निदेशन का अर्थ एवं कार्य

निदेशन का अर्थ उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संगठन में कार्यरत लोगों को निर्देश देने, मार्ग दर्शन करनें, पर्यवेंक्षण करने नेतृत्व प्रदान करने एवं उनको प्रेरित करने से है। निदेशन लोगों को यह बताने की प्रक्रिया है कि उन्हे क्या करना है तथा यह देखना कि वे इसे सर्वश्रेष्ठ तरीके से करें। अत: निदेशन के कार्य …

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पारिश्रमिक का अर्थ

कर्मचारियों द्वारा संगठन को दी गर्इ सेवाओं के बदले में मिलने वाले अनेकों वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रतिफलों से है। इसमें मजदूरी, वेतन भत्ते और अन्य लाभांश सम्मिलित है जिसे एक नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के बदले प्रदान करता है। भागों पारिश्रमिक को दो भागों में वगीकृत किया जा सकता है : (क) आधारभूत/प्राथमिक पारिश्रमिक। …

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नियुक्ति का अर्थ, महत्व एवं प्रक्रिया

किसी उपक्रम  में रिक्त पदों पर पद के अनुरूप योग्य व्यक्तियों को कार्य पर रखना नियुक्ति कहलाता है। इसमें कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं विकास भी शामिल है। नियुक्ति का महत्व उद्द्देयों की प्राप्ति हेतु आवश्यक- सभी संस्था की अपनी कुछ न कुछ उद्देश्य होते हैं। जिसकी पूर्ति हेतु संस्था प्रमुख नीतियों का निर्धारण करते है जिसकी …

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वैज्ञानिक प्रबंध की अवधारणा

वैज्ञानिक प्रबंध की अवधारणा एफ.डब्न्ल्यू. टेलर, जो प्रबन्ध के सुप्रसिद्ध विशेषज्ञ थे, ने अमेरिका की एक स्टील कम्पनी में प्रशिक्षु, मशीनकार, फोरमैन तथा अन्तत: मुख्य इंजीनियर के रूप में कार्य किया। टेलर ने प्रबन्ध का एक नया दृिष्टकोण सुझाया । इसे वैज्ञानिक प्रबधं के नाम से जाना जाता है टेलर के मूलभूत वैज्ञानिक सिद्धान्त निम्नलिखित हैं। कार्यानुमान …

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नियोजन क्या है ?

साधारणत: जब कोर्इ व्यक्ति किसी कार्य को कब करना है ? कैसे करना है ? कहां करना हैं ? और किस रूप में करना है आदि प्रश्नों को विचार करता है तो एक विभिन्न विकल्पों में से किसी एक निर्णय पर पहुचता है उसे ही नियोजन कहते है साधारण शब्दो में भविष्य के कार्यों का वर्तमान …

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उद्यमिता क्या है?

जो व्यक्ति जोखिम उठाता हैं तथा संसाधनों की व्यवस्था करता है, उद्यमी कहलाता है तथा वह जो कौशल दृष्टिकोण चिन्तन करता हैं उसे उद्यमिता कहते हैं। इस में उद्यमिता एवं इसकी भूमिका का अध्ययन करेंगे। उद्यमिता का अर्थ एक उद्यमी का आशय ऐसे व्यक्ति से है जो व्यापारिक अवसर की पहचान करता है, नये व्यवसाय की …

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मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा, आवश्यकता, उद्देश्य एवं प्रक्रिया

मानव संसाधन नियोजन की परिभाषा गोरडन मेकवेथ के शब्दों में ‘‘जनशक्ति नियोजन के दो चरण है (क) जनशक्ति सम्बन्धी आवश्यकताओं का अनुमान लगाना और (ख) जनशक्ति की पूर्ति हेतु आयोजन करना।’’ जिसलर इ.बी. (Geisler E.B.) –‘‘मानव शक्ति नियोजन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसमें पूर्वानुमान, विकास, नियन्त्रण व क्रियान्वयन सम्मिलित है, जिसके द्वारा संस्था को इस …

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परिकल्पना या ‘उपकल्पना’ क्या है ?

किसी भी अनुसंधान और सर्वेक्षण के समस्या के चुनाव के बाद अनुसंधानकर्ता समस्या के बारे में कार्य-कारण सम्बन्धों का पूर्वानुमान लगा लेता है या पूर्व चिन्तन कर लेता है यह पूर्व चिन्तन या पूर्वानुमान ही प्राक्कल्पना, परिकल्पना या ‘उपकल्पना’ कहलाती जॉर्ज लुण्डबर्ग ने अपनी पुस्तक “Social Research” में उपकल्पना को परिभाषित करते हुए लिखा है कि …

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प्रविवरण क्या है?

प्रविवरण एक तरह का कम्पनी का आमंत्रण होता है जिसके द्वारा जनता को अंश खरीदने के लिये आमंत्रित किया जाता है। भारतीय कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 2 के अनुसार- ‘‘प्रविवरण से आशय किसी भी ऐसे प्रलेख से है जिसमें प्रविवरण, नोटिस, गश्ती पत्र, विज्ञापन या अन्य प्रलेख कहा गया हों और जिसके माध्यम से जनता …

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पार्षद अंतर्नियम क्या है ?

कंपनी का पार्षद सीमानियम कंपनी के कार्यक्रम व उदृदेश्यों को निर्धारित करता है, परंतु इन उद्देश्यों की पूर्ति किन नियमों के अधीन की जायेगी, इसका निर्धारण पार्षद अंतर्नियम द्वारा किया जाता है। यह कंपनी का दूसरा महत्वपूर्ण प्रलेख होता है। इसमें कंपनी के विभिन्न पक्षकारों, जैसे- अंशधारियों एवं ऋणपत्रधारियों के अधिकार, कर्तव्य, अंशो का निर्गमन, हस्तांतरण …

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