्टकोणों को वर्गीकृत किया सकता है। सामान्य स्वीकृत के अनुसार परिभाषाएं इस वर्ग की परिभाषाएं मुद्रा के सर्वग्राहयता के गुण पर बल देती है। प्रो माशर्ल -’’मुद्रा के अन्तर्गत ये समस्त वस्तएुं सम्मिलित की जाती है जो किसी समय अथवा किसी स्थान में बिना …

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पूर्ति तथा पूर्ति का नियम

पूर्ति शब्द का अर्थ किसी वस्तु की उस मात्रा से लगाया जाता है, जिसे कोर्इ विक्रेता ‘एक निश्चित समय’ तथा ‘एक निश्चित कीमत’ पर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाये कि बाजार में गेहू की पूर्ति 1,000 क्विटंल की है, तो यह कथन उचित नहीं है, क्योकि …

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भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

1. कृषि पर निर्भरता :- भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। कृषि का कुल राष्ट्रीय आय में 30 प्रतिशत का योगदान है। विकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान 2से 4 प्रतिशत है। वर्षा कृषि के लिये जल का प्रमुख स्त्रोत है। अधिकांश क्षेत्रों में पुरानी तकनीक से कृषि की जाती है। …

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आर्थिक वृद्धि और विकास

आर्थिक वृद्धि किसी अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पादित वस्तुओं सेवाओं की कुल मात्रा में वृद्धि करना आर्थिक वृद्धि कहलाता है । यह वृद्धि निरतंर व दीर्घकाल तक जारी रहनी चाहिये । यदि आकस्मिक रूप से वस्तुओं और सेंवाओं की मात्रा में हुर्इ वृद्धि आर्थिक वृद्धि नहीें कहलायेगी । जैसे एक साल सभी परिस्थितियों के अनुकूल रहने पर कृषि …

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अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं?

प्रत्येक अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपने देश में उपलब्ध सीमित साधनों के प्रयोग से मानव की असीमित आवश्यकताओं की संतुष्टि है। मनुष्य की आवश्यकताएं वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से संभव है। उत्पादन के पश्चात् जिसे व्यक्ति उपभोग करता है। उत्पादन के साधन आर्थिक गतिविधियों द्वारा उत्पादन की प्रक्रिया पूर्ण करते है। आर्थिक गतिविधियों के माध्यम …

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कांच के प्रकार

बाजार में काँच के अनेक प्रकार उपलब्ध है। इसके साधारण खिड़की के शीशे से लेकर गोली रोधी कांच के रूप में, विभिन्न अनुप्रयोग होते है। कुछ प्रकार के काँच और उनका उपयोग नीचे वर्णित किया गया है। सोडा काँच या मुलायम काँच –  यह साधारणतया प्रयोग होने वाला सस्ता, निम्न वर्ग का काँच होता है। कुल …

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बहुलक का वर्गीकरण

उत्पति के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण – प्राकृतिक बहुलक – प्रकृति (पादप और जीवों) से प्राप्त बहुलक प्राकृतिक बहुलक होते हैं उदाहरणार्थ, स्टार्थ, सेल्यूलोज, प्राकृतिक रबर, प्रोटीन आदि। संश्लेषित बहुलक – प्रयोगशाला में विरचित किए गए बहुलक संश्लेषित बहुलक कहलाते है।यह मानव – निर्मित बहुलक भी कहलाते हैं उदाहरणार्थ, पॉलीथीन, पी.वी.सी., नायलॉन, टेफ्लॉन, बेकेलाइट, टेरिलीन, संष्लेशित रबर …

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वायु प्रदूषण के प्रभाव एवं स्रोत

वायुमडंल में विशाल गैसे एक निश्चित मात्रा और अनुपात में होती है, जब वायु के अवयवों में अवांछित तत्व प्रवेश कर जाते है तो उसका मौलिक सतुंलन बिगड जाता है। इसका प्रभाव विभिन्न जीव-जन्तुओं, पडे – पौधे मौसम व जलवायु तथा स्वयं मानव पर स्पष्ट: परिलक्षित हे रहा है वायु पद्रूषण के प्रभावों को दो वर्गो …

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ईथर बनाने की विधि

विलियमसन संश्लेषण-  इस विधि में एल्किल हैलाइड के हैलीजेन परमाणु का ऐल्कॉक्सी समूह द्वारा प्रतिस्थापन कराने पर र्इथर बनते हैं। एल्किल हैलाइड की अभिक्रिया ऐल्कोहॉल या फीनॉल के सोडियम या पौटेिशयम लवण से करायी जाती है। ऐल्कोहॉलो के निर्जलीकरण से –  ऐल्कोहॉलो को सांद्र H2SO4 के साथ उचित ताप पर गर्म करने पर जल अणु निकल …

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कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण

कार्बनिक यौगिकों को तीन वर्गों में विभाजित किया जाता हैं : एलिफैटिक या विवृत श्रृंखला कार्बोसाइक्लिक या समचक्रिय विषम चक्रिय एलिफैटिक या विवृत श्रृंखला –  इस वर्ग के अन्र्तगत यौगिकों में खुली संरचना पायी जाती है जिनमें कार्बन परमाणु परस्पर सीधी श्रृंखला में जुडे रहते है। एलिपैटिक हाइड्रोकार्बन के अन्र्तगत संतृप्त, असंतृप्त और उनके व्युत्पन्न आते है। …

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