हरी खाद के लाभ एवं बनाने की विधि

हरी खाद से अभिप्राय उन फसलों से तैयार की जाने वाली खाद से है जिन्हें केवल खाद बनाने के उद्देश्य से ही लगाया जाता है तथा इन पर फल-फूल आने से पहले ही इन्हें मिट्टी में दबा दिया जाता है। ये फसलें सूक्ष्म जीवों द्वारा विच्छेदित होकर भूमि में ह्यूमस तथा पौधों की वृद्धि के लिए …

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व्यापार चक्र क्या है ?

आखिर व्यापार-चक्र होता क्या है? व्यापार चक्र की कोर्इ उचित परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है। प्रो0 डब्लू0सी0 मिचेल (W.C. Mitchell) के शब्दों में, ‘‘व्यापार चक्रों से आशय संगठित समुदायों की आर्थिक क्रियाओं में होने वाले उच्चावचनों की श्रृंखला से होता है।’’ (Busines cycles are a series of fluctuations in the economic activities of organised communities) …

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व्यावसायिक सम्प्रेषण क्या है ?

सम्प्रेषण ही वह साधन है जिसके द्वारा व्यवहार को क्रियान्वित किया जाता है, परिवर्तनों को लागू किया जाता है, सूचनाओं को उत्पादक बनाया जाता है एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। सम्प्रेषण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचनाओं का आदान-पद्रान शामिल होता है। आधुनिक संचार क्रान्ति के युग में समस्त व्यावसायिक उपक्रमों …

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लाभांश के प्रकार

लाभांश नीतियों में लाभांश के प्रकारों को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। कम्पनी विभिन्न प्रकार के लाभांश का वितरण कर अंशधारियों को कम्पनी के ्प्रति निष्ठावान होने के लिए प्रेरित करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के लाभांशों का वर्णन किया जा रहा है। जो कम्पनी की लाभांश नीतियों को प्रभावित करते हैं। और कम्पनी अपने भावी …

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लाभांश नीति का अर्थ, आवश्यक तत्व एवं प्रकार

लाभांश नीति एक बहुत ही लोचपूर्ण एवं व्यापक शब्द है। लाभांश नीति दो शब्दों लाभांश नीति से मिलकर बना है। लाभांश से अभिप्राय कम्पनी की आय में से अंशधारियो को मिलने वाले हिस्से से नीति से अभिप्राय ‘व्यवहार के तरीके’ या ‘कार्य करने के सिद्धान्तों’ से होता है। अत: लाभांश नीति का अर्थ लाभांश वितरित करने …

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रोकड़ प्रबंध क्या है ?

रोकड़ एक ऐसी महत्वपूर्ण चल सम्पत्ति है जिसके बिना किसी व्यवसाय का सफल संचालन करना संभव नहीं होता। रोकड़ में सर्वाधिक तरलता का गुण रहता है। इस कारण रोकड़ का प्रबन्ध वित्त प्रबन्धकों की सबसे बड़ी समस्या है। रोकड़ प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य संस्था की तरलता एवं लाभदायकता में वृद्धि करना होता है। कार्यशील पूंजी के …

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स्कन्ध प्रबंध का अर्थ

स्कन्ध का प्रबन्ध  स्कन्ध का आशय स्कन्ध के भौतिक सत्यापन से होता है जिसमें गणना प्रधान क्रिया मानी जाती है। परन्तु आजकल इसका अर्थ व्यापक रूप से लगाया जाता है। स्कन्ध में विभिन्न वस्तुओं की रखी गयी मात्रा से होता है अर्थात यदि तैयार माल का स्कन्ध उचित है तो ग्राहकों की सेवा उचित ढंग से …

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कार्यशील पूंजी का अर्थ, आवश्यकता, महत्व, प्रकार एवं स्रोत

किसी भी संगठन में कार्यशील पूंजी एक महत्वपूर्ण वित्त स्रोत है जिससे संगठन के दैनिक व्ययों या आवश्यकताओं के पूर्ति होती है। इसमें कार्यशील पूंजी का अर्थ, कार्यशील पूंजी की विचारधारा, कार्यशील पूंजी की आवश्यता एवं कार्यशील पूंजी को प्रभावित करने वाले तत्वों को क्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक व्यवसाय जगत में कार्यशील पूंजी किसी …

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वित्त के स्रोत

किसी भी संगठन में वित्त के साधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके आधार पर एक संगठन अथवा संस्था का जन्म होता है। दीर्घकालीन, मध्यकालीन एवं अल्पकालीन वित्त के साधन संगठन के जीवन क्रम में अपरिहार्य है। प्रस्तुत इकार्इ में इनकी क्रमानुसार व्याख्या की गर्इ है जो एक कम्पनी के जीवन चक्र को निश्चित करते हैं …

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पूंजी बजटन क्या है ?

पूंजी बजटन का आशय के विभिन्न स्त्रोतों से पूंजी प्राप्त करने केलिए बजट बनाने से नहीं है, बल्कि यह एक विनियोजन निर्णय है। इसलिए कि पूंजी बजटन पूंजी के दीर्घकालीन नियोजन से सम्बन्धित एक प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत पूंजीगत विनियोग की भावी लाभोत्पादकता का अध्ययन करना, उसकी पूंजी लागत की गणना करके अर्जन और लागत की …

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