श्वसन तन्त्र की संरचना एवं कार्य

श्वास-प्रश्वास मनुष्य के जीवन का लक्षण है। मनुष्य भोजन के अभाव में कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है, जल के अभाव में कुछ घंटे बीता सकता है किन्तु श्वास-प्रश्वास अथवा वायु के अभाव में कुछ क्षणों में ही जीवन लीला पर प्रश्न चिºन स्थापित हो जाता है।शरीर विज्ञान के अनुसार यदि चार मिनट तक शरीर …

Read more

पाचन तंत्र के कार्य एवं प्रमुख अंग

व्यक्ति साधारण रूप में जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह वास्तव में भी तभी हमारे लिए उपयोगी होता है जब हम इस लायक हो जाये कि शरीर के अन्तर्गत रक्त कोशिकाओ एवं अन्य कोशिकाओं तक पहुॅच कर शक्ति व ऊर्जा उत्पन्न कर सके। यह कार्य पाचन प्रणाली के विभिन्न अंग मिलकर करते हैं। पाचन …

Read more

हृदय की संरचना, कार्य, कोष्टक एवं कपाट

हृदय की संरचना हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार अन्दर से खोखला मांसल अंग होता है। यह शरीर के वक्ष भाग के वक्ष भाग में फेफडो के बीच स्थित होता है। हृदय ये ही रूधिर वाहिनियॉ रक्त को पूरे शरीर में ले जाती है। तथा फिर इसी से वापस लेकर आती है। सामान्यत: मनुष्य शरीर में रक्त …

Read more

रक्त परिसंचरण तंत्र क्या है ?

रक्त परिसंचरण तंत्र शरीर के भीतर जो एक लाल रंग का द्रव-पदार्थ भरा हुआ है, उसी को रक्त (Blood) कहते हैं। रक्त का एक नाम रुधिर भी है रुधिर को जीवन का रस भी कहा जा सकता है। यह संपूर्ण शरीर में निरन्तर भ्रमण करता तथा अंग-प्रत्यंग को पुष्टि प्रदान करता रहता है। जब तक शरीर …

Read more

पेशी तंत्र के कार्य, प्रकार एवं शरीर की मुख्य पेशियाँ

अनेकों कोशिकाओं एवं उनके समूह ऊतकों द्वारा ही शरीर के विभिन्न अंगों का निर्माण होता है। इन्हीं कोशिकाओं से ही मांसपेशी की उत्पत्ति होती है। मांसपेशी के प्रत्येक तन्तु में अनेक कोशिकाएं होती है। मनुष्य शरीर का अधिकांश वाह्य व आन्तरिक भाग मांसपेशियेां से ढका रहता है। शरीर का ऊपरी हिस्सा पूर्ण रूपेण मांसाच्छादित होने के …

Read more

अस्थियों की रचना, कार्य, प्रकार एवं अस्थियों की संख्या

अस्थि संस्थान का एक परिचय  मानव शरीर का आधारभूत ढाँचा अस्थियों से बना है। शरीर की स्थिरता, आकार, आदि का मूल कारण अस्थियाँ ही है। मूल रूप से अस्थियाँ नियमित रूप से बढ़ने वाली, अपने आकार को नियमिति करने वाली अपने अन्दर होने वाली किसी भी प्रकार की टूट – फूट को ठीक करने में सक्षम है। मनुष्य …

Read more

ऊतक की रचना एवं क्रिया

समान स्वरूप एवं समान कार्य वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते है। कुछ ऊतक विशेष स्थानों पर पाए जाते हैं और कुछ सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहते है। ऊतकों के समूह मिलकर शरीर के अंगों का निर्माण करते है। उतकों के प्रमुख प्रकार है – उपकलीय तन्त्र ऊतक – यह शरीर के भीतरी और बाहरी …

Read more

निरोगी व्यक्ति के लक्षण

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मानव शरीर के सभी तंत्रों का सुव्यवस्थित रुप में अपने कार्यों को करना एक शारीरिक निरोगी व्यक्ति के लक्षण है अर्थात वह व्यक्ति जिसके शरीर के सभी तंत्र अपने कार्यों को भलि भांति सम्पादित कर रहे हैं, एक शारीरिक निरोगी व्यक्ति है। इसके साथ- साथ कुछ निम्न लिखित लक्षणों को भी …

Read more

रोगी व्यक्ति के लक्षण

एक रोगी व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर अपने सामान्य कार्यों को भली- भांति नही कर पाता है अर्थात उस व्यक्ति के शारीरिक कार्य जैसे भोजन का पाचन, श्वसन, उत्र्सजन व रक्त परिभ्रमण आदि कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। मानसिक स्तर पर उसे निरसता, उदासी, तनाव, क्रोध, र्इष्या, घबराहट एवं बैचेनी आदि उद्वेगों की अनुभूति …

Read more

किशोरावस्था में मानसिक विकास

किशोरावस्था बचपन एवं वयस्कावस्था के बीच की अतिमहत्वपूर्ण अवस्था होती है, एवं प्रत्येक व्यक्ति को इस अवस्था से गुजरना पड़ता है। संज्ञानात्मक विकास के पियाजे द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त की चतुर्थ अवस्था से यह ज्ञात होता है कि किशोरावस्था में किशारों में तर्कपूर्ण विचार करने की क्षमता विकसित हो जाती है। लेकिन किशोर द्वारा विचार करने की …

Read more