यह नेशनल इलेक्ट्राॅनिक टाॅल कलेक्शन (National Electronic Toll Collection) NETC कार्यक्रम का हिस्सा है। फास्टैग (FASTag) एक उपकरण है जिसमें वाहन बिना रूके टाॅल भुगतान के लिए रेडियो प्रफीक्वेंसी आइडेंटिपिफकेशन टेक्नोलाॅजी का इस्तेमाल करता है। फास्टैग को वाहन के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है और ग्राहक को इस टैग से प्रीपेड या लिंक्ड बैंक खाता से सीधे टाॅल टैक्स भुगतान की सुविधा प्रदान करता है। प्रीपेड के मामले में टैग को चेक या आनलाइन भुगतान के द्वारा रिचार्ज किया जा सकता है। टाॅल से गुजरते समय फास्टैग से भुगतान होने के तुरंत पश्चात उपभोक्ता को एक मैसेज प्राप्त होता है। इलेक्ट्राॅनिक टाॅल कलेक्शन सिस्टम को आरंभ में वर्ष 2014 में पायलट परियोजना के रूप में स्वर्णिम चतुर्भज मार्ग के अहमदाबाद-मुंबई खंड में लागू की गई थी। वर्तमान में देश के 500 से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर इसे स्वीकार किया जाता है।
टेड जो कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा निगमित कंपनी है, नेशनल पेमेंट काॅर्पोरेशन आफ
इंडिया के साथ टाॅल प्लाजा, टैग करने वाली एजेंसी व बैंक के द्वारा
किया जा रहा है। एक फास्टैग की वैधता पांच वर्षों की होती है।
फास्टैग (FASTag) के लाभ
होने वाले विलंब की वजह से हो रहे नुकसान को कम किया जा सकता
है। साथ ही ईंधन की भी बचत की जा सकती है। वर्ष 2014-15 में
भारत सरकार के एक अध्ययन (भारतीय परिवहन निगम तथा आईआईएम
कलकत्ता द्वारा संयुक्त रूप से) में अनुमान लगाया गया था कि भारतीय
सड़कों पर अतिरिक्त ईंधन उपभोग लागत एवं परिवहन विलंबों की वजह
से प्रतिवर्ष क्रमशः 14.7 अरब डाॅलर व 6.6 अरब डाॅलर का नुकसान
होता है। इस दृष्टिकोण से आशा की जा रही है कि फास्टैग लागू होने
से इन नुकसानों को कम किया जा सकता है।