उद्यमिता क्या है?

जो व्यक्ति जोखिम उठाता हैं तथा संसाधनों की व्यवस्था करता है, उद्यमी कहलाता है तथा वह जो कौशल दृष्टिकोण चिन्तन करता हैं उसे उद्यमिता कहते हैं। इस में उद्यमिता एवं इसकी भूमिका का अध्ययन करेंगे। उद्यमिता का अर्थ एक उद्यमी का आशय ऐसे व्यक्ति से है जो व्यापारिक अवसर की पहचान करता है, नये व्यवसाय की …

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मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा, आवश्यकता, उद्देश्य एवं प्रक्रिया

मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा गोरडन मेकवेथ के शब्दों में ‘‘जनशक्ति नियोजन के दो चरण है (क) जनशक्ति सम्बन्धी आवश्यकताओं का अनुमान लगाना और (ख) जनशक्ति की पूर्ति हेतु आयोजन करना।’’ जिसलर इ.बी. (Geisler E.B.) –‘‘मानव शक्ति नियोजन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसमें पूर्वानुमान, विकास, नियन्त्रण व क्रियान्वयन सम्मिलित है, जिसके द्वारा संस्था को इस …

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परिकल्पना या ‘उपकल्पना’ क्या है ?

किसी भी अनुसंधान और सर्वेक्षण के समस्या के चुनाव के बाद अनुसंधानकर्ता समस्या के बारे में कार्य-कारण सम्बन्धों का पूर्वानुमान लगा लेता है या पूर्व चिन्तन कर लेता है यह पूर्व चिन्तन या पूर्वानुमान ही प्राक्कल्पना, परिकल्पना या ‘उपकल्पना’ कहलाती जॉर्ज लुण्डबर्ग ने अपनी पुस्तक “Social Research” में उपकल्पना को परिभाषित करते हुए लिखा है कि …

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प्रविवरण क्या है?

प्रविवरण एक तरह का कम्पनी का आमंत्रण होता है जिसके द्वारा जनता को अंश खरीदने के लिये आमंत्रित किया जाता है। भारतीय कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 2 के अनुसार- ‘‘प्रविवरण से आशय किसी भी ऐसे प्रलेख से है जिसमें प्रविवरण, नोटिस, गश्ती पत्र, विज्ञापन या अन्य प्रलेख कहा गया हों और जिसके माध्यम से जनता …

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पार्षद अंतर्नियम क्या है ?

कंपनी का पार्षद सीमानियम कंपनी के कार्यक्रम व उदृदेश्यों को निर्धारित करता है, परंतु इन उद्देश्यों की पूर्ति किन नियमों के अधीन की जायेगी, इसका निर्धारण पार्षद अंतर्नियम द्वारा किया जाता है। यह कंपनी का दूसरा महत्वपूर्ण प्रलेख होता है। इसमें कंपनी के विभिन्न पक्षकारों, जैसे- अंशधारियों एवं ऋणपत्रधारियों के अधिकार, कर्तव्य, अंशो का निर्गमन, हस्तांतरण …

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पार्षद सीमा नियम क्या है ?

पार्षद सीमानियम कम्पनी का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रलेख है। इसे कम्पनी का संविधान कहते है। इसमें कम्पनी के अधिकारो, उद्देश्यों, कार्यक्षेत्र का वर्णन किया जाता है। कंपनी को केवल वही कार्य करना चाहिए जो पार्षद सीमानियम में लिखे गये है, पार्षद सीमानियम के विपरीत किये जाने वाले कार्य अवैधानिक माने जाते है। इसे कम्पनी का चार्टर, स्मृति …

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निर्देशन के प्रतिमान

निर्देशन के प्रतिमान का अभिप्राय वह प्रारूप है जिसके अन्तर्गत निर्देशन की प्रक्रिया को संचालित किया जाता है। निर्देशक के विविध प्रतिमानों का स्वरूप समय-समय पर निर्देशन प्रक्रिया में हो रहे परिवर्तनों के कारण ही निकलकर आया है। प्रतिमानों की प्रमुख भूमिका निर्देशन प्रक्रिया को वस्तुनिषठ एवं सार्वभौमिक स्वरूप प्रदान करना है। शर्टजर एण्ड स्टोन ने …

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निर्देशन का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

मानव अपने जीवन काल में व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों ही पक्षों में अधिकतम विकास लाने के लिए सदैव सचेष्ट रहता है इसके लिये वह अपने आस पास के पर्यावरण को समझता है और अपनी सीमाओं व सम्भावनाओं, हितों व अनहितों गुणों व दोषों को तय कर लेता है। परन्तु जीवन की इस चेष्टा में कभी वे …

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परीक्षण मानक का अर्थ एवं महत्व

शिक्षा, मनोविज्ञान व समाजशास्त्र के अधिकांश चरों की प्रकृति अपरोक्ष होती है जिसके कारण उनके मापन की किसी एक सर्वस्वीकृत मानक र्इकार्इ का होना सम्भव नही हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्राप्तांकों को अर्थयुक्त बनाने या उसकी व्याख्या करने की समस्या उत्पन्न होती है। इसके लिए परीक्षण निर्माता कुछ ऐसे सन्दर्भ बिन्दु निर्धारित करता है …

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परीक्षण वैधता क्या है ?

परीक्षण वैधता का परीक्षण के उद्देश्यों से घनिष्ठ सम्बन्ध है। एक अवैध परीक्षण कभी भी निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता। कोर्इ परीक्षण जितनी शुद्धता और सार्थकता से अपने उद्देश्यों का मापन करता है वह परीक्षण उतना ही वैध होता है। अत: किसी परीक्षण की वैधता उसकी वह मात्रा है जिस सीमा तक वह उस वस्तु …

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