आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय और रचनाएँ

आचार्य रामचंद्र शुक्ल आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन् 1886 में हुआ। आचार्य शुक्ल हिंदी साहित्य के सर्वोत्कृष्ट गद्यकार हैं। उनका ’हिंदी साहित्य का इतिहास‘ अत्यंत प्रामाणिक ग्रंथ है। ’हिंदी शब्द सागर‘, ’भ्रमर गीत सार‘, ’जायसी ग्रंथावली‘, ’तुलसी साहित्य‘, आदि विविध ग्रंथों का उन्होंने संपादन किया।  हिंदी की सैद्धांतिक समीक्षा के मानदण्डों की स्थापना के संदर्भ …

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आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय एवं रचनाएँ

हिन्दी साहित्य में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का नाम एक श्रेष्ठ रचनाकार के रूप में लिया जाता है। वे हिन्दी के महान गद्य लेखकों में से एक हैं। आचार्य द्विवेदी हिन्दी के सांस्कृतिक एवं ललित निबंधकार के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दी और संस्कृत के महान विद्वान आचार्य द्विवेदी जी की ख्याति एक उपन्यासकार, …

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अलंकार के प्रकार एवं उदाहरण

अलंकार शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘आभूषण’ यानी गहने, किन्तु शब्द निर्माण के आधार पर अलंकार शब्द ‘अलम्’ और ‘कार’ दो शब्दों के योग से बना है। ‘अलम्’ का अर्थ है ‘शोभा’ तथा ‘कार’ का अर्थ हैं ‘करने वाला’। अर्थात् काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तथा उसके शब्दों एवं अर्थों की सुन्दरता में वृद्धि करके …

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गजानन माधव मुक्तिबोध का जीवन परिचय, रचनाएँ, भावपक्ष, कलापक्ष

गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नबम्बर, 1917 में म.प्र. के शिवपुरी में हुआ था । इन्होंने बी.ए. तक अध्ययन प्राप्त किया । आर्थिक संकटों के बावजूद इन्होंने अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच एवं वैज्ञानिक उपन्यासों में विशेष रूचि ली । 11 सितम्बर 1964 में मृत्यु हुई । 13 नवंबर 1917 को ग्वालियर के मुरैना जिले में श्योपुर …

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महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, रचनाएं, भाव पक्ष एवं कला पक्ष

छायावाद के कवियों में महादेवी वर्मा का नाम भी अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। महादेवी वर्मा को ‘आधुनिक मीरा’ की संज्ञा दी गई है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि काव्य क्षेत्र में उनका स्थान कितना ऊँचा है। श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म 1907 ई. में फरुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। महादेवी वर्मा …

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मन्नू भंडारी का जीवन परिचय || प्रमुख रचनाएं || साहित्यिक/काव्यगत विशेषताएं

मन्नू भंडारी का जीवन परिचय श्रीमती मन्नू भंडारी नए दौर के कहानीकारों में अग्रणी स्थान रखती है। जन्म 3 अप्रैल 1931 . को मानपुरा राजस्थान में हुआ था।  इनके पिता सुख सम्पतराय एक ख्यातिलब्ध विद्वान थे। उन्होंने ‘हिन्दी परिभाषिक कोश’ के साथ-साथ विश्वकोश का भी कार्य सम्पन्न किया । वे राजनैतिक रूप से कांग्रेसी थे जो …

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भारतीय निर्वाचन प्रणाली के दोष \ भारतीय निर्वाचन प्रणाली के गुण

निर्वाचन प्रक्रिया से तात्पर्य संविधान में वर्णित अवधि के पश्चात पदों एवं संस्थाओं के लिए होने वाले निर्वाचनों की प्रारंभ से अंत तक की प्रक्रिया से है। निर्वाचन प्रक्रिया की प्रकृति भारतीय संविधान के इस उपबंध द्वारा निर्धारित हुई है कि लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधानसभा के लिए निर्वाचन 1951, राज्य पुनर्गठन अधिनियम सन 1956 …

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जैव विकास के सिद्धांत \ जैव विकास के प्रमाण

जैव विकास- भूवैज्ञानिक काल के दौरान सरल प्रकार के पूर्वजों से ‘‘परिवर्तन’’ के फलस्वरूप जटिल जीवों का बनना विकास कहलाता है। जैव विकास के सिद्धांत आज के विभिन्न जीव उसी रूप में नहीं बने जिस रूप में आज पाए जाते हैं, बल्कि वे एक सामान्य पूर्वज रूप से, जो कहीं अधिक सरल प्रकार का रहा होगा, …

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भारत में वनों के प्रकार, भारत के वनों का वर्गीकरण \ Types Of Forest In India

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत में कुल वन क्षेत्र 7,12,249 वर्ग किलोमीटर है जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.67 प्रतिशत है। वर्ष 2017 में भारत में कुल वन क्षेत्र 70,82,73 किलोमीटर की कमी आयी है।  भारत में वनों के प्रकार भारत में 17 प्रकार के वनों का उल्लेख किया गया है। …

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खनिज संसाधन किसे कहते हैं \ खनिजों का वर्गीकरण। Classification of Minerals

खनिज प्राकृतिक रासायनिक यौगिक तत्व हैं। जो प्रमुखता अजैव प्रक्रियाओं से बना हैं। भूमि से खोदकर निकाले गये पदार्थों को खनिज संसाधन कहते हैं। खनिजों का वर्गीकरण खनिजो की प्रकृति, संरचनाएवं उपयोगिता के आधार पर भारत में पाये जाने वाले खनिज पदार्थों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है – (1) धात्विक खनिज – …

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