ऊतक की रचना एवं क्रिया

समान स्वरूप एवं समान कार्य वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते है। कुछ ऊतक विशेष स्थानों पर पाए जाते हैं और कुछ सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहते है। ऊतकों के समूह मिलकर शरीर के अंगों का निर्माण करते है। उतकों के प्रमुख प्रकार है – उपकलीय तन्त्र ऊतक – यह शरीर के भीतरी और बाहरी …

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निरोगी व्यक्ति के लक्षण

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मानव शरीर के सभी तंत्रों का सुव्यवस्थित रुप में अपने कार्यों को करना एक शारीरिक निरोगी व्यक्ति के लक्षण है अर्थात वह व्यक्ति जिसके शरीर के सभी तंत्र अपने कार्यों को भलि भांति सम्पादित कर रहे हैं, एक शारीरिक निरोगी व्यक्ति है। इसके साथ- साथ कुछ निम्न लिखित लक्षणों को भी …

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रोगी व्यक्ति के लक्षण

एक रोगी व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर अपने सामान्य कार्यों को भली- भांति नही कर पाता है अर्थात उस व्यक्ति के शारीरिक कार्य जैसे भोजन का पाचन, श्वसन, उत्र्सजन व रक्त परिभ्रमण आदि कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। मानसिक स्तर पर उसे निरसता, उदासी, तनाव, क्रोध, र्इष्या, घबराहट एवं बैचेनी आदि उद्वेगों की अनुभूति …

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किशोरावस्था में मानसिक विकास

किशोरावस्था बचपन एवं वयस्कावस्था के बीच की अतिमहत्वपूर्ण अवस्था होती है, एवं प्रत्येक व्यक्ति को इस अवस्था से गुजरना पड़ता है। संज्ञानात्मक विकास के पियाजे द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त की चतुर्थ अवस्था से यह ज्ञात होता है कि किशोरावस्था में किशारों में तर्कपूर्ण विचार करने की क्षमता विकसित हो जाती है। लेकिन किशोर द्वारा विचार करने की …

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बाल्यावस्था में मानसिक विकास

शैशवावस्था एवं बचपन में मानसिक  विकास मानसिक विकास को संज्ञानात्मक विकास के अध्ययन द्वारा भली प्रकार समझा जा सकता है। तकनीकी रूप में संज्ञानात्मक विकास ही मानसिक विकास है। संप्रत्यय निर्माण, सोचना, तर्क करना, याद रखना, विश्लेषण करना, निर्णय करना यह सब संज्ञानात्मक विकास की ही प्रक्रियाये हैं। इन प्रक्रियाओं को भली प्रकार समझने हेतु मनोवैज्ञानिकों …

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शारीरिक विकास : शैशवावस्था, बाल्यावस्था तथा किशोरावस्था

मानव जीवन के विकास का अध्ययन विकासात्मक मनोविज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है। विकासात्मक मनोविज्ञान मानव के पूरे जीवन भर होने वाले वर्धन, विकास एवं बदलावों का अध्ययन करता है। इसमें शैशवावस्था से लेकर वयस्कावस्था के अंतिम स्तर तक के विकास का अध्ययन सम्मिलित होता है। सारणी में इसे आयु के आधार पर क्रम से प्रदर्शित …

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मनोविज्ञान के अध्ययन की विधियाँ

अन्तर्निरीक्षण विधि-  अन्तर्निरीक्षण विधि को व्यक्ति के मनोविज्ञान के अध्ययन की प्रथम विधि के रूप में जाना जाता है। इस विधि के प्रतिपादक विलियम वुण्ट एवं उनके शिष्ट र्इ.बी. टिचनर कहे जाते हैं। विलियम वुण्ट मनोविज्ञान को ‘फादर ऑफ साइकोलाजी’ भी कहा जाता है क्योंकि विलियम वुण्ट ही वह प्रमुख अनुसंधानकर्ता हुए हैं जिन्होंने जर्मनी के …

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मनोविज्ञान की अवधारणा

शाब्दिक रूप में मनोविज्ञान दो पदों से मिलकर बना है, मन एवं विज्ञान । इस दृष्टि से यदि देखें तो वैज्ञानिक तरीकों से मन का अध्ययन ही मनोविज्ञान है। अर्थात् जिन तरीकों से, जिन विधियों से मन का अध्ययन किया जाना है वे वैज्ञानिक हों। यदि विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरने वाले तरीकों से मन …

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संतुलित आहार, परिभाषा, महत्व एवं घटक

संतुलित आहार की अवधारणा अथवा संतुलित आहार क्या है? संतुलित आहार वह भोजन है, जिसमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ ऐसी मात्रा व समानुपात में हों कि जिससे कैलोरी खनिज लवण, विटामिन व अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता समुचित रूप से पूरी हो सके। इसके साथ-साथ पोषक तत्वों का कुछ अतिरिक्त मात्रा में प्रावधान हो ताकि …

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आहार का पाचन

सर्वप्रथम भोजन को मुँह से चबाते है तत्पश्चात निगलते है भोजन अमाशय में नलीनुमा संरचना (ग्रासनली) द्वारा जाता है , फिर छोटी आंत एवं बडी आंत में पहुंचता है। मुख्य रूप से छोटी आंत में भोजन का पाचन होता है एवं शरीर के लिये उपयेागी सरल पोषक तत्त्वों को आहार से यकृत में प्रतिहारिणी शिरा द्वारा …

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