बेनिटो मुसोलिनी का जन्म सन् 1883 में हुआ था। उसका पिता समाजवादी विचारधारा का समर्थक था, इसलिए मुसोलिनी भी अपने पिता के विचारों से प्रभावित हुआ था। उसकी माता अध्यापनकार्य करती थीं। उनकी प्रेरणा से मुसोलिनी ने भी एक छोटे स्कूल में अध्यापन प्रारंभ कर दिया। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह स्विट्जरलैण्ड चला गया। उसकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उसे स्विट्जरलैण्ड से निष्कासित कर दिया। वहां से मुसोलिनी इटली वापस आ गया और इटली की जनता में अपने क्रांतिकारी विचारों का प्रचार करना प्रारंभ कर दिया।
इटली में फासीवादी दल की स्थापना
अर्थ छडि़यों का गðर होता है।मुसोलिनी का मानना था कि व्यक्तियों को छडि़यों की भांति
एकता के सूत्र में बांध कर शक्तिशाली बनाया जा सकता है। फासिस्ट के लिये एक राज्य,
एक नेता, एक झण्डा महत्वपूर्ण था। फासीवाद के अनुयायी काली कमीजधारी कहलाते थे।
फासीवाद चूँकि साम्यवाद का विरोधी था, अतः पूँजीवादी इससे खुश थे।
हुई। मुसोलिनी इस दल का सर्वेसर्वा प्रधान कमाण्डर था। प्रथम विश्वयुद्ध में इटली
विजयी लोगों की कतार में होते हुए भी पेरिस शांति सम्मेलन से खाली हाथ वापस लौटा था।
इससे इटली की जनता आक्रोशित थी। मुसोलिनी ने इटली की जनता की दुखती रग पर
हाथ रखकर इटली को एक महान राष्ट्र बनाने का दावा किया। मुसोलिनी के व्यक्तित्व एवं
फासीवादी सिद्धांतों के प्रति जनता का अत्यधिक उत्साह था। धीरे-धीरे इटली में फासीवादियों
की संख्या बढ़ती गई। 1921 ई. में इसके 3 लाख सदस्य हो गये।
इस समय इटली का प्रधानमंत्री ग्योविनि था। फासीवाद के बढ़ते प्रभाव
से इटली का राजा चिंतित था। वह समझ गया था कि इटली को ग्रह युद्ध से बचाने के लिये
सत्ता मुसोलिनी को सौंपना आवश्यक है।
27 अक्टूबर, 1922 ई. को 40 हजार फासिस्ट स्वयं सेवकों के साथ मुसोलिनी ने रोम
पर आक्रमण ‘मार्च आफ रोम’ किया। इन परिस्थितियों में 31 अक्टूबर, 1922 ई. को अन्ततः
मुसोलिनी को प्रधानमंत्री बना दिया गया। 1925 ई. में इटली की समस्त सत्ता मुसोलिनी के
हाथ में केन्द्रित हो गयी।
फासीवाद के प्रमुख सिद्धांत
हर चीज राज्य के अधीन थी। वह व्यक्तिवाद का विरोधी था।
फासीवाद राजनीतिक, चिन्तन एवं जनतंत्र के आधारभूत सिद्धांतों को अस्वीकार
करता है।’
उदारवाद का विरोधी था। मुसोलिनी कहता था कि उदारवाद कालातीत हो चुका है।
जीवन को वे एक संघर्ष मानते थे। शक्ति के द्वारा ही सत्ता हासिल की जा सकती
है। फासीवाद राष्ट्र को सैन्य राष्ट्र बनाने का समर्थक था।
दोनों राज्य को सर्व महत्वपूर्ण मानते थे। दोनों अधिनायक तंत्र के समर्थक थे। जर्मनी में
अधिनायक को फ्यूहरर एवं इटली में ड्यूस कहा गया। दोनों प्रचार, युद्ध,
हिंसा के समर्थक थे। अन्तर था तो इतना कि मुसोलिनी चर्च को मानता था, नैतिकता पर बल
देता था। हिटलर न तो चर्च को मानता था न वह पूर्णतः नैतिक था।