महारानी विक्टोरिया की घोषणा तथा 1858 का अधिनियम

1 नवम्बर, 1858 र्इ0 को ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की जिसे भारत के प्रत्येक शहर में पढ़कर सुनाया गयां इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने उन मुख्य सिद्धान्तों का विवरण दिया जिसके आधार पर भारत का भविष्य का शासन निर्भर करता था। इस घोषणा का कोर्इ कानूनी आधार न था क्योंकि इसे ब्रिटिश …

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रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था  यह व्यवस्था 1792 र्इ. में मद्रास पे्रसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गर्इ। थॉमस मुनरो 1820 र्इ. से 1827 र्इ. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 र्इ. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानो) …

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स्थायी बंदोबस्त क्या है ?

ब्रिटिश कंपनी (र्इस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 र्इ. में इस्तमरारी (स्थायी) बन्दोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गर्इ राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता था। यदि जमींदार राजस्व …

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1857 का विद्रोह : स्वरूप, कारण एवं परिणाम

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भारतीयों द्वारा स्वत्रतंता प्राप्ति के लिए किये गये संग्राम का इतिहास है। यह संग्राम ब्रिटिश सत्ता की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए भारतीयों द्वारा संचालित एवं संगठित आंदोलन है। विद्रोह का स्वरूप भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम 1857 र्इ. में ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध भारतीयों द्वारा पहली बार संगठित एवं हथियार बंद …

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लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति

1848 र्इ. से 1856 र्इ. का काल ब्रिटिश कालीन भारत के इतिहास में अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इस काल में लॉर्ड डलहौजी भारत का गवर्नर जनरल रहा। वह बहुत ही सक्रिय प्रशासक था, उसने युद्धों और कूटनीतियों से भारतीय राज्यों पर अधिकार करके भारत में ब्रिटिश कंपनी के साम्राज्य का विस्तार किया। डलहौजी साम्राज्यवादी विचारों …

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आंग्ल-बर्मा सम्बन्ध

बर्मा में कंपनी की प्रारंभिक गतिविधियाँ भारत के पूर्व में बर्मा देश है जिसे म्यान्मार भी कहा जाता है। भारतीय साम्राज्य की रक्षा के लिए स्वाभाविक था कि कांग्रेस पूर्वी सीमा की भी रक्षा करे। मुगल सम्राटों ने आसाम के कुछ भागों को जीतकर अपने साम्राज्य में शामिल किया था। बंगाल पर अधिकार करने के बाद …

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मराठों का पतन

मराठों के पतन के कारण  1. एकता का अभाव-  मराठों में एकता का सर्वदा से अभाव था। सामतं प्रथा के कारण मराठा साम्राज्य कर्इ छोटे-बड़ े राज्यों में विभाजित था। पेशवा माधवराव के बाद केंद्रीय सत्ता शिथिल हो गयी थी और एकता का अभाव हो गया था। मराठा सामंतों और शासकों में पारस्परिक आंतरिक कलह, र्इश्र्या और …

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त्वचा की संरचना तथा कार्य

स्पर्शेन्द्रिय (Sense of touch) का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है, जबकि शरीर की अन्य समस्त ज्ञानेन्द्रियाँ स्थानीय होती हैं, तथा एक निश्चित क्षेत्र में कार्य करती हैं। स्पर्श के अतिरिक्त ताप, शीत, दाब, पीड़ा, वेदना, हल्का, भारी, सूखा, चिकना आदि संवेदनाओं का ज्ञान इसी के द्वारा होता है। समस्त शरीर की त्वचा में तन्त्रिका तन्तुओं के …

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नेत्र की संरचना एवं कार्य

आँखों या नेत्रों के द्वारा हमें वस्तु का ‘दुश्टिज्ञान’ होता है। दृष्टि वह संवेदन है, जिस पर मनुष्य सर्वाधिक निर्भर करता है। दृष्टि (Vision) एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश किरणों के प्रति संवेदिता, स्वरूप, दूरी, रंग आदि सभी का प्रत्यक्ष ज्ञान सन्निहित है। आँखें अत्यन्त जटिल ज्ञानेन्द्रियाँ हैं, जो दायीं-बायीं दोनों ओर एक-एक नेत्रकोटरीय गुहा …

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कान या कर्ण की संरचना एवं कार्य

कान या कर्ण शरीर का एक आवश्यक अंग है, जिसका कार्य सुनना (Hearing) एवं शरीर का सन्तुलन (Equilibrium) बनाये रखना है तथा इसी से ध्वनि (Sound) की संज्ञा का ज्ञान होता है। कान की रचना अत्यन्त जटिल होती है, अत: अध्ययन की दृष्टि से इसे  तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है- बाह्य कर्ण (External …

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