सूचना तकनीक अधिनियम, भारतीय संसद द्वारा 17 अक्टूबर 2000 को
पारित किया गया । सूचना तकनीक कानून 09 जनवरी 2000 को पेश किया गया
था। 30 जनवरी 1997 को संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेम्बली में प्रस्ताव सं.
51/162 द्वारा सूचना तकनीक की आदर्श नियमावली (जिसे यूनाइटेड नैशंस
कमीशन आफ इन्टरनेशनल ट्रेड लाॅ के नाम से जाना जाता है ) पेश किए जाने
के बाद सूचना तकनीक कानून 2000 को पेश करना अनिवार्य हो गया था। सूचना
तकनीक अधिनियम में इलैक्ट्रानिक कामर्स को भी दायरे में लाया गया। इसमें 27
अक्टूबर 2009 को एमेन्डमेन्ट किया गया।
सूचना तकनीक अधिनियम 2000 के मुख्य उद्देश्य
सूचना तकनीक अधिनियम के मुख्य उद्देश्य हैं –
- इलैक्ट्रानिक माध्यम या संदेश में लेनदेन को कानूनी मान्यता देना।
- सरकारी एजेन्सी को दस्तावेज जमा करने में इलैक्ट्रानिक मोड में सुविधा
देना। - कागजी दस्तावेजों की तरह इलैक्ट्रानिक दस्तावेजों को भारतीय पैनल
कोड तथा भारतीय साक्ष्य एक्ट 1872 में कानूनी मान्यता देना । - इलैक्ट्रानिक दस्तावेजों को कानूनी मान्यता देना।
- डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता देना ।
उल्लघंन तथा अन्य कानून के प्रावधानों के साथ समन्वित विस्तृत रुप में मुख्य रुप
से निम्न उद्देश्यों एवं कानूनों की पूर्ति करने की –
- इलैक्ट्रानिक रिकार्ड को मान्यता-
सूचना तकनीक अधिनियम ने इलैक्ट्रानिक दस्तावेजों तथा सूचना भरने,
फार्म को जिनको बाद में एक्सेस किया जा सकता है को कानूनी मान्यता दे दी
है। इलैक्ट्रोनिक रिकार्ड टाईप या ईमेल के रिकार्ड को मान्यता देता है। - डिजिटल सिग्नेचर को मान्यता-
यह कानून डिजिटल सिग्नेचर को बराबर की मान्यता प्रदान करता है कि
व्यकित ने स्वयं हस्ताक्षर किए हैं । - सरकारी कार्यालयों में दस्तावेजों इलैक्ट्रानिक को मान्यता
यह कानून किसी भी प्रकार आवेदन, लाइसेस, परमिट, आदि पैसों की
प्राप्ति तथा भुगतान को उतना ही कानूनी मान्यता प्रदान करता है। - इलैक्ट्रानिक रिकार्ड को रखना –
यह कानून इलैक्ट्रानिक फार्म में दस्तावेजों का मूल रुप से रखने तथा
बाद में उनके उसी मान्यता के साथ प्रयोग करने का अधिकार देने तथा दस्तावेजों
को इलैक्ट्रानिक माध्यम से भेजना को भी मान्यता तथा कानूनी संरक्षण देता है।
