अनुसूचित जाति की परिभाषा, जाति के उत्पत्ति के कारक

हिन्दू जाति व्यवस्था एक सामाजिक व्यवस्था है। यह वर्ण व्यवस्था का परिवर्तित रूप है। वर्ण चार थे और इनका आधार श्रम विभाजन था। प्रथम तीन वर्ण-ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य द्विज कहलाते थे तथा चौथा वर्ण शूद्र था। शूद्रों का कार्य द्विजों की सेवा करना था। प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों के अध्ययन से यह ज्ञात होता है …

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राष्ट्रीयता की परिभाषा और स्वरूप

राष्ट्रीयता एक निश्चित, भू-भाग में रहने वाले, जातीयता के बंधन में बंधे, एकता की भावना से युक्त, समान संस्कृति, धर्म, भाषा, साहित्य, कला, परम्परा, रीति-रिवाज, आचार-विचार, अतीत के प्रति गौरव-अगौरव और सुख-दु:ख की समान अनुभूति वाले विशाल जनसमुदाय में पायी जाने वाली एक ऐसी अनुभूति है जो विषयीगत होने के साथ-साथ स्वत: प्रेरित भी है। यह …

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मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की प्रमुख विशेषताएं अथवा एक अच्छे वैज्ञानिक परीक्षण में विशेषताएं होती है?

यदि सामान्य बोलचाल की भाषा में प्रश्न का उत्तर दिया जाये तो कहा जा सकता है कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण व्यावहारिक रूप से किसी व्यक्ति का अध्ययन करने की एक ऐसी व्यवस्थित विधि है, जिसके माध्यम से किसी प्राणी को समझा जा सकता है, उसके बारे में निर्णय लिया जा सकता है, उसके बारे में निर्णय लिया …

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प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं प्रत्यक्ष कर के गुण और दोष क्या है?

सामान्य तौर पर प्रत्यक्ष कर वे कर होते हैं जिनका भुगतान एक ही बार में कर दिया जाता है तथा इन कर का वे ही व्यक्ति भुगतान करते हैं जिन पर वह लगाया जाता है उन के भार को दूसरों पर टाला नहीं जा सकता। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष कर वे होते हैं जिनका भुगतान पहले तो …

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एक कर प्रणाली एवं बहुकर प्रणाली के गुण और दोष

एक कर प्रणाली के अंदर राज्य द्वारा केवल एक कर लगाया जाता है जो या तो कृषि उत्पादन पर हो सकता है, आय पर हो सकता है अथवा अन्य किसी वस्तु पर हो सकता है। एक कर प्रणाली एक कर- केवल कृषि पर – प्रकृतिवादी -अर्थशास्त्रियों का विचार था कि केवल कृषि उत्पादन पर कर लगाया जाये …

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सार्वजनिक ऋण के उद्देश्य

सार्वजनिक ऋण, राज्य द्वारा आय प्राप्त करने का एक साधन है। लोक अथवा सार्वजनिक ऋण उस ऋण को कहते हैं जिसे कि राज्य (state) अपनी प्रजा से अथवा अन्य देशों के नागरिकों से लेता है। सरकार जब उधार लेती है तो उससे लोक ऋण का जन्म होता है। सरकार बैंकों, व्यावसायिक संगठनों, व्यवसाय गृहों तथा व्यक्तियों …

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लोक व्यय क्या है? लोक व्यय में वृद्धि के कारण

लोक व्यय उस व्यय को कहते हैं, जो लोक सनाओं-अर्थात् केन्द्र, राज्य तथा स्थानीय सरकारों के द्वारा या तो नागरिकों की सामूहिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किया जाता है अथवा उन के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण में वृद्धि करने के लिए। आजकल सरकारी व्यय की मात्रा, संसार के प्राय: सभी देशों में निरन्तर बढ़ रही …

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना की मुख्य विशेषताएं

प्रत्येक संविधान के प्रारंभ में एक प्रस्तावना होती है । जिसमें संविधान के मूल उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाता है । यह संविधान का मूल्यवान अंग होने के कारण संविधान की आत्मा, कुंजी तथा मानदण्ड है । यह भारत के प्रजातांत्रिक राज्य का एक संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण घोषणा-पत्र है । भारतीय संविधान की प्रस्तावना …

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भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान को 26 जनवरी, 1950 को देश भर में लागू किया गया । इस सभा का गठन इसलिए किया गया क्योंकि आजादी के बाद भारत के अपने संविधान की आवश्यकता हुई, जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष डाॅ. भीमराव अम्बेडकर थे । किसी भी देश का संविधान उस देश की सर्वोच्च निधि …

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्य एवं शक्तियां

संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रमुख अंगों में सबसे बड़ा तथा सबसे अधिक लोकप्रिय अंग महासभा है। यह संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्रीय निकाय है। जैसा कि ई0पी0चेज ने लिखा है : “महासभा संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्र बिन्दु है। यह न तो अपना स्थान त्याग सकती है और न अपनी महत्वपूर्ण स्थिति के लिए किसी दूसरे अंग को भागीदार …

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