जीवनी का अर्थ और विशेषताएँ

जीवनी का अर्थ

जीवनी शब्द जीवन से बना है; इसमें किसी व्यक्ति के जीवन वृत्त का वर्णन होता है। अंग्रेजी
शब्द Biography भी यही अर्थ देता है . Bio जीवन Graphy वर्णन। जीवन चरित में एक
ओर जीवन की स्थूल बाह्य घटनाएँ हैं . कुछ रोचक, कुछ विस्मयकारी। दूसरी ओर किसी
व्यक्ति के चरित्र की कुछ विशेषताएँ हैं जो पाठक के लिए प्रेरणादायी बन सकती हैं। जीवनी
में जीवन की प्रमुख घटनाओं के माध्यम से व्यक्ति के आंतरिक मानसिक विकास का चित्रण
किया जाता है। जीवनी में बाह्य और आंतरिक का सामंजस्यपूर्ण चित्रण होता है।

जीवनी की विशेषताएँ

जीवनी की विशेषताएँ हैं :-

1) जीवनी उसी व्यक्ति की लिखी जाती है जिसमें चारित्रिक विशेषताएँ
हों और लोग उस व्यक्ति के जीवन से प्रेरणा ग्रहण कर सकें। इस दृष्टि से आम तौर
पर इतिहास में प्रसिद्ध और अपने क्षेत्र में ख्याति प्राप्त व्यक्तियों की ही जीवनी लिखी
जाती है। आधुनिक युग में इस नजरिए में कुछ परिवर्तन आया है। अब साहित्य में
आम आदमी द्वारा आम आदमी के लिए लिखने पर बल है। नए युग में उन लोगों की
जीवनी भी लिखी जाती है, जो ख्यातनाम नहीं हैं।

2) जीवनी का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब तथ्य और घटनाक्रम
प्रामाणिक हो। अन्यथा वह कथा साहित्य होगा, जिसमें आदर्श चरित्र या कथानायक
की सृष्टि की जाती है। जीवनी कथा साहित्य नहीं है, इसलिए जब तक वह प्रामाणिक
न हो, लोग उसे प्रेरणास्पद नहीं मानेंगे। यह बात लेखक की विश्वसनीयता से भी
जुड़ती है। लेखक को चाहिए कि वह जीवनी के नायक (या नायिका) के पत्र, डायरी,
उनपर लिखे गए दूसरों के संस्मरण, निजी संबंधों की यादें, सम्भव हो तो उस व्यक्ति
से लिए गए भेंट वार्तालाप आदि का उपयोग करें।
3) जीवनी में नायक (या नायिका) के प्रति लेखक में आदर, श्रद्धा
और गर्व का भाव होना चाहिए, जिससे वह आदर्श चरित्र की प्रमुख विशेषताओं को
उजागर कर सके। लेखक का काम इतना ही नहीं है कि वह ऐतिहासिक क्रम से
घटनाओं का प्रस्तुतिकरण कर दे। वह आदर्श चरित्र की उन विशेषताओं को ढूंढ
निकालता है, जो पहली नजर में सामने नहीं आते। संवेदना और आदर्श चरित्र के
साथ संबंधों के आधार पर कई तरह की जीवनियाँ होती है। ये हैं- आत्मीय जीवनी,
लोकप्रिय जीवनी, कलात्मक जीवनी और मनोवैज्ञानिक जीवनी।
4) चाहे लेखक  आदर्श चरित्र के कितने ही निकट क्यों न हो
कितने ही श्रद्धालु क्यों न हो, उनका चित्रण तटस्थ और निष्पक्ष होना चाहिए। उन्हें
अपनी तरफ से कुछ छिपाना या बढ़ाना नहीं चाहिए; उन्हें अपनी ओर से संदेश देना
या निष्कर्ष निकालना नहीं चाहिए।
5) वर्णन की तटस्थता के बावजूद चित्रण सपाट न हो और न ही
वर्णन उबाऊ हो। जीवंत चित्रण और आकर्षक शैली साहित्यिक जीवनियों का परम
गुण है।

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