भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि, लाभ और सावधानियां

भस्त्रिका का शाब्दिक अर्थ है धौंकनी अर्थात एक ऐसा प्राणायाम जिसमें लोहार की धौंकनी की तरह आवाज करते हुए वेगपूर्वक शुद्ध प्राणवायु को अंदर ले जाते हैं और अशुद्ध वायु को बाहर फेंकते हैं। प्राणायाम जीवन का रहस्य है। श्वास के आवागमन पर ही हमारा जीवन निर्भर है और आक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा से रोग उत्पन्न …

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कादम्बरी क्या है ?

‘कादम्बरी’ संस्कृत साहित्य की सर्वाेत्कृष्ट गद्य रचना है। इस कथा ग्रन्थ का उपजीव्य है गुणाढ्य की ‘बृहत्कथा’। कवि-कल्पित कथानक होने के कारण यह गद्य रचना ‘कथा’ विधा के अन्तर्गत परिगणित होती है। यह दो खण्डों में विभक्त है- पूर्वार्ध तथा उत्तरार्ध। पूर्वार्ध में पूरे ग्रन्थ का दो तिहाई भाग है और यह बाणभट्ट की रचना है, …

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योग मुद्रा आसन की विधि, लाभ, सावधानियाँ

इस आसन का प्राचीन पुस्तकों में उल्लेख नहीं मिलता है, बल्कि यह आसन वैज्ञानिकों ने परंपराओं एवं आसन के लाभों को देखते हुए इसे तैयार किया है। इसे योगमुद्रा के नाम से जाना जाता है। योग मुद्रा एक प्राचीन तकनीक है जिसका अभ्यास हम प्राणायाम और मेडिटेशन के दौरान करते हैं। मुद्रा संस्कृत का शब्द है …

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मदर टेरेसा का जीवन परिचय

मदर मैरी टेरेसा एग्नेस गोंझा बोयाजिजू जिन्हें हम मदर टेरेसा के नाम से जानते हैं। रोमन कैथेलिक चर्च द्वारा इन्हें कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा गया था। वर्ष 1910 को मदर टेरेसा का जन्म उत्तर मैसेडोनिया में हुआ था। मदर टेरेसा रोमन कैथोलिक नन थी जिन्होनें 1948 में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ले …

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भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि, लाभ और सावधानियां

इस प्राणायाम को करते समय पूरक तथा रेचक में भौंरे तथा भौंरी जैसी आवाज मुख से उत्पन्न होती है, अतः इसे भ्रामरी प्राणायाम के नाम से जाना जाता है।  इसको सुखासन, वज्रासन, सिद्धासन अथवा पद्मासन में बैठकर करना चाहिए। मानसिक तनाव एवं विचारों पर नियंत्रण पाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम किया जाता है।  भ्रामरी प्राणायाम करने …

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सेलेनियम के फायदे, इसकी कमी के कारण और लक्षण

मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण होने पर शरीर बहुत सारी बीमारियों से ग्रसित होने लगता है। वैसे तो असंतुलित भोजन, प्रतिकूल वातावरण व असंतुलित जीवनचर्या जैसे तमाम अन्य कारणों की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण होती रहती है, लेकिन इन कारणों के अलावा शरीर में सेलीनियम की अपेक्षित मात्रा न होने …

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भुजंगासन करने की विधि तथा इसके लाभों का वर्णन

इसे सर्पासन या सर्प मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए लाभकारी है। इससे आध्यात्मिक व भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते है। हठयोग और घेरंड संहिता में इस आसन को कुंडलिनी जागरण करने का साध्य माना जाता है। इस आसन को बच्चे, बूढ़े, जवान, रोगी व निरोगी सभी कर …

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विटामिन B12 के स्रोत, कार्य, कमी से होने वाले रोग

विटामिन B12 (सायनोकोबेलामिन) इस विटामिन के जल में घुलनशील लाल वर्ण के क्रिस्टल होते हैं। विटामिन B12 के स्रोत यह दूध, माँस, अण्डे, यकृत, वृक्क आदि में मिलता है। आमाशय में केवल अन्तःस्थ कारक की उपस्थिति में इसका अवशोषण होता है। अतः इस विटामिन को बहिरस्थ कारक भी कहते है। अवशोषित होकर यह विटामिन यकृत में …

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गुरु नानक का जीवन परिचय

गुरूनानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवण्डी (पाकिस्तान) में हुआ था। आज यह स्थान ‘ननकाना साहिब’ के नाम से जाना जाता है। गुरूनानक जी की माता का नाम तृप्ता था। गुरूनानक जी के पिता का नाम मेहता कल्याणदास था। बड़ी बहन ‘नानकी’ के अनुकरण पर गुरूनानक जी का नाम ‘नानक’ रखा गया। कुछ लोग इसे …

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निष्पादन बजट क्या है? निष्पादन बजट एवं परम्परागत बजट के अन्तर

निष्पादन बजट शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1949 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हूवर कमीशनने अपनी रिपोर्ट में किया था, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि बजट ऐसा होना चाहिए, जो कार्यों, कार्यक्रमों एवं क्रियाकलापों पर आधारित हो। वास्तव में निष्पादन बजट की अवधारणा प्रबन्धकीय कुशलता में वृद्धि से सम्बन्धित है, जो कार्यों एवं कार्यक्रमों पर …

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