उपचारात्मक आहार क्या है आहार संशोधन करते समय ध्यान रखने योग्य बाते?

वह आहार जो रूग्णावस्था में किसी व्यक्ति को दिया जाता है। ताकि वह जल्दी सामान्य हो सके यह सामान्य भोजन का संशोधित रूप होता है। उपचारात्मक आहार कहते है। क्योंकि बीमार पड़ने पर व्यक्ति के शरीर को कोई भाग रोग ग्रसित हो जाता है। जिससे उसकी पोषण आवश्यकता में परिवर्तन आ जाता है। जैसे मधुमेह में …

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समष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, महत्व, मुख्य समस्याएँ

समष्टि शब्द के मूल (Origin) को जान लेने से ही हम इसके अर्थ को जान सकते हैं। यह शब्द ग्रीक के मैक्रोस (Macros) शब्द से लिया गया है जिसका उस भाषा में अर्थ बड़ा (Large) है। अतः समष्टि अर्थशास्त्र से अभिप्राय व्यापक स्तर पर संपूर्ण अर्थव्यवस्था का विश्लेषण करना है। समष्टि अर्थशास्त्र विशिष्ट इकाइयों का अध्ययन …

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व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

व्यक्तियों और व्यक्तियों के छोटे ग्रुपों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र है। व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ हिन्दी भाषा का शब्द ‘व्यष्टि अर्थशास्त्र‘ अगेंज्री भाषा के शब्द माइक्रो (Micro), ग्रीक भाषा के शब्द ‘माइक्रोस’ (Micros) का हिन्दी रूपान्तरण है। व्यष्टि से अभिप्राय है- अत्यतं छोटी इकाई अथार्त् व्यष्टि अर्थशास्त्र का संबंध अध्ययन की सबसे छोटी …

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ठोस अवस्था के गुण || ठोस अवस्था का वर्गीकरण

पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें अवयवी कण (अणु, परमाणु आयन आदि।) परस्पर अत्यन्त प्रबल आर्कशण द्वारा जुडे होते है।  आकार एवं आयतन निश्चित रहते है घनत्व, गलनांक क्वथनांक के मान उच्च होते है। तथा संपीड़यता, विसरणशीलता लगभग नगण्य होती है ठोस अवस्था कहलाती है। ठोस अवस्था के गुण ठोस अवस्था के गुण बताइए – विधुतीय …

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द्रव के गतिक सिद्धांत मॉडल के आधार पर उसके प्रेक्षित गुणों की व्याख्या

गैसो की तुलना में द्रव के अणु एक-दूसरे के अधिक समीप होते है। तथा उनमें आकर्षण बल अधिक होता है। इसे नगण्य नही माना जा सकता। ठोसो की तुलना में द्रव में अणुओं का स्थान निश्चित नही होता तथा न ही वे नियमित पैटर्न दिखाते है। अत: द्रव न तो गैसों के समान पूर्णत: अव्यवस्थित है …

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गैस (गैसीय अवस्था) – विशेषताएँ, गुण

पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएँ होती है-ठोस, द्रव तथा गैस। आधुनिक अनुसन्धानों द्वारा एक अवस्था और ज्ञात की गयी है जिसे प्लाज्मा कहते है। ताप तथा दाब की परिस्थितियों के अनुसार पदार्थ एक समय में किसी एक भौतिक अवस्था में पाया जाता है। इन तीनों अवस्थाओं में कोई सुस्पष्ट सीमांकन रेखा नहीं होती, किसी भी पदार्थ …

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भारत की प्रमुख फसलों के नाम

भारत में लगभग हर प्रकार की फसलें होती है। भारत की प्रमुख फसल है – भारत की प्रमुख फसलें चावल  गेहूं  बाजरा  दलहन चना गन्ना कपास  तिलहन  मूंगफली  चाय कॉफी फल सब्जियाँ फूलों की खेती  मसालें  1. चावल –   चावल भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। यह मुख्य रूप से खरीफ या गर्मी की फसल है। …

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जल के स्रोत, उपयोगिता, समस्याएं, संरक्षण के उपाय

हमारा जीवन बहुत बदल चुका है और हम जीवन के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का विकास देख रहे हैं। हमारे इर्द-गिर्द इलेक्ट्रानिक उपकरण मौजूद हैं, जिन्हें बिजली की जरूरत होती है। जब बिजली नहीं होती, तो वे बेकार हो जाते हैं लेकिन तब भी हम उनके बगैर जिंदा रह सकते हैं। अगर एक दिन भी पानी …

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मृदा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

मृदा विभिन्न प्रकार के पदार्थों का मिश्रण है। उदाहरण के लिए, कण, छोटे कंकड़, क्षय और जीवित जीव जिन्हें खाद सूक्ष्म जीव, आदि कहा जाता है। मृदा की ऊपरी सतह वह है जिसमें पौधे खाद, मिट्टी के कण और जीवित जीवन की शरण में रहते हैं। मृदा या मिट्टी चट्टानों द्वारा ही निर्मित होती हैं।  मृदा …

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भारत की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार || भारत का भौतिक स्वरूप

आकार की दृष्टि से भारत संसार का साँतवा बड़ा देश हैं। एवं जनसंख्या के दृष्टि से चीन के बाद दूसरा नम्बर हैं। भारत की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार भारत पूर्णतया उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। भारत की मुख्य भूमि 804’ से 3706’ एवं 680 7’ से 970 25’ पूर्वी देशांतर के बीच फैली हुई हैं। इस …

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