क्षेत्र पंचायत के कार्य एवं शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संशोधन के अन्र्तगत नई पंचायत राज व्यवस्था में पंचायतें तीन स्तरों पर गठित की गई है। विकेन्द्रीकरण की नीति ही यह कहती है कि सत्ता, शक्ति व संसाधनों का बंटवारा हर स्तर पर हो। तीनों स्तर पर पंचायतों के द्वारा लोगों की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनायें बनाइर् जाती है। पंचायतों को इस व्यवस्था …

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ग्राम पंचायत का गठन, कार्यकाल, कार्य एवं अधिकार

ग्राम पंचायत का शाब्दिक अर्थ है- गाँव के लोगों द्वारा चुने हुए पाँच आदमियों की सभा। गाँधी के पंचायत राज में सबसे नीचे की इकाई गाँव है और इसकी कार्य पालिका ग्राम पंचायत है। गाँव का शासन पाँच व्यक्तियों की पंचायत चलायेगी जो न्यूनतम निर्धारित योग्यता रखने वाले वयस्क स्त्री पुरुषों द्वारा प्रतिवर्ष चुनी जायेगी। इन पंचों के …

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स्थानीय स्वशासन क्या है स्थानीय स्वशासन कैसे मजबूत होगा ?

स्थानीय स्वशासन क्या है? स्थानीय स्वशासन लोगों की अपनी स्वयं की शासन व्यवस्था का नाम है। अर्थात् स्थानीय लोगों द्वारा मिलजुलकर स्थानीय समस्याओं के निदान एवं विकास हेतु बनाई गई ऐसी व्यवस्था जो संविधान और राज्य सरकारों द्वारा बनाए गये नियमों एवं कानून के अनुरूप हो। दूसरे शब्दों में ‘स्वशासन’ गांव के समुचित प्रबन्धन में समुदाय …

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विकेन्द्रीकरण अर्थ, परिभाषा, आयाम, लाभ आवश्यकता व महत्व

आज विश्व स्तर पर विकेन्द्रीकरण की सोच को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन एवं अभिशासन में आम जन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था को अपनाना वर्तमान समय की बहुत बड़ी आवश्यकता है। भारत के सन्दर्भ में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था सम्पूर्ण शासन प्रणाली के समुचित संचालन के लिए बहुत जरूरी …

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श्रमिक शिक्षा क्या है भारत में श्रमिक शिक्षा के उद्देश्य ?

श्रमिक शिक्षा पर विचार देश में प्रचलित शिक्षा के सन्दर्भ में किया जाता है, किन्तु स्कूल व कॉलेजों में दी जाने वाली शिक्षा और श्रमिक शिक्षा में एक आवश्यक अन्तर यह है कि जब पहले की तरह शिक्षा शैक्षिक सिद्धान्तों और व्यवहारों से जो हमें आज तक विरासत में मिले हैं, सम्बन्धित है, श्रमिक शिक्षा श्रमिकों …

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श्रम का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएँ

शारीरिक या मानसिक रुप से किया गया कोई भी कार्य श्रम ही है, जिसके बदले में मजदूरी की प्राप्ति होती है। यदि कोई प्राणी अगर किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मानसिक या शारीरिक कार्य किया जाता है, तो वह श्रम कहलाता हैं।  श्रम की परिभाषा थामस के अनुसार :- “श्रम से मानव के उन सभी …

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सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य, परिभाषा एवं उद्देश्य

सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य का अर्थ  परिभाषाओं के विश्लेषण के आधार पर सामूहिक सेवा कार्य के अर्थ पर प्रकाश डाला जा सकता है। वैज्ञानिक ज्ञान, प्रविधि, सिद्धान्तों एवं कुशलता पर आधारित प्रणाली।  समूह में व्यक्ति पर बल।  किसी कल्याणकारी संस्था के तत्वावधान मे किया जाता है।  व्यक्ति की सहायता समूह के माध्यम से की जाती है।  …

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विधिशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, वर्गीकरण, प्रकृति तथा विशेषता

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा समूह में रहना उसकी नैसर्गिक प्रवृत्ति है। यह नैसर्गिक प्रवृत्ति मनुष्य को अन्य मनुष्यों से सम्बन्ध रखने को बाध्य करती है। सामाजिक जीवन इन्हीं संबंधों पर आधारित है। इन सामाजिक संबंधों को व्यवस्थित रखने के लिए मनुष्य के व्यवहार पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है। यही कारण है कि विधि …

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74वां संविधान संशोधन क्या है 74वें संविधान संशोधन के उद्देश्य?

74वां संविधान संशोधन क्या है? सत्ता विकेन्द्रीकरण की दिशा में संविधान का 73वां और 74वां संविधान संशोधन एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम है। 74वां संविधान संशोधन नगर निकायों में सत्ता विकेन्द्रीकरण का एक मजबूत आधार है। अत: इस अध्याय का उद्देश्य 74वें संविधान संशोधन की आवश्यकता और 74वें संविधान संशोधन में मौजूद उपबंधों और नियमों को …

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पंचायत समिति का गठन कैसे होता है इसके कौन कौन से कार्य है?

पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण समुदाय के आर्थिक विकास व सामाजिक न्याय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गयी है। इन जिम्मेदारियों को पूर्ण करने हेतु पंचायत को 29 विषयों से सम्बन्धित विभिन्न कार्य सौंपे गये हैं। पंचायत तीनों स्तरों पर विभिन्न कार्यों के नियोजन और संचालन हेतु विभिन्न समितियों के निर्माण की व्यवस्था संविधान में की …

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