संगठन क्या है इसकी परिभाषा?

संगठन के आशय व्यक्तियों के ऐसे समूह से है जो अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संगठन के संसाधनों एवं मानवीय प्रयासों में एक ऐसा सम्बन्ध स्थापित करता है। ‘‘संगठन व्यक्तियों का एक समूह या तंत्र है जो एक व्यक्ति के नेतृत्व में पूर्व निश्चित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मिलकर समन्वित रूप से कार्य करते हैं।’’ …

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संगठन संरचना का अर्थ, परिभाषा, निर्धारण, प्रभावित करने वाले घटक

किसी भी संगठन की संरचना, उसके गठन के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर की जाती है। एक उपयुक्त संगठन संरचना ही, संगठन के संसाधनों में अच्छा समन्वय कर सकती है और अनुकूलतम परिणामों को प्राप्त करने में सहायक होती है। इसीलिये किसी भी संगठन संरचना का निर्माण सावधानी पूर्वक, गठन के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर …

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अधिकार क्या है ? अधिकारों से जुड़े मुख्य सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन

अधिकार दावे हैं, सामाजिक दावे व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक होते हैं। अधिकार मात्र उसी के हक नहीं हैं जो इन्हें अपने पास रखता है। प्राचीन और मध्य काल में कुछ लोग विशेषाधिकार प्राप्त थे। लेकिन इन विशेषाधिकारों को अधिकार का नाम नहीं दिया जा सकता। अधिकार, विशेषाधिकार नहीं होते क्योंकि ये पात्रता पर …

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निर्देशन का अर्थ, परिभाषा, प्रकृति, सिद्धांत

निर्देशन (Direction) का सामान्य अर्थ संचालन से है।  प्रत्येक स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मार्गदर्शन करना, उनको परामर्श देना, प्रोत्साहन करना तथा उनके कार्यों का निरीक्षण करना निर्देशन कहलाता है। निदर्शन का तात्पर्य अधीनस्थों द्वारा कार्य संपादन करवाने के लिए उनका निर्देशन, मार्गदर्शन तथा उनके कार्य का निरीक्षण करना है। इसके अन्तर्गत कार्य निष्पादन …

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हड़ताल क्या है इसका उद्देश्य क्या है?

हड़ताल का तात्पर्य अस्थायी रूप से श्रमिकों द्वारा कार्य में विघ्न डालना है। यह श्रमिक द्वारा स्वत: कार्यमुक्ति है।औद्योगिक संघर्ष अधिनियम की धारा 2 (क्यू) के अनुसार व्यक्तियों के समूह द्वारा, जो मिलकर कार्य करते हैं सामूहिकता से कार्य नहीं करना अथवा एकमत होकर कार्य करने से मना करना, हड़ताल कहलाता है।’इसी प्रकार हड़ताल का तात्पर्य …

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ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियम

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम जूल के नियमानुसार ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम ही है। W=JHA निकाय को दी गई ऊष्मा संपूर्ण रूप से कार्य में परिवर्तित नहीं होता। इसका कुछ भाग आंतरिक ऊर्जा वृद्धि में व्यय होता है एवं बाकी कार्य में बदलता है अत: प्रथम नियम इस प्रकार होगा ∆Q=∆U+∆W ∆Q निकाय को …

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प्रागैतिहासिक काल का अर्थ क्या है?

सभ्यता के  क्रमबद्ध विकास के पूर्व मानव इतिहास को प्रागैतिहास काल कहा जाता है। इस काल में मनुष्य ने जिस सभ्यता का विकास किया, उसे हम आदि काल की सभ्यता अथवा आदिम सभ्यता के नाम से जानते हैं। यद्यपि इस सभ्यता का काल निश्चित करना कठिन है, किन्तु विद्वानों ने अपने अथक प्रयास से प्रागैतिहास काल के मानव जीवन …

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हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं – Major features of Harappan civilization

इस सभ्यता के लिये साधारण: तीन नामो का प्रयोग होता है- सिन्धु सभ्यता, सिंधु घाटी की सभ्यता और हड़प्पा सभ्यता। इन तीनों शब्दों को एक ही अर्थ है। इनमें से प्रत्येक शब्द की एक विशिष्ट पृष्ठभूमि है। प्रारंभ में 1921 में जब पश्चिमी पंजाब के हड़प्पा स्थल पर इस सभ्यता का पता चला है और अगले …

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हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का वर्णन \ हड़प्पा सभ्यता का अंत कैसे हुआ?

भारत में कांस्य युगीन सभ्यता सिंधु घाटी और इसके अगल-बगल के क्षेत्रों में विकसित हुई। इसे इसके सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण शहरों में से एक शहर हड़प्पा के नाम से हड़प्पा सभ्यता कहते हैं; इसे विस्तृत सिन्धु घाटी सभ्यता भी कहा जा सकता है। इस सभ्यता के नगर 1920 के दशक में तब प्रकाश में आए, जब पुरातत्वविदों …

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उत्तर वैदिक काल- सामाजिक, आर्थिक & धार्मिक जीवन

उत्तर वैदिक काल का सामाजिक जीवन उत्तर वैदिक काल में साहित्य से तत्कालीन सामाजिक दशा पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में समाज का चार सही-विभाजन शुरू हुआ । गोत्र और आश्रम की नई संकल्पनाएं पनपीं । पितृसत्तात्मक परिवार चलते रहे । लेकिन महिलाओं की स्थिति में गिरावट …

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