अनुक्रम
मैक्स वेबर ने अपनी पुस्तक ‘Economy and society’ तथा ‘Parliament and Government in the Newly Organised Germany’ में इस सिद्धांत का वर्णन किया है। यद्यपि मैक्स वेबर ने इन पुस्तकों में कहीं भी प्रत्यक्ष रूप में नौकरशाही का अलग सिद्धांत प्रतिपादित नहीं किया है। उसका नौकरशाही का सिद्धांत इन पुस्तकों में शक्ति, प्रभुत्व तथा सत्ता पर दिए गए विचारों में विद्यमान है। वेबर ने सत्ता का वर्गीकरण वैधता के आधार पर किया और इसी आधार पर संगठनों का भी वर्गीकरण किया।
नौकरशाही को विधिक सत्ता पर आधारित करते हुए वेबर ने कहा है कि इस सत्ता में एक विधि संहिता का निर्माण करके संगठन के सदस्यों को उसका पालन करना अनिवार्य कर दिया जाता है। प्रशासन कानून के शासन पर ही कार्य करता है और जो व्यक्ति सत्ता का प्रयोग करता है, वह अवैयक्तिक आदेशों का ही पालन करता है। विधिक सत्ता में वफादारी सत्ता प्राप्त व्यक्ति के प्रति न होकर अवैयक्तिक विधि या कानून के प्रति ही होती है। इसी प्रकार नौकरशाही भी निष्पक्ष, कार्य विशेषज्ञ तथा अवैयक्तिक होती है।
मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की विशेषताएं
- यह नौकरशाही स्पष्ट श्रम विभाजन पर आधारित होती है। इसमें प्रत्येक कर्मचारी को कुछ निश्चित उत्तरदायित्व सौंपे जाते हैं और विधिक सत्ता की शक्ति भी दी जाती है।
- इस नौकरशाही में कार्य करने की प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित होती है।
- इसमें कर्मचारियों को पद-सोपानों में बांट दिया जाता है। ‘आदेश की एकता के’ सिद्धांत को प्रभावी बनाने के लिए इसमें आदेश ऊपर से नीचे आते हैं और संगठन एक पिरामिड की तरह होता है।
- इसमें कार्यों के निष्पादन के लिए विधिपूर्वक व्यवस्था होती है। इसमें व्यक्ति को वही कार्य सौंपा जाता है, जिसमें वह दक्ष होता है।
- इसमें पद के लिए योग्यताएं निर्धारित रहती हैं। इसमें उन्हीं व्यक्तियों का चयन किया जाता है जो पद हेतु निर्धारित योग्यता व दक्षता रखते हैं।
- इसमें कर्मचारियों का वेतन पदसोपान में उनके स्तर, पद के दायित्व, सामाजिक स्थिति आदि के आधार पर तय किया जाता है।
- यह नौकरशाही अनौपचारिक सम्बन्धों की बजाय औरपचारिक सम्बन्धों पर आधारित होती है। इसमें निर्णय व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों की बजाय औचित्य के आधार पर नियमों की परिधि में रहकर ही लिए जाते हैं।
- इसमें संगठन के निर्णयों और गतिविधियों का आधिकारिक रिकार्ड रखा जाता है। इस कार्य में फाईलिंग प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।
- इसमें कार्य-अनुशासन पर जोर दिया जाता है।
- इसमें कर्मचारी तथा उसके कार्यालय में भेद किया जाता है।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि वेबर की नौकरशाही प्रशासन की एक ऐसी व्यवस्था है जो विशेषज्ञता, निस्पक्षता तथा अमानवीय सम्बन्धों पर आधारित होता है। वेबर के अनुसार नौकरशाही एक यन्त्र के रूप में कार्य करती है। पश्चिमी औद्योगिक देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाएं काफी हद तक नौकरशाही के इसी सिद्धांत पर आधारित है।
विकासशील देशों में वेबर के नौकरशाही सिद्धांत की प्रासंगिकता
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतन्त्र हुए अधिकतर विकासशील देशों के सामने आर्थिक-विकास तथा राजनीतिक स्थायित्व की प्रमुख समस्या थी। इसमें से अधिकतर देश आज भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इन देशों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो इन समस्याओं पर लगभग काबू पा चुका है। ब्रालीन भी इस मार्ग पर काफी आगे निकल चुका है। आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को एक ऐसे नौकरशाही तन्त्र की जरूरत थी जो उसके संविधानिक आदर्शों का सम्मान करते हुए निष्पक्ष रहकर विकास में अपना पूर्ण योगदान दे सके।
वेबर के नौकरशाही सिद्धांत की आलोचना
- मार्क्सवादियों की दृष्टि में वेबर का सिद्धांत समाज पर पूंजीवादी प्रभुत्व को उचित मानता है। उनका तर्क है कि वेबर के तथाकथित ‘इतिहास का दर्शन’ का इरादा सत्ता को विधिसंगत बनाना था और वर्ग-संघर्ष को केवल शक्ति की राजनीति का रूप देना था।
- यह सिद्धांत व्यावहारिक दृष्टि से अपूर्ण है। यह बाहर से व्यवस्थित और अनुशासित दिखाई देने पर भी अन्दर से शक्ति के लिए सर्वत्र फैले हुए संघर्ष की वास्तविकता पर ही आधारित है।
- अनौपचारिक सम्बन्धों पर आधारित होने के कारण यह संगठन के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण की उपेक्षा करता है।
- आदर्श शब्द का प्रयोग नौकरशाही के लिए करना वेबर की मूर्खता ही है। यदि ध्यान से देखा जाए तो नौकरशाही सत्तावादी मनोवृत्ति, अहं एवं श्रेष्ठता की भावना, अमानवीय व रूढ़िवादिता, लालफीताशाही आदि प्रवृत्तियों के कारण घृणास्पद अवधारणा बन जाती है। इसलिए इसके लिए आदर्श शब्द का प्रयोग करना अनुचित है।
- संगठन की कार्यकुशलता में आदर्श रूप की बजाय कर्मचारियों के तकनीकी स्तर, संगठन के बच्चों, लोक सेवकों व कर्मचारियों के मधुर सम्बन्ध अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
- यद्यपि यह नौकरशाही विकासशील देशों में प्रचलित अवश्य है, लेकिन इससे वहां की तीव्र आर्थिक-सामाजिक विकास की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता है।
अत: वेबर का नौकरशाही का सिद्धांत एक अपूर्ण व अव्यावहारिक औजार है जिसका सफल प्रयोग विकासशील देशों में नहीं किया जा सकता। लेकिन फिर भी विकसित पूंजीवादी देशों की नौकरशाही में तो इस सिद्धांत के सभी लक्षण अवश्य मिल जाते हैं। इसलिए अन्य सभी सिद्धान्तों से यह सिद्धांत अधिक प्रासंगिक है।
