मौलिक अधिकार के प्रकार एवं विशेषताएं

भारत संविधान में सात मौलिक अधिकार वर्णित थे। यद्यपि वर्ष 1976 में 44वें संविधान संशोधन द्वारा मौलिक अधिकारों की सूची में से संपत्ति का अधिकार हटा दिया गया था। तब से यह एक कानूनी अधिकार बन गया है। अब कुल छ: मौलिक अधिकार है। समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 …

Read more

मानवतावाद क्या है ?

संसार की समस्त प्रगति का केन्द्र बिंदु मनुष्य है और मनुष्य के सर्वागिणं विकास में उसकी भौतिक प्रगति के साथ साथ उसकी नैतिक और आध्यात्मिक प्रगति अपेक्षित है। व्यक्ति मानव समूह का ही अंश है इसलिये व्यक्ति को कवे ल अपने लिये ही नही अपितु सम्पूर्ण समाज के कल्याण के लिये कार्य करना चाहिए। हमारे शासनो …

Read more

महापाषाण संस्कृति

दूसरी शताब्दी र्इसा पूर्व तक कावेरी नदी के मुहाने के आस-पास के क्षेत्र पर उन लोगों का अधिकार था जिन्हें मेगालिथि (महापाषाण) संस्कृति का निर्माता कहा जाता है । क्या आप जानते हैं कि मेगालिप (महापाषाण) क्या है ? मेगालिप दो शब्दों ‘मेगा’ और ‘लिप’ से मिलकर बना है । ‘मेगा’ का अर्थ है ‘बड़ा’ और …

Read more

पूर्ति तथा पूर्ति का नियम

पूर्ति शब्द का अर्थ किसी वस्तु की उस मात्रा से लगाया जाता है, जिसे कोर्इ विक्रेता ‘एक निश्चित समय’ तथा ‘एक निश्चित कीमत’ पर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाये कि बाजार में गेहू की पूर्ति 1,000 क्विटंल की है, तो यह कथन उचित नहीं है, क्योकि …

Read more

भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

1. कृषि पर निर्भरता :- भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। कृषि का कुल राष्ट्रीय आय में 30 प्रतिशत का योगदान है। विकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान 2से 4 प्रतिशत है। वर्षा कृषि के लिये जल का प्रमुख स्त्रोत है। अधिकांश क्षेत्रों में पुरानी तकनीक से कृषि की जाती है। …

Read more

कांच के प्रकार

बाजार में काँच के अनेक प्रकार उपलब्ध है। इसके साधारण खिड़की के शीशे से लेकर गोली रोधी कांच के रूप में, विभिन्न अनुप्रयोग होते है। कुछ प्रकार के काँच और उनका उपयोग नीचे वर्णित किया गया है। सोडा काँच या मुलायम काँच –  यह साधारणतया प्रयोग होने वाला सस्ता, निम्न वर्ग का काँच होता है। कुल …

Read more

बहुलक का वर्गीकरण

उत्पति के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण – प्राकृतिक बहुलक – प्रकृति (पादप और जीवों) से प्राप्त बहुलक प्राकृतिक बहुलक होते हैं उदाहरणार्थ, स्टार्थ, सेल्यूलोज, प्राकृतिक रबर, प्रोटीन आदि। संश्लेषित बहुलक – प्रयोगशाला में विरचित किए गए बहुलक संश्लेषित बहुलक कहलाते है।यह मानव – निर्मित बहुलक भी कहलाते हैं उदाहरणार्थ, पॉलीथीन, पी.वी.सी., नायलॉन, टेफ्लॉन, बेकेलाइट, टेरिलीन, संष्लेशित रबर …

Read more

रेडियोधर्मी प्रदूषण के दुष्प्रभाव

मानव स्वास्थ पर प्रभाव –  रेडियोधर्मी पदार्थ से परमाणु केन्द्रकों से अल्फा, बीटा या गामा आदि कण किरणाों के रूप में निकलते हैं आयनीकरण द्वारा नाभिकीय विकिरण जीवित ऊतकों के जटिल अणुओं को विघटित कर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इन मृतकोशिकाओं के कारण चर्मरोग, कैन्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण …

Read more

वायु प्रदूषण के प्रभाव एवं स्रोत

वायुमडंल में विशाल गैसे एक निश्चित मात्रा और अनुपात में होती है, जब वायु के अवयवों में अवांछित तत्व प्रवेश कर जाते है तो उसका मौलिक सतुंलन बिगड जाता है। इसका प्रभाव विभिन्न जीव-जन्तुओं, पडे – पौधे मौसम व जलवायु तथा स्वयं मानव पर स्पष्ट: परिलक्षित हे रहा है वायु पद्रूषण के प्रभावों को दो वर्गो …

Read more

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ

प्रकृति का अवकोलन करने पर जो कुछ परिलक्षित होता है। पर्यावरण के अंतर्गत आता है। पर्यावरण  के लिये अग्रेजी शब्द Enviroment प्रयुक्त किया जाता है, जो फ्रेच भाषा के Environ से बना है जिसका अर्थ होता है, आस पास का वातावरण। हिन्दी में पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि + आवरण। अत: पर्यावरण परििस्थ्तियों एवं …

Read more