दिल्ली सल्तनत के पतन के कारण

दिल्ली सल्तनत के पतन के कारण- स्थायी सेना समाप्त करना – फिरोज शाह तुगलक ने स्थायी सेना समाप्त करके सामन्ती सेना का गठन किया । सैनिकों के वेतन समाप्त कर के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अनुदान दिया गया । अमीरों के भूमि वंशानुगत कर दिए गए थे उसी तरह सैनिकों की भूमि भी वंशानुगत कर दिया …

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ज्वार भाटा के लाभ

लाभदायक प्रभाव – (1) व्यापारिक लाभ-  ज्वार-भाटा से सागरों में हलचल होती रहती है, जिससे सागर हिमावृत होने से बचे रहते हैं और उनमें जल यातायात होता रहता है। आधुनिक युग के भारी जलयानों का उथले बन्दरगाहों तक पहुँच सकना सम्भव होता है, किन्तु जब ज्वार की तरंगें इन उथलें बन्दरगाहों तक जाती है, तो वहाँ …

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संसद के कार्य

भारतीय ससंद के कार्य एवं शक्तियों को विधायी, कार्यपालिका, वित्तिय एंव अन्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है । विधायी कार्य – मूलतया संसद कानून बनाने वाली संख्या है । केन्द्र और राज्यों में शक्ति विभाजन किया गया है जिसके लिए तीन सूचियां है- संघसूची राज्य सुची एवं समवर्ती सूची। संघ सूची में 97 विषय …

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इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की अवधारणा

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की अवधारणा इलेक्ट्रानिक मीडिया अपने स्वरूप में प्रिंट मीडिया से एक दम अलग है। भले ही इसका विकास पिंट्र मीडिया से ही हुआ है और पिंट्र मीडिया के ही आर्दशों और परम्पराओं की छाया में यह फलफूल रहा है। लेकिन इसका स्वरूप इसे कर्इ मायनों में प्रिंट मीडिया से एकदम अलग बना देता है। …

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प्राकृतिक विधि का अर्थ

प्राकृतिक विधि का तात्पर्य प्राकृतिक विधि का तात्पर्य ऐसे नियमों से है जो प्रकृति और मानव स्थिति से इस प्रकार सम्बद्ध है कि इन नियमों के अनुपालन के अभाव में समाज में शान्ति और प्रसन्नता कभी भी कायम नहीं की जा सकती है। ये नियम ऐसे है कि स्वयं र्इश्वर भी इनके विरूद्ध कार्य करने को …

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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 क्या है?

हमारे संविधान ने सूचना के अधिकार के महत्व को समझते हुए इसे मौलिक अधिकार के बराबर का दर्जा दिया था और इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत 1976 में राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में वर्णित मौलिक अधिकार घोषित किया। अनुच्छेद 19 (1) के तहत …

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सामाजिक न्याय की अवधारणा व इसके लाभ विषय

सामाजिक न्याय का अभिप्राय सामान्यत: समतावादी समाज या संस्था की स्थापना करने से है जो समानता, एकता तथा भार्इचारा के सिद्धान्तों पर आधारित हो, मानवाधिकारों के मूल्यों को समझती हो तथा प्रत्येक मनुष्य की प्रतिष्ठा को पहचानने में सक्षम हो। सामाजिक न्याय व इसकी वर्तमान अवधारणा सर्वप्रथम 1840 में जेसुइट लुइगी टपरेली ने थामस एक्वैनस की …

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विजयनगर साम्राज्य की स्थापना एवं पतन के कारण

विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक हरिहर प्रथम तथा बुक्काराय थे । उन्होंने सल्तनत की कमजोरी का फायदा उठाकर होयसल राज्य का (आज का तैमूर) हस्तगत कर लिया तथा हस्तिनावती (हम्पी) को अपनी राजधानी बनाया । इस साम्राज्य पर राजा के रूप में तीन राजवंशों ने राज्य किया – संगम वंश,  सालुव वंश,  तुलव वंश । विजयनगर साम्राज्य का …

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बहमनी साम्राज्य की स्थापना एवं पतन के कारण

बहमनी राज्य की स्थापना तथा उत्कर्ष बहमनी राज्य की स्थापना दक्षिण भारत में मुहम्मद तुगलक के खिलाफ विद्रोह से हुर्इ । 1347 र्इ. में हसन गंगु, अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम से गद्दी पर बैठा और दक्षिण में मुस्लिम राज्य की नींव रखी । यह मुस्लिम राज्य भारत में बहमनी राज्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ । …

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शेरशाह सूरी का जीवन परिचय एवं शासन प्रबन्ध

1. प्रारंभिक जीवन-  शेरशाह सूरी भारत के महान शासकों में एक था । बचपन का नाम फरीद खां था । उसके पिता हसन खां था । वे बिहार प्रान्त में सहसराम के जागीरदार थे । फरीद खां का बचपन सौतेली मां के दबाव में बिता । 2. बिहार का शासक-  सौतेली मां के षड्यंत्रों ने शेरशाह …

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