नाड़ी शोधन प्राणायाम की विधि और लाभ

इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन प्राणायाम के नाम से इसलिये जाना जाता है, क्योंकि इसके निरंतर अभ्यास से हमारे शरीर की सभी नाड़ियों का शुद्धिकरण भलि प्रकार से हो जाता है। यानि हमारे शरीर के अंदर जो 72.864 नाड़ियाँ है वे सभी नाड़ी शोधन के अभ्यास से शुद्ध हो जाती है इसलिये इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम …

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धौति क्रिया के प्रकार

धौति का अर्थ है धोना या साफ करना । हठयोग में षट् क्रियाओं में धौति का महत्वपूर्ण स्थान है। धौति क्रिया से शरीर की आंतरिक सफाई होती है ।  धौति क्रिया के प्रकार मुख गुहा, आमाशय, छाटी आंत, बड़ी आंत की सफाई हेतु स्वामी घेरण्डनाथ जी ने विभिन्न धौतियां बताई हैं :- 1. अंतः धौति वातसार …

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उज्जायी प्राणायाम करने की विधि, उज्जायी प्राणायाम के क्या लाभ है?

सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर इस आसन को करना चाहिए। इसके अंतर्गत गले को सिकाडे कर अंदर की तरफ सांस लेनी होती है। उज्जायी प्राणायाम से व्यक्ति अपनी सांसों पर विजय प्राप्त करता है। इसलिए इस प्राणायाम को अंग्रेजी में Victorious Breath कहा जाता है। उज्जायी प्राणायाम करते समय समुद्र की अवाज के समान ध्वनि …

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वज्रासन करने की विधि और लाभ

वक्र शब्द का अर्थ टेढ़ा अर्थात मोड़ना है। इस आसन को करते समय गर्दन और पीठ को पीछे की तरफ मोड़ा जाता है जिसके कारण इसे वक्रासन कहा जाता है। इसको करने पर पीठ और पेट पर सबसे ज्यादा खिंचाव होता है। इसलिए यह रीढ़ की हड्डी को लचीला तथा पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है। …

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योग का महत्व क्या है

योग का महत्व आधुनिक समय में योग का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके बढ़ने का एकमात्र कारण व्यस्तता और मन की व्यग्रता है। आधुनिक मनुष्य को आज योग की नितांत आवश्यकता है। बाबा रामदेव ने कहा है कि- ”जो रोज करेगा योग उसे न होगा कोई रोग’। अर्थात योग हमारी शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक …

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