आधुनिकीकरण का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

आधुनिकीकरण सामाजिक परिवर्तन की एक बहुआयामी प्रक्रिया है जो समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक ढांचे को बदल देती है। यह परंपरा में परिवर्तन करने की घोषणा करता ह ै। आधुनिकीकरण का अर्थ आधुनिकीकरण शब्द एक प्रक्रिया का बोध कराता है। आधुनिकीकरण से तात्पर्य सतत् एवं लगातार होने वाली क्रिया से है। साथ ही आधुनिकीकरण …

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उत्तर आधुनिकता का अर्थ एवं परिभाषा

उत्तर आधुनिकता के सम्बन्ध में अधिकतम चिंतक एवं समीक्षक पहले वाले अर्थ को अधिक महत्व देते हैं यद्यपि दूसरे अर्थ के समर्थक चिंतक भी मौजूद है जो उत्तर आधुनिकता को आधुनिकता (वाद) का पुनर्लेखन मानते हैं दोनों ही अर्थों में इतना तो निश्चित है कि आधुनिकता या उसके वादी-रूप ने जो कुछ परोसा था, वह अब …

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भारतीय दर्शन क्या है? भारतीय दर्शन की प्रमुख विशेषताएं

भारतीय दर्शन अध्यात्म विद्या है। भारत में दर्शनशास्त्र मूल रूप से आध्यात्मिक है। ‘दर्शन’ शब्द दर्शनार्थक दृश् धातु से बनता है जिसका अर्थ है देखना या अवलोकन करना। अत: इसका व्युत्पत्तिलभ्य अर्थ किया जाता है ‘दृश्यते अनेन इति दर्शनम्’ अर्थात् जिसके द्वारा देखा जाय और क्या देखा जाय ? साधारणत: हम आँखों से देखते हैं तथा …

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प्रत्यक्ष कर किसे कहते हैं प्रत्यक्ष कर के गुण और दोष क्या है?

सामान्य तौर पर प्रत्यक्ष कर वे कर होते हैं जिनका भुगतान एक ही बार में कर दिया जाता है तथा इन कर का वे ही व्यक्ति भुगतान करते हैं जिन पर वह लगाया जाता है उन के भार को दूसरों पर टाला नहीं जा सकता। इसके विपरीत अप्रत्यक्ष कर वे होते हैं जिनका भुगतान पहले तो …

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एक कर प्रणाली एवं बहुकर प्रणाली के गुण और दोष

एक कर प्रणाली के अंदर राज्य द्वारा केवल एक कर लगाया जाता है जो या तो कृषि उत्पादन पर हो सकता है, आय पर हो सकता है अथवा अन्य किसी वस्तु पर हो सकता है। एक कर प्रणाली एक कर- केवल कृषि पर – प्रकृतिवादी -अर्थशास्त्रियों का विचार था कि केवल कृषि उत्पादन पर कर लगाया जाये …

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सार्वजनिक ऋण के उद्देश्य

सार्वजनिक ऋण, राज्य द्वारा आय प्राप्त करने का एक साधन है। लोक अथवा सार्वजनिक ऋण उस ऋण को कहते हैं जिसे कि राज्य (state) अपनी प्रजा से अथवा अन्य देशों के नागरिकों से लेता है। सरकार जब उधार लेती है तो उससे लोक ऋण का जन्म होता है। सरकार बैंकों, व्यावसायिक संगठनों, व्यवसाय गृहों तथा व्यक्तियों …

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लोक व्यय क्या है? लोक व्यय में वृद्धि के कारण

लोक व्यय उस व्यय को कहते हैं, जो लोक सनाओं-अर्थात् केन्द्र, राज्य तथा स्थानीय सरकारों के द्वारा या तो नागरिकों की सामूहिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किया जाता है अथवा उन के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण में वृद्धि करने के लिए। आजकल सरकारी व्यय की मात्रा, संसार के प्राय: सभी देशों में निरन्तर बढ़ रही …

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना की मुख्य विशेषताएं

प्रत्येक संविधान के प्रारंभ में एक प्रस्तावना होती है । जिसमें संविधान के मूल उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाता है । यह संविधान का मूल्यवान अंग होने के कारण संविधान की आत्मा, कुंजी तथा मानदण्ड है । यह भारत के प्रजातांत्रिक राज्य का एक संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण घोषणा-पत्र है । भारतीय संविधान की प्रस्तावना …

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भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान को 26 जनवरी, 1950 को देश भर में लागू किया गया । इस सभा का गठन इसलिए किया गया क्योंकि आजादी के बाद भारत के अपने संविधान की आवश्यकता हुई, जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष डाॅ. भीमराव अम्बेडकर थे । किसी भी देश का संविधान उस देश की सर्वोच्च निधि …

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्य एवं शक्तियां

संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रमुख अंगों में सबसे बड़ा तथा सबसे अधिक लोकप्रिय अंग महासभा है। यह संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्रीय निकाय है। जैसा कि ई0पी0चेज ने लिखा है : “महासभा संयुक्त राष्ट्रसंघ का केन्द्र बिन्दु है। यह न तो अपना स्थान त्याग सकती है और न अपनी महत्वपूर्ण स्थिति के लिए किसी दूसरे अंग को भागीदार …

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